मेरे बच्चे आएंगे । मुझे आजाद कराने और सरहद मुक्त देशों का निर्माण करेंगे । तब धरती पर मानव का जीवन में शांति , खुशहाली , आनंदमय, , आनंदित और उल्लास पूर्ण होगा । मेरे प्यारे बच्चे , जब तक देशों की, धर्म- जातियों की सरहदें है । तब तक तुम सब अनेकों बिमारी , वायरस या कोरोना वायरस जैसे बिमारीयों से लड़ते और मरते रहोगे और आपस में भी तुम सब लड़ते रहोगे और मरते रहोगे । देश , देश से लड़ेगा, धर्म ,धर्म से लड़ेगा और भाई – भाई लड़ेगा । जब तक मैं आजाद नहीं होऊंगा और सरहद मुक्त हमारी धरती नहीं होगी तब तक युद्ध , लड़ाई-झगड़ा और अनेकों बिमारीयों से तुम सब पिड़ीत रहोगे ।
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अगर हम सब कोरोना वायरस से किसी तरह से बच गए तो हम सब को पेट की भूख से मरना पड़ेगा । आज हमारा भगवान, खुदा भी हमें बचाने नहीं आएगा , क्योंकि यह हमारा कर्मों का फल है। इसे हम सब को भोगना पड़ेगा। चाहे हम सब अपनी खुशी से या दुखी मन से अपने कर्मों के फलों को भोगे , पर अपने कर्मों के फलों को भोगना सभी को पड़ेगा।
एक रास्ता है कि हम सब न कोरोना वायरस के प्रकोप से मरेंगे और न पेट की भूख से मरेंगे। इसके लिए यह जानना जरूरी है कि हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण क्या है ? यह जानना महत्वपूर्ण नहीं कि कोरोना वायरस का जन्म किसने दिया । अमेरिका दिया या चाइना दिया। महत्वपूर्ण यह है कि कैसे हम सब कुरौना वायरस के कहर से बचें। जब कोरोना वायरस का जन्म धरती पर हो चुका है तो इससे बचने का रास्ता निकालना होगा न कि एक दूसरे की आलोचना या निंदा करने से रास्ता मिलेगा। किसने कोरोना वायरस को जन्म दिया, यह जानना हमारे लिए जरूरी नहीं, अगर जिंदा रहे तो बाद में भी हम इसकी जानकारी कर सकते हैं, खोज कर सकते हैं। किसने कोरोना वायरस को जन्म दिया । पर अभी जरूरी यह है कि कैसे हम सब कोरोना वायरस के खौफ से बचे , उसके कहर प्रकोप से बचे। जितना हम सब एक दूसरे का आलोचना करेंगे उतना ही हम सब अपना समय की बर्बादी करेंगे ।उससे अच्छा है कि हम सब मिलकर कोरोना वायरस के फैलाव के उस कारक को खोजे, ढूंढे, नहीं तो हम सब के शरीर की ऊर्जा ही कोरोना वायरस को फैलने में मदद करने लगेगी।
अगर हम सब किसी तरह से कोरोना वायरस के प्रकोप से किसी तरह से बच गए तो पेट की भूख से नहीं बच पाएंगे। कोरोना वायरस से भी खतरनाक वायरस पेट की भूख है। आज चारों तरफ लॉक डाउन है । लॉक डाउन की वजह सेअमीर और गरीब सब के सब बेहाल है ,असहाय है। अमीरों की कंपनियां बंद तोगरीबों की रोजगार बंद है । कब तक सरकार मदद करेगी? उनके पास भी अन्न- धन सब लिमिट में है ।कहां से सरकार अन्न धन को लाएगी ।अगर कंपनीयों को सरकार चालू करती है तो कोरोना वायरस उतना ही तेज गति से के साथ हमारे जीवन पर हमला करेगी। आज लगभग सभी देशों में लोग डाउन है। लोग अपने-अपने घरों में छिपे पड़े हैं फिर भी कोरोना वायरस अपनी गति के साथ बढ़ रहा है ।फैल रहा है । किसी भी देश की सरकार में इतनी हिम्मत नहीं कि कोरोना वायरस के फैलाव को रोक सके उसके प्रकोप को कमजोर कर सकें। दवा वैक्सीन तो नहीं। दवा वैक्सीन कब बनेगी, कब बाजारों में आएगी या मालूम नहीं। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दवा वैक्सीन बनेगी भी या नहीं ।यह किसी को मालूम नहीं। जब अभी एचआईवी या डेंगू जैसे वायरस की दवा या वैक्सीन बनी नहीं तो क्या पता कोरोना वायरस की दवा बनेगी भी या नहीं।
इसलिए हम सबको कोरोना वायरस की दवा या वैक्सीन के बनने का इंतजार नहीं करना होगा इंतजार कहीं ऐसा ना हो कितने लोगों की जिंदगी खा जाए ।आपके पास सिर्फ एक रास्ता बचा है। जिस रास्ते से चलकर आप कोरोना वायरस को अपने जीवन से निकाल कर बाहर कर सकते हैं। उसके प्रकोप को कमजोर और असहाय कर सकते हैं ।आप जानते हैं कि अगर हमारा शत्रु हमसे ज्यादा ताकतवर है । हम उससे लड़ नहीं सकते हैं तो सिर्फ एक ही रास्ता बचता है शत्रु को अपना दोस्त बना लेना । तो आप कहेंगे कि कोरोना वायरस को दोस्त कैसे बनाएं ? यह तो आंखों से दिखता नहीं जब आंखों से दिखता नहीं तो दोस्त कैसे बनाएं ? दोस्त बनाने के लिए वह आपके आंखों से दिखे या ना दिखे पर आपके हृदय में प्रेम रूपी ऊर्जा का दीपक को जलाना होगा। अपने जीवन में प्रेम के महत्व को देना होगा अपने घरों के आसपास प्रेम रूपी दीपक जलाना होगा। तभी हम सब कोरोना वायरस से लड़ कर जीत सकते हैं। अपने जीवन से दूर भगा सकते हैं।
आप जानते हैं कि ईश्वर ने, प्रकृति ने जो भी पदार्थ का निर्माण किया है। वह चाहे पेड़ पौधा हो, पशु – पक्षी, कीड़े मकोड़े , सूर्य – धरती , आग- पानी , हवा हो या मानव या कोरोना वायरस हो। हर पदार्थ में उसने नेगेटिव ऊर्जा या पॉजिटिव ऊर्जा दोनों समान रूप से उसका निर्माण किया है। जिस तरह की ऊर्जा हमारे शरीर के अंदर सक्रिय होती है उसी तरह की ऊर्जा हमारे आसपास मौजूद पदार्थों में सक्रिय होती है चाहे कोरोना वायरस ही क्यों ना हो ।अगर हमारे शरीर के अंदर नेगेटिव ऊर्जा सक्रिय है क्रोध नफरत लोभ लालच है तो हमारा नेगेटिव ऊर्जा बाहर मौजूद नेगेटिव ऊर्जा को आकर्षित करेगी । कोरोना वायरस के अंदर मौजूद नेगेटिव ऊर्जा को आकर्षित करेगी पर पॉजिटिव ऊर्जा को नहीं।आप खुद अपनी आंखों से देखो तो आपको पता चल जाएगा यही कोरोना वायरस पशु पक्षियों का शिकार नहीं करती अपना भोजन नहीं बनाती ।आखिर क्यों ? पशु-पक्षी भी जीवित जीवित पदार्थ है ।जैसे मानव जीवित पदार्थ है ।कोरोना वायरस पशु पक्षियों के ऊपर सवारी करती है पर उसे मारती नहीं। आखिर क्यों ?
