प्रेम क्या है ? / भय और प्रेम में क्या अंतर है? / what is love ? /What is the difference between fear and love?

प्रेम क्या है ? प्रेम का बहुत ही साधारण simple परिभाषा है जहां समस्याएं नहीं होती है वहां प्रेम होता है और जहां समस्याएं होती है वहां भय  होता है। प्रेम और भय में क्या अंतर है ? चलिए  प्रेम और अप्रेम के विषय में जानते हैं । दोनों में क्या अंतर है? दोनों में जमीन आकाश का अंतर है । जहां भय समस्याएं को पैदा करती है। वही प्रेम सारी समस्याओं को खत्म करता है ।

भय  :–   जब से मनुष्य का धरती पर आगमन हुआ है , तब से लेकर आज तक मनुष्य का जीवन ,भय के केंद्र पर खड़ा है।पूरा मनुष्य जाति भय, चिंता, दुख, पीड़ा से पीड़ित है। मनुष्य हमेशा से भयभीत रहा है और भय, चिंता, दुख और पीड़ा के ऊपर मनुष्यों का अपना जीवन खड़ा है । भय के कारण मनुष्य मंदिर , मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा में पूजा अर्चना करता है। नमाज पढ़ा करता है। प्रार्थना करता है ।

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भय  आदमी के भीतर क्रोध और लोभ- लालच पैदा करता है। क्योंकि वह हमेशा सोचता रहता है। यह मिल जाए । वह मिल जाए। धन मिल जाए। पद मिल जाए। भगवान मिल जाए। स्वर्ग मिल जाए। ताकि किसी भी दुख पीड़ा से बच जाए। चिंता से बच जाए।

हमारा देश , हमारा राष्ट्र, हमारी देश भक्ति, हमारी राजनीति , हमारा धर्म और हमारा फौज यह सब हमारे भय पर खड़ी है। अकाश में लहराता हमारा झंडा भय प्रतीक है। धर्म या मजहब  सभी भय का प्रतीक है।

मनुष्य जाति दो तरह से भय पैदा करते हैं। एक भय को पैदा करती है ताकि लोगों का शोषण किया जा सके और फिर भय पैदा हो जाने पर उस भय को बचाने के लिए जड़ता पैदा की जाती है । ताकि आदमी भय से कहीं मर ना जाए ।

आप सैनिकों को ही देख लीजिए। कोई भी सैनिक अभय को उपलब्ध नहीं होता । सिर्फ उसकी बुद्धि को जड़ किया जाता है। उसकी संवेदनाएं कम कर दी जाती है । ताकि उसे भय का कोई बोध न हो । जड़ बुद्धि वाले लोग  भयभीत नहीं होते । तभी तो सैनिक, सैनिक को मारते हैं । हत्या  करते समय उनके भीतर किसी भी तरह का दया धर्म नहीं होता । संवेदनाएं नहीं होती। हत्या ।  सैनिक भय का प्रतीक है। भय से बचने के लिए सैनिकों का निर्माण किया गया है।

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आज सारी दुनिया का बागडोर भयभीत लोगों के हाथों में है। विश्व का कोई भी राजनीतिज्ञ  विश्व में शांति नहीं ला सकता है। क्योंकि राजनीति के सारा केंद्र भय पर खड़ा है और न ही कोई धर्मगुरु विश्व में शांति ला सकता है। क्योंकि धर्मगुरु का केंद्र भी भय पर खड़ा है। यही वजह है कि आज सारी दुनिया भय से त्राहिमाम कर रही है। भय की वजह से सारी दुनिया खंड खंड में बैठी हुई है।

जहां भय होता है , वहां घृणा पैदा होती है । जहां भय होता है , वहां हिंसा , क्रोध और लोभ लालच पैदा होता है । जहां भय होता है , वहां नफरत पैदा  होती है । जहां भय होता है , वहां बीमारियां पैदा होती है । जहां भय होता है , वह नई नई समस्याएं पैदा होती रहती है । जहां भय होता है , वहां कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस का निर्माण होता है । कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस यह सभी भय के आधार पर खड़ी है । भय सदा बीमारी को फैलाता है । भय आपको सदा निर्धन बनाए रखती है । जहां भय होता है , वहां सदा लोग भूख और बीमारी से मरते हैं ।जहां भय होता है , वहां बड़े-बड़े विनाशकारी हथियारों का निर्माण होता है जैसे परमाणु बम या हाइड्रोजन बम etc जहां भय होता है , वहां डॉक्टर ,  वैद्य , हकीम और हॉस्पिटल पैदा होने लगता है । आपके आसपास में डॉक्टर है । हॉस्पिटल है । यह सब भय के कारण है । भय का आधार ही होता है कि आप सदा बीमारी , परेशानी  या दुख चिंता से घिरे रहे । डॉक्टर हॉस्पिटल का चक्कर लगाते रहे ।थाना पुलिस , कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाते रहे । जहां भय होता है , वहां तलाक का जन्म होता है । जहां भय होता है , वहां दहेज दानव पैदा होने लगते हैं ।