यही कोरोना वायरस को जब मनुष्य दिख जाए तो मनुष्य को मारे बगैर छोड़ती नहीं पर पशु पक्षियों को छूती नहीं। क्यों? इसका क्या कारण है ? आप इसके पीछे छिपे कारणों को देखें ।मानव जीवन को देखें , पशु – पक्षियों के जीवन को देखें तो आपको पता चल जाएगा। क्यों कोरोना वायरस मनुष्य को छोड़ती नहीं और पशु-पक्षियों को छूती नहीं ।
धरती हो या ब्रह्मांड सभी जगहों पर ऊर्जा मौजूद है । ऐसा कोई खाली जगह नहीं जहां ऊर्जा का अस्तित्व न हो । यह आपको आंखों से दिखे या न दिखे पर उर्जा का अस्तित्व है। ऐसा कोई जगह नहीं जहां उर्जा मौजूद नहीं हो । सारा खेल ऊर्जा का है जीवन के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है तो मृत्यु के लिए भी ऊर्जा की जरूरत पड़ती है जीवन के लिए प्रेम की ऊर्जा की जरूरत पड़ती है तो मृत्यु के लिए नफरत क्रोध लोभ लालच की ऊर्जा की जरूरत पड़ती है।
हमें जीना है तो हमें अपने जीवन में अपने हृदय में प्रेम रूपी दीपक को जलाना होगा । मरने के लिए सिर्फ एक नकारात्मक विचार काफी है तो जीने के लिए एक सकारात्मक विचार काफी है। कब हम सबके घरों में कोरोनावायरस दखल दे, प्रवेश कर जाए इससे पहले हम सब को अपने अंदर प्रेम रूपी दीपक को अपने अंदर, अपने घरों के अंदर , अपने घरों के आस-पास रहने वाले लोगों के अंदर जलाएं । कोरोनावायरस हम सब का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। वह प्राकृतिक के नियम के विरुद्ध नहीं चल सकता ।आपके अंदर प्रेम रूपी दीपक जलता है तो वह आपके आसपास मौजूद सभी पदार्थों में प्रेम रूपी दीपक जलेगा तभी तो आपका प्रेम रूपी ऊर्जा का दीपक आपके आसपास मौजूद प्रेम रूपी ऊर्जा को आकर्षित करेगी । इसके लिए आपके साथ कौन क्या किया । सब भुला दे ,सबको माफ कर दे और प्रेम रूपी दीपक को अपने हृदय में जलाए, अपने घरों में जलाएं ,अपने घरों के आस पास रहने वाले लोगों अंदर प्रेम रूपी दीपक को जलाएं । कोरोना वायरस में इतना दम नहीं , इतनी उसकी औकात नहीं जो आपको छू सकें।
आप जानते हैं कि हम सब के अंदर अगर नेगेटिव ऊर्जा सक्रिय होती है तो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम कमजोर होता है ,लो होता है । वही अगर हमारे शरीर में प्रेम की ऊर्जा सक्रिय होती हैं तो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम बहुत मजबूत होता है, वह हाई लेवल में होता है। शरीर के सारे हारमोंस सक्रिय रहता है। इस संकट की घड़ी में आप सबको माफ कर दे और अपने दिलों में प्रेम रूपी दीपक को चलाएं आपके पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। न कोई दवा वैक्सिंग बनकर अभी आने वाला है और न आप कभी भी कोरोना वायरस से लड़कर जीत सकते तो हमारा भलाई इसी में है कि हम अपने अंदर प्रेम रूपी दीपक को जलाए और दूसरा कोई रास्ता नहीं है कोरोनावायरस जैसा मौत आपके दरवाजे पर दस्तक देने वाला है उसके आने से पहले हम सभी अपने अंदर प्रेम रूपी दीपक को जलाकर रखना होगा तो ही हम कोरोना वायरस से बच सकते हैं।
नफरत ,घृणा , ईर्ष्या, जलन, क्रोध ,लोभ – लालच से ग्रसित व्यक्ति का ही शिकार करता है कोरोना वायरस। क्योंकि नेगेटिव उर्जा से ग्रसित व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बहुत ही कमजोर होता है। शरीर बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी का निर्माण नहीं कर पाता है शरीर प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं कर पाता है। जिसके कारण ऐसे ही व्यक्ति कोरोना वायरस का शिकार हो जाता हैं सो , आपके साथ किस ने क्या किया , सब भुला दे , सबको क्षमा कर दे और सभी से प्रेम करें । आंखों से दिखने वाले हर वस्तु वो चाहे निर्जीव हो या सचिव, सभी से प्रेम करें। दोस्त हो , दुश्मन हो ,सभी से प्रेम करें ताकि आपका इम्यून सिस्टम मजबूत हो जाए और बीमारी से लड़ने के लिए आपके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए ।सिर्फ अच्छा खाना खाने से ही इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होता। अगर ऐसा होता तो अमीर लोग कभी भी कोरोना वायरस का शिकार नहीं होते आप जानते हैं की आज अमीर और गरीब दोनों कोरोना वायरस के शिकार हो रहे हैं । ऐसा क्यों ? ऐसा इसलिए कि आज इंसान लोभ-लालच से ग्रसित होकर अपना जीवन गुजार रहा है अपने दिल में हृदय में प्रेम रूपी दीपक को जलाए ,सबसे प्रेम करें ।ईश्वर के द्वारा बनाया गया हर पदार्थ , हर वस्तु सभी जीवित है । इंसान के नजर में लोहा लक्कड़ ईट पत्थर सभी मृत है , पर ईश्वर/ खुदा के नजर में वो सभी जीवित है, जिसका अस्तित्व है । इसलिए आप सभी से प्रेम करें। नफरत और घृणा का शैतान शरीर के किसी भी कोने में न रहे। न कभी आप बीमार करेंगे और ना ही कभी कोई कोरोना वायरस आपको छू सकता है
नफरत ,घृणा ,क्रोध, लोभ लालच और ,प्रेम ,करुणा ,सेवा, दया ( नेगेटिव विचार/ पॉजिटिव विचार /नेगेटिव ऊर्जा/ पॉजिटिव ऊर्जा कैसे हमारे शरीर में काम करता है इस विषय में अधिक जानने के लिए नीचे दिए हुए लिंक को ओपन करें (खोलें)। ।
कोरोना वायरस से बचना हो , तो खुद से करें । क्यों मनुष्य कोरोना वायरस से लड़कर कभी जीत नहीं सकता ? इसका कारण आप मानव का इतिहास उठाकर देखें । जब से मानव की उत्पत्ति धरती पर हुई है तभी से लेकर आज तक मानव लड़ता आ रहा है आज से 3000 वर्ष पूर्व मानव 5000 लड़ाइयां लड़ी , वहीं 5000 वर्ष पूर्व मानव 15000 लड़ाई लड़ी इससे और पीछे जाएंगे तो न जाने मानव ने कितनी लड़ाई लड़ी, जिसका हिसाब इतिहास में नहीं मिलेगा । मनुष्य का धरती पर आए हुए लाखो वर्ष हो रहा है , लाखों वर्षों से मनुष्य जर , जोरू और जमीन के लिए लड़ता आ रहा है और आज भी लड़ रहा है। इसका क्या मतलब हुआ , कि मानव जब से धरती पर आया है, तब से लेकर आज तक मानव नकारात्मक ऊर्जा से ग्रसित रहा? नकारात्मक उर्जा से ग्रसित मानव का इम्यून सिस्टम हमेशा कमजोर रहता है पहले भी मानव मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार था। आज भी मानव मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार है।
जब भी मानव का इम्यून सिस्टम कमजोर होगा तो मानव को वायरस /जीवाणु के हमलो का सामना करना पड़ेगा है। मानव और जीवाणु / वायरस की लड़ाई में हमेशा मानव ही हारेगा और जीत वायरस की होगी क्योंकि मानव का इम्यून सिस्टम बहुत ही कमजोर है।वायरस से लड़ने के लिए हम सभी को अपने शरीर का इम्यून सिस्टम को बहुत मजबूत करना पड़ेगा तो ही हम किसी भी प्रकार के वायरस से जीत सकते हैं अन्यथा वायरस से हम सब हार जाएंगे।
शरीर के हारमोंस की प्राथमिकता का आधार :-