आज कोरोनावायरस का फैलने का मुख्य कारण हमारा भय है । किसी न  किसी रूप में हम सब भयभीत हैं । तभी आज कोरोनावायरस इतनी तेज गति से फैल रहा है । भय मनुष्य के शरीर की इम्युनिटी पावर को कम कर देता है । भय युद्ध को जन्म देता है । भय  बिना कारण युद्ध कराता है ।  जिस वजह से एक देश दूसरे देश से लड़ता है । भाई – भाई आपस में लड़ते हैं । एक पड़ोसी दुसरे पड़ोसी से लड़ता है । पति पत्नी आपस में लड़ते हैं । बाप बेटा आपस में लड़ते हैं । इस सब भय का अंग है । यह सब भय पर खड़ा है । किसी भी देश की व्यवस्था सब भय पर खड़ी है ।

मैं आपसे कहना चाहता हूं कि ऊपर जो तस्वीर कपल्स का है । वह प्रेम का प्रतीक नहीं है । प्रेम जीवन देता है ,  जीवन लेता नहीं है । इन कपल्स के बीच प्रेम का फूल कभी खिलता नहीं । क्योंकि यह लोग प्रेम की वजह से आपस में जुड़ते नहीं हैं इनका जुड़ाव इनके शरीर की मैग्नेटिक फील्ड की वजह से एक दूसरे के करीब आते हैं । जैसे शरीर को भोजन की जरूरत पड़ती है ठीक इसी प्रकार शरीर को सेक्स की जरूरत पड़ती है । प्रकृति का नियम अनुसार जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया सदा  चलता रहे । इसलिए उनके शरीर की बनावट इस प्रकार किया गया है ताकि कपल्स आपस में संबंध स्थापित कर सकें और जन्म मृत्यु की प्रक्रिया चलता रहे । लेकिन उनका यह प्रेम नहीं है । अगर उनका प्रेम होता तो आज अमेरिका में लगभग 40% लव मैरिज करने के बाद उनका तलाक हो जाता है । आखिर क्यों ? जबकि तलाक भय का प्रतीक है । विकसित देशों में लव मैरिज एक दो साल के अंदर ही उनका   तलाक हो जाता है । आप यह कभी न सोचिए गा कि जो कपल्स आपस में प्रेम करते हैं । उनके भीतर कभी प्रेम का फूल खिल नहीं सकता ।

प्रेम :- क्या आप जानते हैं कि अगर आदमी के अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए तो क्या होगा । कभी आपने यह सोचा । आपको एक छोटी सी बात बताना चाहता हूं कि शायद आपको प्रेम का मतलब समझ में आ जाए । प्रेम में कितनी ताकत है।

कल तक मालुम नहीं था कि अणु और परमाणु क्या है ? पर आज ऐसी बात नहीं है । एक छोटे से अणु में कितनी ऊर्जा होती है। एक अणु में कितनी शक्ति होती है । अगर हम अणु का विस्फोट करते हैं तो उसमें अनंत शक्तियों का जन्म होता है। एक के छोटे से रेत के कण के अणु में इतनी ताकत है कि एक बड़ा महानगर जैसे मुंबई , दिल्ली जैसे शहर को नष्ट किया जा सकता है।

हाइड्रोजन के एक अणु से मुंबई जैसे महानगरों को क्षन भर में राख किया जा सकता है । तो आप समझ सकते हैं कि एक मनुष्य में कितनी ताकत हो सकती है जब पानी की एक बूंद में या हाइड्रोजन के अणु में इतनी ताकत है। तो मनुष्य के अंदर कितनी ताकत हो सकती है। जब उसके अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए।

हम सब के भीतर प्रेम का बीज पड़ा हुआ है । वह बीज , बीज ही रह जाता है । अंकुरित कभी नहीं हो पाता । क्योंकि उसे भूमि , पानी और रोशनी नहीं मिल पाती है। उस प्रेम रुपी बीज के भीतर दर्द , कसक और पीड़ा रह जाता है । जो उसे होना चाहिए था , वह नहीं हो सका ।

जिस तरह पौधे पर फूल नहीं आता तो उस पौधे को देखिए कैसे वह मुरझाए सा कुम्हलाए सा दिखता हैं । ठीक इसी प्रकार आदमी के भीतर भी प्रेम रूपी बीज है। और वह अगर न खिले तो चिंतित हो जाता है। उसका चेहरे लटक जाता है । उसका पूरा व्यक्तित्व मुरझा जाता है। ऐसे ही आज सारी मनुष्यता का व्यक्तित्व मुरझा गया है ।

कभी आपने अपने आप से पूछा कि मेरी सबसे अधिक गहरी प्यास क्या है ? क्या धन , पद , मोक्ष या परमात्मा । आपको इसका जवाब भीतर से आएगा सिर्फ प्रेम । प्रेम  दो और प्रेम लो । प्रेम देना ही मनुष्यों का जन्मसिद्ध अधिकार है ।

जिस दिन मनुष्य के अंदर प्रेम का पूरा फूल खिलता है। तो वह परमात्मा को उपलब्ध हो जाता है । प्रेम परमात्मा का द्वार है। लेकिन हमें कभी प्रेम का ख्याल भी नहीं आता । प्रेम को कैसे विकसित करें । प्रेम का फूल खिलना बहुत जरूरी है । प्रेम के बिना पूरी मनुष्यता नष्ट हो सकती है ।

जहां प्रेम है , वहां आनंद और खुशियां है । जहां प्रेम है, वहां शांति पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां करुणा पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां दया पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां सौंदर्य पैदा होता है । जहां प्रेम है, वहां स्वर्ग जाने का रास्ता मिल जाता है । जहां प्रेम है, वहां सरहद का कोई दीवार नहीं होती । जहां प्रेम है, वहां कभी युद्ध नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां डॉक्टर , वैद्य और हकीम दिखाई नहीं पड़ते । जहां प्रेम है , वहां कोई हॉस्पिटल दिखाई नहीं पड़ता । जहां प्रेम है , वहां थाना- पुलिस , कोर्ट – कचहरी नहीं हुआ करता । जहां प्रेम है, वहां किसी प्रकार का समस्या का जन्म नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां मंदिर मस्जिद की जरूरत नहीं पड़ती है ।

जो व्यक्ति चाहता है कि अपने जीवन में प्रेम का फूल खिलाना तो उसे प्रेम मांगने का ख्याल छोड़ देना होगा । आपका ध्यान हमेशा प्रेम देने का ख्याल होना चाहिए । आप प्रेम देते हैं तो आपको अंदर प्रेम का फूल खिलता है ।

प्रेम मांगने से प्रेम का बीज सिकुड़ जाता है । उसका बीज का खोल और अधिक कड़क हो जाता है । आप जानते हैं भीखमंगे से ज्यादा किसी का ह्रदय सिकुड़ा नहीं होता । जो मांगता है, वह सिकुड़ जाता है । जो प्रेम देता है या जो प्रेम देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाता है तो उसका दिया हुआ प्रेम का दान कई गुणा बढ़ कर उसके पास वापस आ जाता है ।

आपने देखा होगा कि बीज जब अंकुरित होता है तो क्या कहता है ? बीज अंकुरित होता है । तो उसकी पत्तियां निकलती है । उसकी शाखाएं बीज से बाहर की ओर निकलती आती है और फिर फूल खिलने लगता है । एक बीज की क्रिया अंदर से बाहर की तरफ होती है । ठीक इसी प्रकार आपको भी अपने अंदर का प्रेम बाहर की तरफ निकालना होगा । तो आपके अंदर का बीच का खोल टूट जाएगा फिर आपके अंदर प्रेम का रस बहना शुरू हो जाए।

प्रेम का पहला सूत्र है कि आप प्रेम का दान करें । दूसरा सूत्र है कि आप प्रेम का दान बिना शर्त करें । हमने प्रेम दिया नहीं और हम प्रेम पाना चाहते है । इससे आपका प्रेम का बीज का खोल कभी टूट नहीं सकता । प्रेम का तीसरा सूत्र है कि जब आप प्रेम किसी को देते हैं या किसी का सेवा मदद करते हैं तो आप उसका कृतज्ञता जाहिर करें तो इससे आपके अंदर प्रेम का बहाने का मौका मिलता है ।