आप जानते हैं कि शरीर की वृद्धि मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम पर हार्मोन्स का सीधा प्रभाव पड़ता है द अपोलो क्लिनिक की कंसलटेंट गाइनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर गुंजन कहती है, हम सब के शरीर में 230 प्रकार के हार्मोन्स होते हैं । जो शरीर की अलग-अलग क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं । कोशिका के मेटाबॉलिज्म को बदलने के लिए हार्मोन की छोटी सी मात्रा काफी होता है। एक कोशिका से दूसरे कोशिका तक सिग्नल पहुंचाने में केमिकल मैसेंजर की तरह हार्मोन काम करता है आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि आपका शरीर 230 प्रकार का हार्मोन्स रिलीज करता कैसे हैं । जब आप नफरत ,क्रोध ,ईर्ष्या ,घृणा, लोभ- लालच से ग्रसित होते हैं तो आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होता है , जिसके कारण आपका शरीर सिकुड़ता है । आपको बुरा महसूस (फील )होने लगता है । जिसे आपका शरीर हार्मोन्स को रिलीज करना बंद कर देता है । जब आपका शरीर क्षण भर के लिए अच्छा फील करता है , खुशी या आनंद को प्राप्त करता है तो आपका शरीर क्षण भर के लिए कुछ हार्मोन्स को रिलीज करता है । जिससे आपका भोजन पचता है पर बीमारी से लड़ने के लिए शरीर के सारे हार्मोन्स को एक्टिव होना पड़ेगा, सक्रिय होना पड़ेगा । तभी आप कोरोना जैसे वायरस का सामना कर सकते हैं। नफरत , घृणा और लोभ लालच की उर्जा से ग्रसित मानव का शरीर हमेशा मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर रहा । वहीं अगर आपके अंदर प्रेम की ऊर्जा सक्रिय है तो आपका शरीर सारे हार्मोन्स को रिलीज करता है। जब आप खुशी और आनंद में रहते हैं तो आपका शरीर बाहर की तरफ फैलता है तो शरीर प्रत्येक कोशिका में और प्रत्येक अंगों में दबाव पड़ता है जिसके कारण शरीर हार्मोन्स को रिलीज करता है। यह हार्मोन आपके शरीर के अंदर सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता है । शरीर के अंदर और बाहर किसी भी प्रकार का वायरस या जीवाणु का हमला होता है तो यह आपका सुरक्षा गार्ड उस हमले को रोकता है जिससे आप बीमार होने से बच जाते हैं। शरीर के अंदर वायरस का प्रवेश करना बहुत दूर की बात है , वह आपके शरीर के आसपास भी नहीं प्रवेश कर सकता तो वायरस जनित बीमारी होने का सवाल ही नहीं पैदा होता है । शरीर से निकलने वाली प्रेम की ऊर्जा उस वायरस को आपके शरीर से दूर रखती है।
वायरस को भी ट्रेवल्स करने के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। वह ऊर्जा मानव शरीर से मिले या पशु-पक्षी, पेड़-पौधे से मिले । इस धरती के प्रत्येक जीव/ पदार्थों में वायरस होते हैं । बिना वायरस का ना धरती है, ना कोई पदार्थ। हवा – पानी में भी वायरस होते हैं।आप कुछ भी खाते हैं ,पीते हैं या सांस लेते हैं, उस रास्ते से वायरस शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है ।वह शरीर से बाहर तभी निकलता है ।जब आपके शरीर के अंदर प्रेम की ऊर्जा सक्रिय है और शरीर के सारे हार्मोन्स सक्रिय हैं तो वायरस शरीर के अंदर प्रवेश कर जाने के बाद भी वह वायरस शरीर से बाहर आ जाता है ,क्योंकि वायरस को आपके शरीर के अंदर ट्रैवल करने के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है । वायरस की ऊर्जा और आपकी ऊर्जा दोनों मेल नहीं खाती । इस कारण वायरस को ऊर्जा मिलने के कारण वह वायरस आपके शरीर से संडास के रास्ते या मूत्र के रास्ते से बाहर निकल जाता है ।अगर किसी कारणवश शरीर के अंदर अटका रह गया तो आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। उल्टा उसे शरीर के लिए काम करना पड़ेगा । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वायरस को काम करना पड़ेगा । आपके शरीर की सारी कोशिकाएं ,अंग उस वायरस से काम करवायेगी जैसे जब घर में नौकर का प्रवेश होता हैं तो घर का मालिक और घर के सारे सदस्य उस नौकर से घर काम करवाते है । ठीक इसी प्रकार आपके शरीर की सारी कोशिकाएं और अंग उससे अपना काम करवाएगी।
आज तक मनुष्यों ने बीमारी/वायरस के लक्षणों पर काम किए हैं ,खोज किए हैं पर बीमारी के कारणों पर कोई खोज नहीं किए गए हैं । यही वजह है कि बीमारी या वायरस दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं डॉक्टर हॉस्पिटल, वैध, हकीम बढ़ते जा रहे हैं पर बीमारी वही का वही मानव के सामने पहाड़ बनकर खड़ी है । अभी तक इंसानों पर हमला करने वाले खतरनाक वायरस जैसे मारबर्ग वायरस, इबोला वायरस ,स्मॉल पॉक्स वायरस , इनफ्लुएंजा वायरस ,रोटा वायरस ,एचआईवी वायरस, रेबीज वायरस ,कोरोना वायरस यानी कोविड-19 वायरस है ।आपको पता है यूरोप का काली मौत किसे कहते हैं ? काली मौत यूरोप के इतिहास का एक अध्याय है । जिसमें 7.5 से लेकर 20 करोड़ लोगों की मृत्यु हो गई थी । इसकी शुरुआत सन 1346 से 1353 में हुई। यह एक प्रकार का जीवाणु है । जो प्लेग के अलग-अलग रूप में होने के कारण है । जिसमें यूरोप में कुल आबादी के 30% से ६०% लोगों की मौत हो गई थी । ब्लैक डेथ उस समय की आई हुई सबसे खतरनाक बीमारी थी। जिसका इलाज उस समय नामुमकिन था। आखिर क्यों?
मनुष्य हजारों लाखों वर्षों से वायरस और जीवाणु से लड़ रहा है पर हारता मनुष्य ही है आखिर क्यों मनुष्य वायरस और जीवाणु की लड़ाई में हार जाता है इसका कारण सिर्फ एक है । मनुष्य के अंदर , हृदय में नकारात्मक ऊर्जा , नकारात्मक विचार 24 घंटे सक्रिय रहता है । मैं यह मानता हूं कि कुछ क्षण के लिए नकारात्मक ऊर्जा, सकारात्मक ऊर्जा या प्रेम की ऊर्जा में बदल जाता है । लेकिन कुछ क्षण या मिनट ही मनुष्य के अंदर नकारात्मक ऊर्जा , सकारात्मक ऊर्जा में बदलता है। बाकी समय नकारात्मक उर्जा ही सक्रिय रहता है ।
अब आप हमें बताओ ,आप अपने दिल से पूछो फिर जवाब देना ।
१ :-मानव जितने भी युद्ध किए , लड़ाई लड़ी है उस समय कौन सा ऊर्जा सक्रिय था नकारात्मक ऊर्जा या सकारात्मक ऊर्जा?
२ :-फिल्मों में जो मारकाट ,हत्या ,बलात्कार दिखाया जाता है ।उसमें कौन सी ऊर्जा सक्रिय रहती है , नकारात्मक ऊर्जा या सकारात्मक ऊर्जा?
३ :-धरती और मानव का विनाश करने वाले परमाणु हथियार ,रसायनिक हथियार ,जैविक हथियार क्या बताता है ? इसका निर्माण क्यों हुआ ?क्या इससे पूरी मानव जाति का विनाश होगा या निर्माण होगा?
४ :-ज़हर उगलने वाले राजनेता ,धार्मिक गुरु, मुल्लाह- मौलवी ,पंडित – पुरोहित ,संत , महात्मा कौन सी ऊर्जा से ग्रसित होते हैं। नकारात्मक उर्जा या सकारात्मक ऊर्जा?
५ :-शादी के बाद तलाक हो जाता है । जबकि पैसों की कमी न होने पर भी तलाक हो जाता है । ऐसे बहुत से हीरो -हीरोइन ,उद्योगपति ,राजनेता आपको देखने को मिल जाएंगे । उनकी शादीशुदा जिंदगी में तलाक जैसे वायरस प्रवेश कर जाता है । इन लोगों के जीवन में प्रेम की ऊर्जा अल्प मात्रा में होती है। आखिर क्यों ?इन लोगों के जीवन में कौन सी ऊर्जा सक्रिय है ? नकारात्मक ऊर्जा या सकारात्मक ऊर्जा ? क्यों अमेरिका में 40 से 50% आबादी के जीवन में तलाक जैसा वायरस प्रवेश कर जाता है ? ऐसा क्यों ?
६ :-धर्म , जाति , भाषा , प्रांत और देशो के सरहदो के नाम पर कितने निर्दोष लोग मारे गए हैं । इसका अपना पुरा इतिहास है। अब आप बताओ इसमें कौन सी ऊर्जा सक्रिय है? नकारात्मक ऊर्जा या सकारात्मक ऊर्जा?
७ :-बड़ी-बड़ी कंपनियां या बैंक क्यों दिवालिया हो जाते हैं? इसके पीछे क्या कारण है ? इस कारण को जानने के लिए आपको उसके कर्मचारी ,अधिकारी और मालिकों के जीवन में झांकना पड़ेगा ।तब आपको पता चल जाएगा ।क्यों बड़ी-बड़ी कंपनियां या बैंक दिवालिया हो जाते हैं ? उन में कौन सी ऊर्जा सक्रिय है ?लोभ- लालच , घृणा , नफरत या नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय है या सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हैं ?
जब हम सब के शरीर में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होता है तो नए-नए समस्याओं का सामना हम सब को करना पड़ता है । यही कारण है वायरस या जीवाणु के सामने हम सबका शरीर घुटने टेक देता है । हार मान लेता है । ऐसा क्यों ?