मेरा कहने का मतलब कि आप किसी का मदद करते हैं या किसी का सेवा करते हैं तो उसके लिए आप कृतज्ञता जाहिर करें । यह नहीं कि वह आपको धन्यवाद दे। बलिक आप उसे धन्यवाद दें । मैं कृतज्ञ हूं। मैं अनुग्रहित हूं । उसके प्रति अपने अंदर अनुग्रह के भाव को अपने अंदर जागृत करें । आपके अंदर प्रेम की बीज चोट पहुंचती है । जिससे प्रेम रूपी बीच का खोल टूट जाता है और आपके जीवन में प्रेम का फूल खिलने लगता है और वह विकसित होने लगता है ।

जिस दिन प्रेम का झरना आपके अंदर बहने लगा । उसी दिन आपको मालूम चलेगा कि भय कहीं भी नहीं है । प्रियम की अनुपस्थिति में या गैरमौजूदगी में आपके भीतर भय सक्रिय हो जाता है । यही आपका भय आपके तन , मन और धन सब को बीमार कर देता है । आंखों से न दिखने वाला कोरोनावायरस का आप शिकार हो जाते हैं और आपकी यूनिटी पावर कम हो जाता है और आप बीमार हो जाते हैं ।

प्रेम से भरा हृदय में भय का कोई स्थान नहीं होता , भय से भरा हृदय में प्रेम का कोई स्थान नहीं होता ।

जब आप अंदर प्रेम से भर जाते है तब आपको अपने हाथ में तलवार उठाने की कोई जरूरत नहीं होती । क्योंकि सब जगह आपको राम , खुदा, जीसस और वाहेगुरु दिखाई देने लगते हैं। वही आपके अंदर हृदय भय से भरा है तो सारा जगत आपको शत्रु नजर आने लगता हैं । आपके अंदर ह्रदय प्रेम से भरा होता है तो सारा जगत आपको अपना मित्र नजर आने लगता है ।

जो अंदर होता है वही बाहर आता है । आपके अंदर प्रेम है तो आप प्रेम का दान करेंगे । अगर आपके अंदर भय है, तो आप भय का दान करेंगे । आप जो अंदर है वही बाहर प्रगट होता है


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जीवन की कठिनाइयों और सिर पर मंडराता मौत/स्कॉटलैंड का राजा रॉबर्ट ब्रूस/Life’s difficulties and death cruising on the head / King of Scotland Robert Bruce

यह कहानी स्कॉटलैंड का राजा ब्रूस है । ब्रूस अपने शत्रु से पराजित होकर भागा भीगा फिर रहा था । उसके संगी  साथ  सब छूट गए थे । धन जन की बड़ी हानि हुई थी । जीवन पराजित और लांच्छी था । आप कह सकते हैं कि राजा ब्रूस की किसी प्रकार से जीवन बच गया था ।

शत्रु , ब्रूस की तलाश कर रहे थे । राजा ब्रूस अपनी प्राण बचाने के लिए इधर उधर भागा फिर रहे थे । मौत उसके सर पर मर्डर आ रही थी । उसकी स्थिति यह थी कि अब मरा की तब मारा।

राजा ब्रूस भागकर एक खोह में छिप गया । वहां वह अपनी मौत आने का प्रतीक्षा कर रहा था । आप अनुमान लगा सकते हैं कि उसकी मौत कैसी क्रूर होगी। उसके अंदर भावनाएं किस प्रकार की जन्म लेती होंगी। शत्रुओं की तलवार पल भर में उसका काम तमाम कर देगी। कितनी डरावना राजा ब्रूस का वो समय था ।

खोह में छिपा राजा ब्रूस मन ही मन छटपटा रहा था। उसकी आत्मा कहीं किसी आश्रय की तलाश में थी। कहीं उसे आसरा मिल जाए। ( 353 देशों के सैनिक जानवर और पशु है )

तभी उसने सामने एक दृश्य देखा, की एक छोटी सी नन्हीं सी मकड़ी को खोह के मुंह पर जाला बुनने का शतक प्रयास कर रही थी। बार-बार  गिरती और बार-बार उठती और अपने शरीर को झाड़ कर उठ खड़ी होती फिर वो अपने नए उत्साह के साथ वापस जाला बनने का प्रयास करने लगती। जबकि मकड़ी के पास कोई आधार नहीं था। बिना आधार के मकड़ी का प्रयास व्यर्थ था। फिर भी मकरी बार-बार प्रयास करती और असफल हो जाती।