अगर आप चाहते हैं कि कोई भी वायरस आपका कुछ ना बिगारे तो इसके लिए आपको अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा या प्रेम की ऊर्जा का दीपक जलाना होगा । अभी तक हम सब नफरत , घृणा की ऊर्जा या लोभ लालच की ऊर्जा के साथ ट्रेवल ( यात्रा) की जिसके वजह से मानव के जीवन में धर्म ,जाति ,भाषा, प्रांत और देशों की सरहद की दीवार खड़ी हो गई । हिंदू , मुस्लिम, सिख ,ईसाई या कोई और धर्म के ऐसा कोई व्यक्ति है जो अपने ख़ुदा – अल्लाह ,राम ,रहीम, नानक ,जीसस ,बुद्ध ,महावीर और कृष्ण से प्यार करने वाले या प्रेम करने वाला या खुद से प्रेम करने वाला है। ऐसे बहुत लोग मिल जाएंगे , जो कहेंगे मैं प्रेम करता हूं, अपने खुदा से, पर वह सभी झूठ बोलते हैं । न कोई अपने भगवान या खुदा से प्रेम करता है और न कोई खुद से प्रेम करता है ।अगर सभी धर्म के मानने वाले लोग अपने-अपने भगवान से प्रेम करते या खुद से प्रेम करते हैं तो धरती पर इतना विनाशकारी हथियार जैसे परमाणु हथियार, जैविक हथियार, रसायनिक हथियारों का निर्माण नहीं होता ।दवा और खाद्य वस्तुओं में मिलावट का कारोबार नहीं होता । नकली वस्तुओं का कारोबार नहीं होता । हत्या ,भ्रूण हत्या ,बलात्कार , घर-घर में मार-पीट , दहेज ,बड़ी बड़ी कंपनी /बैंक दिवालिया नहीं होते । धर्म ,जाति ,भाषा , प्रांत और देशो की सरहद की दीवारें नहीं होती । कोई भी देश अपने लेबोरेटरी में कोरोना वायरस या जैविक हथियार का टेस्टिंग नहीं करता। हम कांटा बोएंगे तो कांटा ही पैदा होगा । इंसान और कोरोना वायरस की इस लड़ाई में क्यों इंसान हारता जा रहा है ? क्या आपको नहीं लगता कि हम सब नफरत , घृणा ,लोभ -लालच या नकारात्मक ऊर्जा के साथ ट्रेवल कर रहे हैं।
आप जानते हैं कि जब प्रेम की उर्जा ट्रैवल करती है, यात्रा करती है तो मानव के जीवन में आने वाली सारी समस्या को खत्म कर देती है । वह समस्या चाहे किसी भी प्रकार का क्यों न हो । प्रेम की उर्जा के सामने मानव की सारी समस्याएं घुटने टेक देती है । वो सारी समस्याएं प्रेम की ऊर्जा के सामने हार मान जाती है। वहीं अगर नफरत ,घृणा ,ईर्ष्या , लोभ-लालच की ऊर्जा जब ट्रेवल करती है ,यात्रा करती है तो मानव के जीवन में नित्य नए-नए समस्याएं लेकर आती रहती है ।आप अपने दिल से पूछो क्या मानव के जीवन में दिन-प्रतिदिन समस्याएं बढ़ती नहीं जा रही है?
कोरोना वायरस आज जिस रफ्तार से पूरी दुनिया में फैल रही है ।वायरस की ग्राफ को रोक पाना डॉक्टर और वैज्ञानिकों के वश के बाहर हो गया है। वायरस से कोई भी व्यक्ति लड़कर कभी जीत नहीं सकता ।वह चाहे अमीर हो या गरीब ।आज कोरोना का खौफ प्रत्येक व्यक्ति के अंदर इतनी गहरी मानसिक तल पर बैठ गया है कि यह कभी भी किसी भी समय कोरोना का शिकार हो सकते हैं। इसे कोई विधाता भी नहीं बचा सकता । कोरोना वायरस उसी व्यक्ति का शिकार करता है । जो पहले से डरा हो । जो अपने दिल में डर भय की पूजा करता हो । जिस व्यक्ति को 24 घंटे डर सताता हो।
आंखों से दिखने वाले शत्रु को आंखों से दिखने वाले हथियार से मारा जाता है पर आंखों से न दिखने वाले शत्रु को (जैसे वायरस ) आंखों से ना दिखने वाले हथियारों से मारा जाता है । डॉक्टर का दवा गोली इंजेक्शन ये आंखों से दिखने वाला हथियार है इस हथियार से हम कोरोना वायरस का शिकार नहीं कर सकते । हवा में घूमने वाले शत्रु वायरस को हवा में घूमने वाले हथियार जैसे प्रेम की उर्जा से मारा जा सकता है। कोरोना वायरस जिस रफ्तार से पूरी दुनिया में फैल रही है ।कोरोना के ग्राफ को रोकने के लिए आपके पास बहुत मजबूत हथियार है । जिसके प्रयोग से कोरोना आपके आसपास भी नहीं फटेगा । इसके लिए आप अपने अंदर ,हृदय में प्रेम की दीपक जलाना होगा । प्रेम के दीपक जलते ही डर ,भय ,क्रोध ,घृणा ,लोभ-लालच कहां गायब हो जाएगा । उसे आप खोजने पर भी नहीं मिलेगा ।आपके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है । जब डॉक्टर और नर्से कोरोना का शिकार हो रहे हैं तो आम आदमी की क्या औकात जो कोरोनावायरस से लड़कर जीत सकें ।आज जो कोरोना से लड़कर जीत कर बाहर आ रहे हैं । वह उनकी प्रेम की ऊर्जा की वजह से वायरस के ऊपर जीत हासिल कर रहे हैं । आप कितना भी दवा दारू – पीले इंजेक्शन ले लो, डॉक्टर हकीम के निगरानी में रहे ,फिर भी आप कोरोना वायरस के खौफ से नहीं बच सकते जब तक आपका इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होगा । इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए आप चाहे कुछ भी खाए , हाथी ,घोड़ा खाए या काजू – पिस्ता खाए फिर भी आपका इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होगा। जब आपके अंदर सकारात्मक विचार , सकारात्मक ऊर्जा या प्रेम की ऊर्जा सक्रिय होती तभी आपका इम्यून सिस्टम बहुत मजबूत होता है । नकारात्मक ऊर्जा या घृणा, नफरत ,लोभ – लालच की चक्की हमेशा आपके दिमाग में चलते रहेंगे, आप उल्टा- सीधा सोचते रहेंगे, एक दूसरे के प्रति जहर उगलते रहेंगे तो कभी भी आपका इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होगा। आखिर क्यों विश्व का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में सबसे ज्यादा कोरोना वायरस का खौफ का प्रभाव है जबकि वहां धन दौलत की कमी नहीं है। यूरोपीय देशों में भी कोरोना वायरस बहुत तेज गति के साथ फैल रहा है। इसका कारण आप वहां के नागरिकों के जीवन को देखें। वहां के नागरिकों के जीवन जीने की शैली को देखें तो आपको पता चल जाएगा क्यों अमेरिका में कोरोना वायरस की महामारी बहुत तेज गति से फैल रही है। आज अमेरिका में लगभग 40% आबादी के जीवन में तलाक जैसे शैतान प्रवेश कर गया है । लगभग अमेरिकी नागरिक के पास आर्म्स हथियार मिलेंगे । जिसके जीवन में प्रेम होता है , जो प्रेम की उर्जा से सराबोर होता है उसके जीवन में तलाक जैसे शैतान कभी प्रवेश नहीं करता और ना ही उसे हथियारों की ज़रूरत पड़ती है जहां डर भय , घृणा ,नफरत हो ,लोभ- लालच हो या नकारात्मक उर्जा से ग्रसित हो उसके जीवन में तलाक जैसे शैतान प्रवेश करता है और उसे ही हथियारों की ज़रूरत पड़ती है। कोरोना वायरस ऐसे ही जगह पर खूब फलता फूलता है । वो देश कोई भी हो सकता है।
जिस देश के नागरिक नफरत ,घृणा ,लोभ- लालच की उर्जा से ग्रसित होते हैं उसे ही कोरोना वायरस या कोई भी वायरस अपना शिकार बनाता है प्रकृति के नियम को समझें , उसके आकर्षण को नियम को समझें , ऊर्जा के नियम को समझें तो कोरोना वायरस किसका शिकार करेगी , आपको पता चल जाएगा । जो जैसा सोचता है, वह वही चीज करता है, उसे वही चीज मिलता है ।अगर आप नकारात्मक सोचेंगे तो नकारात्मक कार्य करेंगे और आपको नकारात्मक फल मिलेगा । वहीं अगर हम सकारात्मक सोचेंगे , सकारात्मक कार्य करेंगे तो हमें सकारात्मक फल मिलेगा।
कोरोना वायरस मनुष्यों के लिए नेगेटिव एनर्जी को लेकर ट्रेवल कर रहा है बाकी जीव-जन्तु के लिए कोरोना वायरस पॉजिटिव एनर्जी का काम कर रहा है। हम सब के आसपास जो स्वतंत्र रूप से जीवन बिताने वाले जीवो को कोरोना वायरस कुछ बिगड़ती नहीं है पर मनुष्य के लिए कोरोना वायरस काल देवता/मृत्यु देवता बना हुआ है । जिस व्यक्ति के अंदर कोरोना वायरस प्रवेश कर जाता है तो उसे बहुत बुरा फील होता है । हमें बुरा फील कब होता है ? जब हम किसी व्यक्ति को अपशब्द बोल दे या किसी को गाली बकते हैं तो हमें बुरा फील होता है इसका मतलब क्या हुआ अल – बल बकने वाला , गाली- गलौज करने वाला, मार – पीट करने वाला, जहर उगलने वाला यह सभी किसी न किसी रूप से नेगेटिव ऊर्जा से ग्रसित हैं कोरोनावायरस भी नेगेटिव ऊर्जा के साथ ट्रेवल कर रहा है। अल बल बकने वाला / जहर उगलने वाला व्यक्ति या कोरोना वायरस दोनों नेगेटिव एनर्जी से ग्रसित हैं । दोनों एक दूसरे को आकर्षित करता है । यह प्राकृतिक नियम है । जिसे जो चाहिए उसे वह मिल जाता है।
आप जानते हैं कि चूहा, बिल्ली को देखकर बिल में छुप जाता है पर आज इंसान कोरोनावायरस को देखकर बिल में छुपा हुआ है ।मुझे यह समझ में आता है कि चूहा बिल्ली से छोटा है । अपनी जीवन बचाने के लिए चूहा बिल में छुप जाता है पर मुझे यह समझ में नहीं आता कि इंसान कोरोना वायरस से लाखों गुना बड़ा है फिर भी कोरोना वायरस को देखकर इंसान आज बिल में छुपा हुआ है ।आखिर क्यों ? जबकि हम सब कोरोना वायरस को अपनी आंखों से देख नहीं सकते हैं फिर भी हम सब कोरोना वायरस के खौफ से इतना डर गए हैं । क्यों ? हम सब क्वारंटीन में रहे या आइसोलेशन में रहे। इससे कोरोना वायरस पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है । वहअपने ही रफ्तार से बढ़ रहा है ।जो लोग कोरोना वायरस से मुक्त होकर घर आ रहे हैं।क्या पता कोरोना वायरस उसे फिर से शिकार बना ले । सर्दी खांसी भी वायरस बीमारी है इस बीमारी के लग जाने के बाद हम दवा खाते हैं, दवा खाने के बाद हमारा शरीर सर्दी खांसी से मुक्त हो जाता है लेकिन फिर भी सर्दी खांसी वापस आ जाता है । क्यों ? क्योंकि सर्दी खांसी का वायरस हमारे शरीर में सुसुप्त अवस्था में पड़ा रहता है । ठीक इसी प्रकार कोरोना वायरस हमारे शरीर के अंदर सुसुप्त अवस्था में रहता है ।जब भी उसके शरीर के अंदर नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होगा तभी वो शरीर के अंदर कोरोना वायरस जागृत होने की पूरी संभावना रहती है।जो लोग कोरोना से ठीक हो कर घर आ रहे हैं, भूल कर भी ऐसा ना सोचिएगा कि कोरोना से मुक्त हो गए। कभी भी कोरोना वायरस वापस आ सकता है ।कोरोना वापस न आए, इसके लिए आप अपने अंदर प्रेम की उर्जा का दीपक जलाए रखें ।इतना ध्यान रखें कि देश की रक्षा सैनिक करते हैं, कंपनी की रक्षा सिक्योरिटी करता है तो शरीर की रक्षा हारमोंस करता है हार्मोन शरीर में सक्रिय रहे इसके लिए आपको अपने अंदर प्रेम की ऊर्जा की जरूरत पड़ेगी।
अगर आप चाहते हैं कि कोरोना वायरस आपके शरीर या आपके घर परिवार का कुछ भी ना बिगारे और आपके घर से दूर रहे तो इसके लिए आपको बिना पैसा खर्च किए कोरोना वायरस को अपने घर से दूर भगा सकते हैं । वह आपका प्रेम की ऊर्जा या प्रेम के हथियार से कोरोना वायरस को वहां भगा सकते हैं ,जहां से वो आया है ।दवा या वैक्सीन से नहीं । कुछ देर के लिए दवा या वैक्सीन आपको कोरोना वायरस से मुक्त कर देगा पर हमेशा के लिए नहीं ।आपको अपने अंदर हृदय में प्रेम रूपी दीपक को जलाना होगा ।आपके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है जिससे आप कोरोना से लड़कर जीत सको । कोरोना से जीतने के लिए आपको प्रेम रूपी हथियार का प्रयोग करना पड़ेगा । आपके साथ किसने क्या ? वह सब आप भुला दे , क्षमा कर दे । ताकि आपके जीवन में खुशी और आनंद का बहार आ जाये । इसके लिए सबसे पहले आपको खुद से प्रेम करना होगा ।चाहे शरीर जैसा हो, बीमार हो ,अपाहिज हो। पहले खुद से प्रेम करें। दूसरा अपने घर के सारे सदस्यों से प्रेम करें ,चाहे बीमार माता-पिता हो ,बीमार पति हो ,बिमार पत्नी हो या बच्चे हो। सब से प्रेम करें । तीसरा आपके घर के अंदर रखे प्रत्येक सामान (जैसे लोहा लक्कड़ ,बर्तन हांडी ,कपड़ा -लता ,ईंट – पत्थर या खाने पीने की वस्तुएं )से प्रेम करें । मेरा कहने का मतलब कि घर के अंदर रखा कोई भी वस्तु निर्जीव हो या सजीव हो ,आपके आंखों से जो भी दिखाई दे वह चाहे आपका घर का दीवाल ही क्यों न हो, उससे भी प्रेम करें । जिसे आप महसूस कर सकते हैं वह हवा या पानी ही क्यों ना हो प्रत्येक वस्तु या पदार्थ से आप प्रेम करें, क्योंकि परमात्मा के नजर में दिखने वाली , महसूस करने वाली हर वस्तु /पदार्थ जीवित होता है । इंसान के नजर में लोहा लक्कड़ ईंट- पत्थर यह सभी मृत वस्तुए हैं। जो भी वस्तु पदार्थ का अस्तित्व धरती या ब्रह्मांड में है। वह सभी जीवित पदार्थ है सभी पदार्थों में इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन चक्कर लगाता रहता है ।चौथा आपके आसपास रहने वाले पड़ोसियों से प्रेम करें। चाहे आपका पड़ोसी आपके अपने जात धर्म का हो या किसी और जात धर्म का हो , सब से प्रेम करें । पांचवा जो आपको जानने वाला हो या जिसे आप जानते हो , उससे प्रेम करें । इतना ही काम आपको करना है । बाकी सारा काम आपके अंदर जल रही प्रेम की ऊर्जा का दीपक करेगा । पहले प्रेम रूपी ऊर्जा को ट्रैवल (यात्रा) करने तो दीजिए ।आपने कभी सोचा नहीं होगा ,ऐसी दुनिया का निर्माण होगा ।मैंने यह कहीं नहीं कहा कि आप प्रेम में अपनी धन दौलत लुटा दे ।आपको अपने धन दौलत किसी को नहीं देना है ।अगर आपके पास धन ज्यादा है तो अपनी इच्छा अनुसार धन का दान कर सकते हैं पर धन का दान करने से आपको परेशानी होती है तो आप धन का दान न करें । सिर्फ सबसे प्रेम करें।
अगर आपके घर परिवार का कोई सदस्य बीमार है। वह भी स्वस्थ हो जाएगा ।इसकी चिंता फिक्र ना करें ।अगर आपका शरीर पहले से बीमार है वह चाहे कोई भी बीमारी क्यों ना हो । जब आप सभी से प्रेम करने लगते हैं तो पुरानी बीमारी का ग्राफ वाही रुक जाएगा ,आगे नहीं बढ़ेगा और न ही कोई नई बीमारी आपके शरीर के अंदर प्रवेश करेगा । जब आप पूर्ण रूप से प्रेम की समुंदर में डूब कर सराबोर जाएंगे तो पुरानी बीमारी भी आपके शरीर का साथ छोड़ देगा ।आप प्रेम की उर्जा को कभी भी हल्का में न ले । धरती हो या ब्रह्मांड सभी जगह ऊर्जा है ।ऐसा कोई जगह खाली नहीं ,जहां ऊर्जा का अस्तित्व ना हो। जहां विनाश होता है वहां नेगेटिव ऊर्जा का सहयोग होता है और जहां निर्माण होता है वहां पॉजिटिव ऊर्जा या प्रेम की उर्जा का सहयोग होता है ।