राजा ब्रूस को यह देख बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने देखा कि मकड़ी  जीना में सूत्र को अटका  दिया है।  फिर क्या था एक के बाद एक कितने सारे सूत्र अटक गए। मकड़ी ने अपना जाला बुनने लगी। थोड़ी देर में मकड़ी के पूरे प्रयास से खोह के मुंह पर जाला उनका तैयार कर दिया। शत्रु के सिपाही उसको के पास आए और खोह पर मकड़ी का जाला देखकर वापस लौट गए। सावधान रहे ! नफरत, घृणा, क्रोध, और लोभ लालच से ग्रसित व्यक्ति को कोरोनावायरस अपना शिकार बनाती है

राजा ब्रूस की आई हुई मौत वापस लौट गई। अब ब्रस एक गहरी  सोच में पड़ गए। वह सोच रहे थे कि जब मकरी बार बार गिरकर भी निराश और हताश नहीं हुई, मैं तो मनुष्य हूं। हाथ पैर वाला आदमी हूं। मैं कैसे हार सकता हूं। मैं कैसे इतनी जल्दी निराश हो गया।

राजा ब्रूस ने अपने  हार का मंथन किया और  मकरी से  जीवन जीने की नई प्रेरणा ली। राजा ब्रूस ने अपने बिछड़े हुए सभी संगी साथियों को इकट्ठा किया और उसने अपनी पूरी ताकत के साथ प्रयास किया। अंत में राजा ब्रूस की जीत हुई ।

यह कहानी हमें शिक्षा देता है कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए चाहे परिस्थितियां कितनी भी भयानक क्यों ना हो, हमें हार नहीं मानना चाहिए । हौसला और हिम्मत रखने वालों को  ऊपर वाला  नया रास्ता दिखा देता है। कठिनाई और समस्या से भागने वाले को कठिनाई और समस्या उसका सदा पीछा करता रहता है। सो आप अपने जीवन से हार न माने, अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपनी आखिरी सांस तक, आप अपना  प्रयास करें । आपका लक्ष्य खुद आप तक चल कर आप को सलाम करेगा ।

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सर आइज़क न्यूटन की मुसीबतों का पहाड़ /हार नहीं मानना/Mountain of Sir Isaac Newton’s troubles / Not giving up

संसार के प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइज़क न्यूटन को कौन नहीं जानता। उन्होंने ग्रह ,नक्षत्र ,प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण के संबंध में अद्भुत खोज की थी अपने अनुसंधान के लिए सरकार की ओर से महान यस प्राप्त किया और सर की उपाधि से न्यूटन को घोषित किया गया

न्यूटन की मुसीबत उस समय की है जब न्यूटन की आयु 50 वर्ष की थी 20 वर्षों से लगातार प्रकाश के सिद्धांत को मालूम करने के लिए अथक परिश्रम कर रहे थे। दिन रात निरंतर लेखन का कार्य कर रहे थे।

तभी एक रात लिखते लिखते थक गए और उनके टेबल पर अनुसंधान की पुस्तकें, आवश्यक कागजात पत्र बिखरे पड़े थे । टेबल पर लैंप जल रहा था , वही पास में उनका डायमंड नाम का कुत्ता अंगूठी के पास सो रहा था

20 वर्षों से तैयार किया गया अनुसंधान की सारी कागजात टेबल पर छोड़कर , कुछ देर के लिए बाहर घूमने चले गए । जब वह वापस बाहर से घूम कर अपने में कमरे में आए तो वह जो वहां का दृश्य देखे । उसे उनका होश उड़ गया ।

कोरोना वायरस से बचना है तो खुद से करे प्रेम

20 वर्षों का उनका कठिन परिश्रम राख के ढेर में बदल गया था। सब कुछ खत्म हो चुका था ।यह सब हुआ, उनका कुत्ता डायमंड की वजह से । कुत्त्ता टेबल पर चढ़ गया जिसके कारण टेबल पर रखे लैंप उलट कर गिर गया और टेबल पर अनुसंधान की सारी कागजात जो उसने 20 वर्षों से तैयार किया । सारे कागजात जल कर राख हो गई ।

आप जानते हैं 20 वर्षों का कठोर श्रम क्या होता है ? अपनी सुख-सुविधा को त्याग कर रात दिन एक कर प्रकाश के सिद्धांतों पर कार्य किए थे । जो पल भर में 20 वर्षों का काम जल कर राख हो गया और कोई होता, तो मानसिक आघात से पागल हो जाता या नहीं तो वो अपने कुत्ते को मृत्युदंड दे देता। पर न्यूटन ऐसा कुछ नहीं किया। न्यूटन ने अपनी मानसिक संतुलन को स्थिर रखा ।

न्यूटन जानते हैं की कठिनाइयों से गुजरे बिना कोई अपना लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता । कठिनाइयां मनुष्य को चमकाने और उसे तेजस्वी बनाने के लिए आती है । न्यूटन ने अपने कुत्ते के सिर पर अपना हाथ से थपथपाया और पुनः उसने अपने जोस और उत्साह के साथ फिर से समस्त कार्य किए और अंत में उन्होंने पूर्ण सफलता प्राप्त की।

न्यूटन की इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कभी भी आप कठिनाइयों और परेशानियों से भागे नहीं आप अपने जीवन की कठिनाइयों और परेशानियों को स्वीकार करें आपको उस कठिनाइयां और परेशानियों में जरूर कोई न कोई रास्ता मिल जाएगा ।

1 मिनट रुकिए आपने नोटिस किया होगा की जिस समय न्यूटन के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ गिरा था ।उस वक्त उनके बॉडीज में किस प्रकार के एनर्जी बह रही थी ? अगर उनके बॉडीज में नेगेटिव एनर्जी बह रही होती तो न्यूटन किसी पागलखाने में भर्ती होते हैं या मृत्यु देवता का भोजन बन गए होते हैं लेकिन उनके बॉडी में सकारात्मक ऊर्जा का फ्लो हो रहा था इस वजह से उन्होंने 20 वर्षों का काम जो पल भर में खत्म हो गया था । फिर से वापस उस कार्य को पूर्ण किया । इसलिए आज न्यूटन का नाम है । जीवन का सारा खेल एनर्जी का है । अगर आपने एनर्जी को समझ लिया तो कभी भी आप जीवन भर असफल नहीं होंगे न आपको कभी डॉक्टर दवा की जरूरत पड़ेगी ।

353 जेलों में कैद सारी मानव जाति

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अति महत्वाकांक्षा एवं लालच

एक छोटे से कस्बे में एक दीनदयाल नामक एक महत्वकांक्षी नवयुवक था जिसे उसके पिता ने पढ़ने के लिए बड़े शहरों में भेज दिया ताकि पर लिखकर महान कार्य करें एवं अपने परिवार का नाम रोशन करें 

दीनदयाल चार सहपाठी  के साथ आगे की पढ़ाई की यात्रा आरंभ कर दिया पर घरेलू कार्य में साथियों का सहयोग करने के बदले में दीनदयाल झूठ बोल कर अपना समय गलत कार्यों में खर्च करने लगा जिसके कारण उसके सहपाठी ने हमेशा उससे नाराज ही रहते थे 

धीरे-धीरे इसी प्रकार समय बीतने लगा पढ़ाई खत्म करने के बाद नौकरी की तलाश जारी किया कुछ वर्षों तक नौकरी नहीं लगने के उपरांत उसके पिता ने उसकी शादी करवा दे शादी के बाद दीनदयाल ने अपनी पत्नी को अपने साथ बड़े शहर में किराए के मकान में रहने लगा एवं घर-घर बच्चे को ट्यूशन पढ़ा कर अपना गुजारा भत्ता काफी कटाई से करने लगा 

अपनी जात पात को बदलकर एक झूठ का सहारा लेकर एक अच्छी कंपनी में नौकरी करने लगा इसी दौरान उसके यहां एक पुत्री पैदा हो गई जिसे दीनदयाल चिंतित रहने लगा वह सोचने लगा कि उसके यहां एक पुत्र रूपी रत्न पैदा  होता तो वह उसके नाम को रोशन करता 

उसका ज्यादातर ध्यान पुत्र प्राप्ति होने के कारण कंपनी के कार्यों में मन लगाकर काम नहीं करने के कारण उसे कंपनी से निकाल दिया गया इसी दौरान उसके यहां फिर से एक और पुत्री का जन्म हुआ 

एवं बेरोजगार की स्थिति में रहने के कारण वाह तंगी हालात से गुजर रहा था इसी बीच दीनदयाल के ससुर जब अपनी पुत्री के यहां आए एवं में के बाद उसे काफी दुख हुआ उसने अपने संबंधों से उधार लेकर गुजारा भत्ता हेतु एक गाड़ी खरीद को दे दी और समझाया कि ताकि परिवार से हो सके   उसके बाद उसके बाद दीनदयाल गाड़ी चला कर अपन अपना गुजारा भत्ता उजाला करने लगा 