आज आपके सामने जो भी समस्या दिखता है ।वह समस्या कहां गायब हो जाएगा कि किसी के खोजने पर भी वो समस्या नहीं मिलेगा । चाहे वह समस्या कुछ भी क्यों न हो जैसे कोरोना वायरस की समस्या/बेरोजगारी की समस्या/जनसंख्या वृद्धि की समस्या/खाद्य वस्तुओं की समस्या/दवा और खाद्य वस्तुओं में मिलावट की समस्या/नकली वस्तुओं की समस्या/प्रदूषण की समस्या/धर्म जाति भाषा प्रांत और देशों की सरहदों की समस्या/विनाशकारी परमाणु हथियार, जैविक हथियार, रसायनिक हथियारों की समस्या/गरीबी और भुखमरी की समस्या/स्वास्थ्य संबंधित समस्या/पर्यावरण समस्या/हत्या ,लूट ,नफरत घृणा , दहेज ,लोभ – लालच , भ्रूण हत्या, बलात्कार की समस्या/भूत प्रेतों की समस्या इत्यादि।मेरा कहने का मतलब कि मनुष्य के जीवन में आने वाली कोई भी समस्या क्यों ना हो वह सभी समस्याएं खत्म हो जाएगा ना कोई भूखा मरेगा और ना कोई भूखा सोएगा । मानव के जीवन खुशहाल और आनंदमय हो जाएगा ।
अगर आपको पहले से कोई बीमारी है तो आप डॉक्टर की मदद ले ,योगा ,प्रणायाम की मदद ले ।प्रेम की शक्ति को जितना हो सके उतना अपने और अपने आसपास के लोगों में बढ़ाएं । डॉक्टर ,योगा और प्रेम की शक्ति इन तीनों में प्रेम की शक्ति सबसे शक्तिशाली है ।अगर आप सिर्फ डॉक्टर और योगा का सहारा लेते हैं तो आप पूर्ण रूप से अपनी बीमारी से लड़कर जीत नहीं सकते ।जब तक आपके अंदर प्रेम की ऊर्जा सक्रिय ना हो या आपका विचार सकारात्मक ना हो। जब शरीर में तकलीफ ज्यादा बढ़ जाता है तोआप प्रेम की उर्जा के साथ बहुत देर तक खड़ा नहीं रह सकते हैं क्योंकि शरीर में तकलीफ होने से आपको न खाना अच्छा लगेगा न आपको रिश्ते – नाते का व्यवहार अच्छा लगेगा इसलिए आप प्रेम की शक्ति ,डॉक्टर की मदद और योगा प्रणयाम की मदद ले ।
आपके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है । जो आप अपनी समस्या से लड़कर जीत सको ।आज कोरोना वायरस का खौफ इतना बढ़ गया है कि इंसान अपने आप को बिलों में छुपा कर रखा हुआ है । आज मंदिर ,मस्जिद गिरजा, गुरुद्वारा सब बंद है ।इस धरती के सारे देवी- देवता ,अल्लाह -खुदा ,परमात्मा ,ईश्वर , नानक ,बुद्ध राम ,कृष्ण ,महावीर सभी का सभी कोरोना वायरस के खौफ से वह भी अपने बनाए हुए बिल में छुप गए हैं। आज मानव अकेला हो गया। पूरी मानव जाति का अगर कोई मदद कर सकता है तो वह खुद मदद कर सकता है। मानव के पास एक ही रास्ता है एक ही रास्ता बचा है वह है उसकी प्रेम की शक्ति। प्रेम की शक्ति से ,प्रेम की हथियार से कोरोना जैसे वायरस को ही नहीं इस धरती के सारे वायरस को हम मार सकते हैं ।प्रेम की शक्ति को आप कभी कमजोर न मानना । पूरी दुनिया , पूरा ब्रह्मांड काम करता है प्रेम की शक्ति से । प्रेम की शक्ति से निर्माण होता है। नफरत और घृणा की शक्ति से विनाश होता है।
कोरोना से भी खतरनाक वायरस जहर उगलने वाले मुल्लाह – मौलवी , पंडित – पुरोहित ,फादर धर्मगुरु, राजनेता हैं । इनसे दूर रहें ।ये धरती के सबसे खतरनाक वायरस है जो हर समय जहर उगलते रहते हैं इनसे आप दूर रहें , तब तक , जब तक इनके अंदर प्रेम की ऊर्जा हिलोरे नहीं मारने लगती है ।प्रेम की ऊर्जा के समुंदर में जब तक ये लोग पूर्ण रूप से डूब नहीं जाते हैं तब तक आप इनसे दूर रहें ।आप जानते हैं की जहर खाने से शरीर को हानि है ,जहर सुनने से शरीर को हानि है और जहर बकने से भी शरीर को हानि है । इसलिए न जहर खाए , न जहर सुने और न ही जहर बके । जहर खाने से शरीर के हार्मोन में बदलाव आता है ,जहर सुनने से भी शरीर के हार्मोन में बदलाव आता है और जहर बकने से भी शरीर के हार्मोन में बदलाव आता है। प्राकृतिक या सृष्टिकर्ता भी यही चाहती है कि पूरी दुनिया एक हो प्राकृतिक को यही पसंद भी है इसलिए प्राकृतिक ने कोरोनावायरस जैसी बीमारी मानव के जीवन में डाल दिया ताकि मानव एक हो सके ।यही वजह है कि धरती पर कोरोना वायरस का खौफ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। प्राकृतिक के विरुद्ध चलेंगे सबका सब यही पड़ा रह जाएगा ।अमेरिका, भारत ,चीन हो या कोई देश या धर्म, जाति , मजहब सब यही पड़ा रह जाएगा । विरान हो जाएगी हमारी धरती । जब हम सब इतने छोटे कोरोनावायरस से लड़ नहीं सकते , जो आंखों से दिखता नहीं तो कोरोना वायरस का बाप एस्ट्रॉयड या उल्कापिंड से कैसे लड़ेंगे । अभी भी समय है अपने विचारों को बदलें ।नई दुनिया का निर्माण करें ।मित्रता पूर्ण विचार को अपने जीवन में स्थान दें । नहीं तो जैसे प्राकृतिक ने डायनासोर प्राणी को सदा के लिए धरती से गायब कर दिया , कहीं ऐसा ना हो की सृष्टिकर्ता मानव जाति को भी हमेशा – हमेशा के लिए धरती से गायब कर दे।
Note:-मैं उस प्रेम को नहीं कह रहा हूं ।जो एक कपल्स आपस में प्रेम करते हैं या प्रेम करते नजर आ जाते हैं ।वह कभी भी प्रेम नहीं करते ।वह उनके शरीर का मैग्नेटिक फील्ड की वजह से दोनों एक दूसरे के नजदीक आते हैं। एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। आपने कभी न कभी यह कहावत सुनी होगी कि “मैं तुम्हारे बिना जिंदा नहीं रह सकता / सकती हूं”। इस कहावत का क्या मतलब होता है ?आपने कभी सोचा या इसे जानने का प्रयास किया , प्रेम जिंदगी देता है, जिंदगी लेता नहीं । प्रेम से जीवन को बल मिलता है , तो प्रेम में मरने वाली बात कहां से आ गई ।जैसे सिक्के के दो पहलू होता है ।ठीक इसी प्रकार नेगेटिव ऊर्जा का भी दो पहलू होता है । सिक्के का एक पहलू लोगों को सीधा मार देता है तो सिक्का का दूसरा पहलू लोगों को ललचा कर मारता है आकर्षित करके मारता है यानी नेगेटिव ऊर्जा के आकर्षण नियम के अनुसार दोनों कपल्स आपस में प्रेम करते हैं पर यह उनके लिए जहर है । जहां प्रेम होता है वहां जीवन होता है प्रेम का दूसरा नाम भी है ,उसके अपने सगे संबंधी भी हैं जैसे करुणा ,सेवा दया ,मदद ,दान और छोटे बड़ो का सम्मान इत्यादि।
प्रेमी जोड़ा कहां छोटे बड़ों का सम्मान करते हैं जहां एकांत दिखी वही प्रेम करने बैठ गये । न उनमें दया धर्म होती है ना सेवा दया की भावना होती और न अपना मान सम्मान होता है आपने देखा होगा ,समाचार पत्र में पढ़ा होगा कि अगर लड़की लड़के से मिलना बंद कर दे चाहे कारण कुछ भी हो लेकिन लड़का क्या करता है जिस लड़की से लड़का प्यार करता था उसी लड़की के ऊपर, चेहरे पर तेजाब या एसिड फेंक देता है ।आखिर क्यों ?जहां प्रेम होता है वहां यह सब होता नहीं है।