दीनदयाल की अच्छी हालत होने के उपरांत जब उसे के ससुर ने गाड़ी खरीदने के समय अपना दिया हुआ पैसा वापस मांगा तो वह रुपया को अपने संभलता कृपया अपने संबंधियों को लौटा सके तो दीनदयाल ने उस समय भी झूठ बोलकर रुपया देने से इनकार कर दिया जिसके कारण ससुर को काफी दुख हुआ इसी दौरान दीनदयाल को दीनदयाल के यहां एक पुत्री का जन्म हो गया 

उसके बाद का उसके बाद वह काफी चिंतित रहने लगा परिवार के खर्च में बढ़ोतरी के उपरांत रात में भी किसी दुकान पर कार्य करने लगा था कि घर की माली हालात और बेहतर हो सके और इसी तरह में बिकने लगा तीनों पुत्रियों के पढ़ाई सरकारी विद्यालय में जैसे-तैसे हो रही थी इसी दौरान उसके यहां एक पुत्री का जन्म पुणे से दीनदयाल को काफी खुशी हुई ज्यादातर देने के कारण उसकी तीनों पुत्री कुपोषित दिखने लगी और तीनों की पढ़ाई भी हो रही थी दीनदयाल के कोने में एक और हो जाए तो दोनों मिलकर बाद में परिवार की स्थिति हो सकती है

 उसके बाद उसकी पत्नी गर्भवती हुई तो बहुत खुश हुआ सारा ध्यान उसकी उसकी पत्नी पर था अभी बच्चा हो गए उसकी आंख फिर से एक पुत्री का जन्म हुआ जिसके बाद फिर से दीनदयाल उदास हो गया उसका मन उसका मन गाड़ी चलाने नहीं लगता था तब परिवार के कारण उसकी कार को बेचना पड़ गया जाता है कि

 भगवान प्रत्येक मनुष्य के भाग को जरूर खटखट आते हैं जब मनुष्य भगवान की सारी कुछ समझ जाता है तो वह मनुष्य का विकास होना शुरू हो जाता है उसके बाद दीनदयाल की नौकरी फिर से उसी कंपनी में हो गई 

अच्छे दिन फिर वापस आने लगे फिर अति महत्वाकांक्षा एवं लालच ने दीनदयाल का साथ नहीं छोड़ा बैंक से ऋण लेकर जमीन खरीदना एवं मकान बनवाने में सारा ध्यान लगा दिया परिवार का परिवार का खानपान एवं बच्चे की पढ़ाई लिखाई में जैसे तैसे हो रही थी परिवार के सभी सदस्य कुपोषित से दिखने लगी 

शुरू की तीनों पुत्रियां विवाह योग हो गई पैसे के अभाव में विवाह नहीं हो पा रहा था इधर मकान भी आधे अधूरे स्थिति में रहने के बावजूद भी दीनदयाल सपरिवार वहां रहने लगा वहां आसपास अच्छे मकान वाले उन्हें अपेक्षित दृष्टि से देखने लगे इसी कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा का भी होने लगा एक

 तीसरे नंबर की लड़की भी गलत संगत के कारण भाग कर शादी कर ली दीनदयाल के ससुर भी उसके बर्ताव के कारण उसका साथ छोड़ दिया दीनदयाल की सभी जमीनों को बेचकर सभी परियों की शादी नहीं होने उचित नहीं होने के कारण उनकी परिवार दीनदयाल को अपनी गलती का एहसास हो गया कि झूठ बोलता एवं ना अपने ससुर से व्यवहार खराब करता एवं समायोजित कार्य न करने के कारण उसकी स्थिति  बनी हुई है

विश्व प्रसिद्ध भविष्यवाणियां / भारत के पक्ष में भविष्यवाणियां/World Famous Predictions / Predictions in favor of India

विश्व प्रसिद्ध भविष्यवाणियां क्या है ? जीन डिक्सन ने भारत के विषय में क्या कहा ? एंडरसन ने भारत के विषय में क्या कहा ? गेरार्ड क्राइसे या प्रोफ़ेसर कीरो या नस्त्रदमस या आर्थर चार्ल्स क्लार्क ने भारत के विषय में क्या कहा ? भारत के विषय में कौन से भविष्यवक्ता ने क्या कहा ?