अगर प्रेमी जोड़ा किसी कारण वश घर परिवार या समाज से भागकर मंदिर मस्जिद या कोर्ट कचहरी में शादी कर लेते हैं , पर कुछ समय गुजर जाने के बाद उनका क्या हाल होता है यह आपको भी पता है उनका सारा प्रेम , मोहब्बत सब खत्म हो जाता है । एक दूसरे के प्रति जो आकर्षण पहले था । वह सब आकर्षण खत्म हो जाता है ।एक दूसरे के प्रति उनका व्यवहार ऐसा हो जाता है मानो कई जन्मों से एक दूसरे का दुश्मन हो। यहां तक कि वह आपस में मारामारी करने लगते हैं । उन दोनों के बीच तलाक जैसी स्थिति पैदा हो जाती है । क्या आप उसे प्रेम कहते हैं ? आप ऐसे अनेकों हीरो – हीरोइन उद्योगपतियों और राजनेताओं को देखे होंगे , समाचार पत्रों में सुने होंगे , उनके पास पैसों की कमी नहीं, फिर भी उनके जीवन में तलाक जैसा शैतान प्रवेश कर जाता है ।आखिर क्यों ? आखिर क्यों ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है ? उनका प्रेम कहां गया ? इसका मुख्य कारण उनके जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का सक्रिय हो जाना । आप जानते हैं कि जहां प्रेम होता है वहां मारामारी हत्या बलात्कार या नफरत घृणा नहीं होता ।जो व्यक्ति नफरत घृणा लोभ – लालच की वजह से ग्रसित होता है वही मारा -मारी या तलाक जैसी स्थिति पैदा होती है। गंदगी और सफाई दोनों एक साथ नहीं रह सकता ,रात और दिन दोनों एक साथ नहीं रह सकता, नेगेटिव और पॉजिटिव ऊर्जा दोनों एक साथ किसी व्यक्ति के अंदर सक्रिय नहीं हो सकता है । आप कभी भी यह न सोचिएगा कि प्रेमी जोड़ा आपस में प्रेम करते हैं। नेगेटिव ऊर्जा की वजह से उनके शरीर के मैग्नेटिक फील्ड के वजह से दोनों एक-दूसरे के नजदीक जरूर आ जाते हैं, पर पूरी जिंदगी एक साथ निभा नहीं पाते ।आखिर क्यों? इस सवाल का जवाब आप खुद खोजें।
Note:- ऊपर लिखे गए ( Independence Of Mother Earth ) ” धरती मां की आजादी ” की किताब का एक अंश है यह किताब अभी तक पब्लिश नहीं हुई है। अगर आपको यह लेख /Article अच्छा लगे तो इसे लाइक करें , कॉमेंट्स करें । जितना हो सके इसे अपने दोस्तों को या सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि लोगों में जागृति पैदा हो सके , लोगों का अंदर प्रेम की भावना बढ़ सके , सारी दुनिया एक हो सके, सारे देशों की सरहद खत्म हो सके । लोगों की आपसी लड़ाई – झगड़ा खत्म हो सके ।
यह कहानी राजस्थान की है जैसलमेर से करीब 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित कुलधार नाम का एक छोटा सा गांव हैं सन 1291 के आसपास रहीस और मेहनती पालीवाल ब्राह्मणों से 6०० गांव में बसे हुए थे । माना जाता है कि कुलधार के आस पास 84 गांव थे और इन सभी में पालीवाल ब्राह्मण ही रहा करते थे यह लोग मेहनती ही नहीं बलिक बैज्ञानिक तौर पर सशक्त भी थे क्योंकि कुलधरा अवशेषों से स्पष्ट होता है कि कुलधार के मकानों को वैज्ञानिक आधार से बनाया गया था ।
इसी गांव में एक दीवान सालिम सिंह भी रहा करता था जिसकी बुरी नजर पालीवाल ब्राह्मणों पर पड़ी । उसे ब्राह्मण की लड़की पसंद आ गई । वह हरसंभव उसे पाने की कोशिश करने लगा जब उसकी सारी कोशिश नाकाम होने लगी तब सालिम सिंह ने गांव वालों को धमकी दी की या पूर्णमासी तक वे उस लड़की को सौंप दे या फिर वह स्वयं उठाकर ले जाएगा गांव वालों के सामने एक लड़की के सम्मान को बचाने की चुनौती थी वह चाहते तो लड़की की आहुति देकर कर अपना घर बचा सकते थे लेकिन उन्होंने दूसरा रास्ता अपनाया । एक रात 84 गांव के सभी ब्राह्मणों ने बैठकर एक निर्णय लिया कि वे रातों-रात इस गांव को खाली कर देंगे लेकिन उस लड़की को कुछ नहीं होने देंगे बस क्या था एक ही रात में कुलधरा समेत आसपास के सभी गांव खाली हो गए । जाते-जाते लोग इस गांव को श्राप दे गए कि इस स्थान पर कोई भी नहीं बस पाएगा जो भी यहां आएगा वह बर्बाद हो जाएगा ।
कुलधरा गांव को कुलधारा ब्राह्मणों ने बसाया था लेकिन यहां का एक राजा इतना क्रूर था कि वह अपनी जनता को जीने की आजादी तक नहीं देता और मनमाफिक तरीके से उसका शोषण करता था वह उन्हें मारता पीटता और अपने गुलामों की तरह रखा करता था । कुलधरा गांव पूरी तरह उजड गया है सिर्फ एक लड़की की इज्जत बचाने के लिए पूरे गांव वालों ने मिलकर उस लड़की की इज्जत बचाने के लिए गांव छोड़ कर कहीं और चले गए आज भी उस जगह पर उनकी आत्मा भटकती नजर आती है उजड गई कुलधरा के गांव । वहां कुछ भी नहीं बचा , बस था तो विरान और बंजर भूमि । जब भी नकारात्मक ऊर्जा अधिक से अत्यधिक बढ़ जाता है तो हमें भूत प्रेत के रूप में नजर आने लगता ।
क्या आपके गांव में भी बेटियां हैं ? क्या आप दूसरों की वहु / बेटी की रक्षा के लिए गांव छोड़कर जा सकते हैं ? क्या आप दूसरों की वहु – बेटी को अपनी बेटी समझते हैं ? Yes/No
युद्ध का इतिहास उतना ही पुराना है जितना की मानव जाति की कहानी है । जमींदारो की आपसी लडाई हो या राजा महाराजाओ की आपसी लडाई हो , फिर मारे जाते है सैनिक ।अनेक सभ्यताओ का अभ्युदय एंव विनाश हुआ परन्तु सैनिको के साथ युध्द कभी समाप्त नहीं हुआ । जैसे -जैसे सभ्यताओ का विकाश हुआ वैसे – वैसे नवीन हथियारो का अविष्कार हुआ और युद्ध का स्वरूप में भी परिवर्तन आया । पहले के युद्ध में सिर्फ सैनिक ही एक दुसरे सैनिक को मारा करते थे पर आज के युद्ध में सैनिक और आवाम दोनों मारे जाते है । पहले राजा अपनी गद्दी के लिए या अपने सम्राराज्य के विस्तार के लिए सैनिको का कत्ल करवाया । अब राजनेता अपनी कुर्सी के लिए सैनिको का कत्ल करवा रहे है । जैसे सैनिक इंसान नहीं पशु है । पशु और जानवरो को जिस प्रकार आज काटा जाता है वे पशु न तो अपने बारे में और न अपने तकलीफ के बारे में किसी को कुछ बोल नहीं पाते और न उनमें विरोध करने की इतनी ताकत होती है । पशुए इतनी असहाय , कमजोर और निर्बल है । ठिक इसी प्रकार सारे सैनिको की हालत है । जब भी जो कोई चाहा सैनिको को उतार दिया लडाई के मैंदान में मरने -मारने के लिए । मरता है सैनिक , रोता विलखता उसका परिवार है पर देश में विजय जुलूस निकाले जाते है । एक तरफ मातम तो एक तरफ खुशीयां इसी को हम देश कहते है। कुर्सी और गद्दी के लिए मरवा दिया जाता है सैनिको ।सबसे बडी बात की सैनिको को कोई और नहीं मारता बल्कि सैनिक ही सैनिक को मारता है । ये भी अजीब दुनिया की रीत है । देश के नाम पर सैनिको को बली चढा देना ,कूर्बान कर देना । यह कैसा विधान है ?
आपको मालुम है कि प्रथम विश्वयुद्ध में भाग लेने वाले दोनो पक्षो के 6.5 करोड सैनिको में से एक करोड 30 लाख सैनिक मारे गए और 2 करोड 20 लाख सैनिक घायल हुए , घयलो में 70 लाख सैनिक बिलकुल पंगु हो गए । इसी प्रकार दुसरा विश्वयुद्ध में दोनों पक्षो के लगभग 10 करोड सैनिक भाग लिया । इस युद्ध में रूस ने अपना 2.1 करोड सैनिक गवाएं । चंगेज खान ने अपने क्षेरफल विस्तार के लिए उसने अपने समय की 11फीसदी आवादी का सफाया कर दिया , जो तकरीबन 4 करोड आवादी होती है । कारगील युद्ध , भारत -पाक युद्ध 1971 , भारत -चीन युद्ध , कोरिया युद्ध , वियतनाम युद्ध , इरान – इराक युद्धों लाखो सैनिक मारे गये । न जाने कितने युद्ध हुए ,कितने सैनिक और आवाम मारे गये ।
अगर तृतिय विश्वयुद्ध हुआ तो कुछ भी नहीं बचेगा , न जलीय जीव , स्थलीय जीव , और न ही आकाशीय जीव बचेगा ।एक रिपोर्ट (i.i.s.s 2014 ) के अनुसार आज पुरे विश्व में reserve force और regular reserve paramilitray सैनिको की संख्या लगभग 11,03,15,865 है । UN के 191 देशों में से 171 दशों का रिकार्ड है ।
1:- युद्ध को रोकने का उपाय ।
अगर आप नहीं चाहते है कि कोई युद्ध हो , एक भी सैनिक मरे नहीं तो एक ही रास्ता है कि आपके आस पास में कोई सैनिक है , आपके रिस्तेदार में सैनिक है , आपके बेटा -बेटी सैनिक है ,या पढोसी में कोई सैनिक है । उन्हें आप समझाए हथियार न उठाये । अगर हथियार उठाना ही है तो आतंकवाद के विरूद्ध उठाये या धरती पर अमन और शान्ति बनाये रखने के लिए हथियार उठाये । बाकी किसी भी युद्ध के लिए हथियार न उठाये । किसी भी देश के राष्ट्रअध्यक्ष सैनिको को हथियार उठाने को प्रेरित करता है या दबाव डालता है तो सैनिक हथियार तभी उठाये जब उसका राष्ट्रअध्यक्ष हथियार लेकर सबसे आगे खडा हो । पहले मरेगा राष्ट्रअध्यक्ष बाद में सैनिक । जब भी राष्ट्रअध्यक्ष की मरने बारी आएगी तभी ये सभी राष्ट्रअध्यक्ष नये रास्ते की तलाश करेंगे अन्यथा नहीं ।
सैनिको को भी जिने का अधिकार हो । उनके अंदर भी दिल है, ह्वृदय है । उन्हें भी चोट लगती है तो दर्द होता है उनका भी अपना एक परिवार है वो भी एक इंसान है कोई मशिन नहीं और न ही वे पशु है ।
अगर आपको सैनिको से प्रेम है उनके बाल-बच्चों से प्रेम है और आप खुद से प्रेम करते है , आपने बच्चों से प्रेम करते है , और बच्चो को सुरक्षित जीवन देना चाहते है तो आप इस मेसेज को अपने तक न रख कर अपने यार दोस्तों में शेयर करे । अब समय नहीं रहा सोने का । सो आप अपनी आंखे खोले । ऐसा नहीं की समय हाथ से निकल जाए । हम सब का विनाश सामने खडी है ।
2:- समय की मांग
353 देशों को जोडना और सभी 353 देशों के सैनिको को सिवील पुलिस में चेंज करना तो अपने आप 80/90 भ्रष्टाचार कम हो जायेगा ।
( राष्ट्र प्रेम इंसानो की मौत है , धरती प्रेम इंसानो की जिन्दगी है )
( शैतानो के लिए देश महत्वपूर्ण होता है , इंसानो के लिए धरती महत्वपूर्ण होता हे )
353 जेलो का मतलब 353 देश है ।गूगल रिपोर्ट के अनुसार आज इस धरती पर 353 देश और मानव की जनसंख्या लगभग 7.5 अरब है । जैसे -जैसे मानव विकास करता जा रहा है वैसे -वैसे वे अपने लिए छोटे छोटे जेल का निर्माण करता जा रहा है यानी की छोटे छोटे देश का निर्माण करता जा रहा है ।
1 :-जेल दो प्रकार के है
वर्तमान मे जेल दो प्रकार के है । पहला जेल अपराधीयों के लिए बनाया गया है । जिसमें जेलर और पूलिस दोनो होते है । दूसारा जेल इंसाने अपने लिए बनाया है । जिसे देश कहते है । इस जेल में कोई जेलर और पूलिस नहीं होता है फिर भी कोई कैदी जेल तोडकर बाहर भाग नहीं पाता । जिस जेल में पूलिस और जेलर दोनों है वहां कैदी जेल तोडकर बाहर भाग जाते है । पर इंसान इतना कमजोर कैसे हो गया ? जबकि पूरी धरती इंसानो की है । फिर इंसान कमजोर और असहाय हो गया है ।आज हर देश की सरहद की दीवारें इतनी मजबुत है कि किसी भी देश के गरीब मजदूर नागरिक को अपनी रोजी रोटी के लिए अपने देश के अलावा किसी दूसरे देशों मे जा नही सकता । भले ही वो गरीब मजदूर भूखा – प्यासा मर जाए क्योकीं प्रत्येक देश की सरहद और दीवारे अपने यहां आने की इजाजत नहीं देती है । इसे आप क्या कहेंगे जेल ?
2:-धरती माॅ की आजादी
जब हमारी धरती माॅ आजाद नहीं हुई तो उसकी बेटीयां कैसे आजाद हो सकती है । धरती माॅ का आजाद होने का मतलब है कि सभी देशों का सरहद मिट जाना यानी की सरहद का खत्म हो जाना। कोई भी मनुष्य किसी भी देश में बेरोक टोक के आ जा सके । आप जानते है की 353 देशों की माॅ को जन्म देने वाली हमारी धरती माॅ ही है । पर कोई धरती माॅ की जयकारा नहीं करता वो कोई मनुष्य हो , राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता हो ,धार्मीक या समाजीक संगठन के कार्यकर्ता हो ,पर कोई धरती माॅ के प्रति कृत्ज्ञता जाहीर नहीं करता ।भारतवासी भारत माता की जयकारा करते है , अमेरिकावासी अमेरिका का ,जापानवासी जपान का , चीनीवासी चीन का , वो चाहे किसी भी देश का नागरिक हो वह अपने ही देश की माॅ का जयकारा करता है पर धरती माॅ की नहीं ।अगर सभी मनुष्यों के अंदर धरती माॅ के प्रति सम्मान , आदर और कृत्ज्ञता होती तो प्रत्येक देशों की उसकी अपनी सरहद नहीं होती और न ही इतने अधिक विनाशकारी हथियार और परमाणु बंम का अविष्यकार होता ।
3:- बाजार का खुलना
आज का मानव समाज अपने लिए सुख सुविधा के सारे चिजों का बाजारो को खोलता जा रहा है पर अपने लिए सारे चिजों की बाजार का बंध करता जा रहा है ।आप देखो , पेड – पोधो , पशु – पक्षी, किडे – मकोडे हर चिज का बाजार खुला है । कुछ भी खरीद सकते है , निर्जीव वस्तुयें , सजिव वस्तुयें कुछ भी खरीद सकते है । किसी भी देश की सजिव और निर्जीव वस्तुये आराम से किसी और देशों में बिक रहें है । कहीं कोई रोक टोक नहीं । पर मनुष्यो के लिए पाबंदी लगी हुई है । गरीब मजदुर अपना देश छोड कर किसी और देशों में अपनी रोजी रोटी के लिए जा नहीं सकते । इसे आप क्या कहेंगे जेल ?
4:- उद्योगपति , समाजीक , धार्मीक , राजनीतिक संस्थान
एक उद्यगपति अपने कारोबार के लिए एक देश से दूसरे जा रहे है, अपने कारोबार को बढाने के लिए । उद्योगपतियो के लिए बाजार खुला है । समाजीक संगठन और धार्मीक संगठनो के लिए बाजार खुला है , ये अपनी सेवा जनता को प्रदान कर रहे ,अपनी सेवा को दे रहे है । इस धरती के सारे राजनीतिक नेताओं जैसे सांप सुंघ गया है ।ये अपने देश के बाहर निकलना ही नहीं चाहते । कुर्सी के लिए राजनीतिक नेता देशों को ,राज्यो को , जाति , भाषा और प्रांतो को बाटते जा रहे , एक दूसरे से लडा रहे है जैसे इन नेताओ के पास कोई काम ही नहीं । हम जितने बटे रहेंगे । हम सब का विनाश का कारण राजनीति बनेगी । इस धरती के सारे राजनीतिक नेताये इतने कमजोर और असहाय हो गये , जैसे की ये नेता न हो कर गाय- भैंस , पशु – पक्षी ,किडे – मकौडे हो गये है । पशु – पक्षी जैसे असहाय और कमजोर होते है , वैसे आज के राजनीतिक नेता असहाय और कमजोर हो गये है । क्या राजनीतिक नेताओ का कर्तव्य नहीं होता कि सारे मनुष्यो के लिए बाजार खुलवाये ?
5:- मोदी जी
मैंने सुना है कि मोदी जी की सिना 56 इंच का है ।पर आप बताये , जो जेल का कैदी हो उसका सिना 56 इंच का कैसे हो सकता है ? कैदीयों की कोई सिना नहीं होता, बिना सिना के कैदी पैदा होते है और मर जाते है । मोदी जी अगर आपका सिना 56 इंच का है तो सरहद की दीवारे तोड कर दिखाये ।
भाई से लड कर , भाई को भगाकर इसे आजादी नहीं कहते । जो भी देश के नागरिक अपने आपको आजाद मानते ,या अपने आपको आजाद समझते है , वो गलत समझते है सिर्फ कुर्सी आजाद हुई है । हिंदुस्तान कल भी गुलाम था ,आज भी गुलाम है ।सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका कल भी गुलाम था आज भी गुलाम है । लगभग सभी देशो को गुलाम बनाने वाला देश इंगलैंड कल भी गुलाम था आज भी गुलाम है । इस धरती के सभी 353 देश कल भी गुलाम थे और आज भी गुलाम है । अगर कोई दश अपने आपको गुलाम नहीं मनता तो वो अपने देश के गरीब नागरिक को किसी दुसरे देशों में भेज कर देखे तो आपको अपनी वास्तविकता का ज्ञान हो जायेगा । आज भी राजाओ की शासन प्रणाली सभी देशों में जीवित है। लोकतंत्र प्रणाली लोगो से काफी दूर है । आजादी का मतलब है कि न तुम्हें कोई गुलाम बना सके और न तुम किसी को गुलाम बना सको । जहां मर्जी अपनी रोजी रोटी के लिए गरीब मजदुर जा सके ,तो समझो मानव समाज 353 जेलो से आजाद है ।
( राष्ट्र प्रेम इस धरती के विनाश का बडा परमाणु बंम है ।धरती प्रेम ,धरती के कल्याण का सबसे बडा परमाणु बंम है । )