आज संसार की समस्याएं इतनी जटिल हो गई है कि मानव उसे अपनी बुद्धि और बल पर सुलझा नहीं सकता । विश्व शांति अब मनुष्य की ताकत के बाहर की बात हो गई है लेकिन हमें निराश होने की जरूरत नहीं है ।

कुछ ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि भगवान / खुदा धरती पर आ गया है । वह हमारी सहायक शक्तियों के साथ नवयुग की स्थापना के प्रयासों में जुटा हुआ है । वह दुनिया का उद्धारक ज्यादा देर तक पर्दे में के पीछे छिपा नहीं रह सकता । पुरानी सभ्यता का अंत होने का समय आ गया है और दिव्य संस्कृति का आगमन का समय आ चुका है । पुरातन युग का नाश और नए युग का उदय सुनिश्चित है।

जीन डिक्शन ( Jean Dixon ) के अनुसार एक ग्रामीण परिवार में एक महान आत्मा ने जन्म ले लिया है। जो महान आध्यात्मिक क्रांति का सूत्रपात संचालन करेगा । उसके साथ क्रियाशील आत्माओं की शक्ति होगी । जो संसार की विकृत वर्तमान परिस्थितियों को बदल डालेगी । यह जीन डिक्सन अमेरिका ही नहीं सारे विश्व में भविष्यवाणी के लिए विख्यात है।

एंडरसन के अनुसार एक ऐसे व्यक्ति ने जन्म लिया है। जिसकी अकेले की उत्पादित शक्ति किसी भी शक्ति संपन्न राष्ट्र के बराबर होगी । वह एक भाषा एक संस्कृति एक धर्म की आचार संहिता का सृजन करेगा ।

जब एंडरसन 8 वर्ष का था तभी उसने अपने बड़े भाई को लेकर एक भविष्यवाणी की थी उस दिन एंडरसन अपने घर में खेल रहा था । प्रथम युद्ध प्रारंभ हो चुका था । एंडरसन का बड़ा भाई नेल्सन कनाडा की सेना में कप्तान था । उसने अपनी मां का हाथ पकड़कर कमरे में ले गया और बोला देखो मां , भैया के चेहरे पर बंदूक की गोली लगी है और वह पृथ्वी पर गिर कर मर चुके हैं । उसकी मां ने उसे डांटा , चल मूर्ख , फिर कभी ऐसी बात अपनी मुख से मत निकालना। पर एंडरसन वह बात बार-बार कहता रहा ।

इस घटना के दो-तीन दिन बाद ही कनाडा से तार आया की नेल्सन की 1 नवंबर 1918 को गोली लगने से मृत्यु हो गई है ।

एंडरसन ने अपनी एक महत्वपूर्ण भविष्यवाणी में बताया कि आगामी वर्ष संसार के लिए महा विनाशक होंगे । एशिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश उत्पाद शुरू करेगा। जो आज आप प्रमाण देख रहे हैं कोरोना वायरस को जन्म देना ।

एंडरसन ने यह भी कहा था कि आने वाले दिनों में सभी देशों की राजनीतिक प्रधानों का अस्तित्व खतरे में रहेगा और उसका प्रभुत्व दिन प्रतिदिन घटता चला जाएगा । छोटे छोटे से तबके के सच्चे ,ईमानदार, न्याय , नीति ,उदारता ,त्याग और बलिदान को महत्त्व देने लगेंगे । संसार के तमाम संविधान के समानांतर एक मानवीय संविधान का निर्माण होगा। समाचार पत्रों में मुखपृष्ठ पर ऐसे समाचार छापे जाएंगे । जो आज नहीं छपा करता है।

उनका कहना था कि आज संसार धर्म संस्कृति के जिस स्वरूप की कल्पना भी नहीं करता उस धर्म का तेजी से विस्तार होगा और सारे संसार पर छा जाएगा । यह धर्म और संस्कृति भारत वर्ष की हो गई और वह मसीहा भी भारत वर्ष का होगा ।

युग परिवर्तन परमात्मा या खुदा की निजी इच्छा है । यह किसी के रोकने से नहीं रुकेगा । आज की वर्तमान परिस्थितियां बदलकर रहेगा । उसे कोई कितना भी रोकना चाहे , पर रोक नहीं सकता। कितना भी धन लगाए पर उस क्रांति को कोई रोक नहीं सकता । वो क्रांति होकर रहेगी । यही परमात्मा की इच्छा है ।

गिरार्ड क्राइस्ट के अनुसार एक प्रकाश उठ रहा है। जो वायुमंडल को भी शुद्ध करेगा और लोगों के अंतःकरण में समाये छल , कपट , घृणा और लोभ – लालच को भी शुद्ध करेगा । संसार एक सूत्र में बांधेगा और सर्वत्र अमन और शांति का राज होगी ।

इसी बीच संसार में भारी उथल-पुथल होगी । वायु दुर्घटनाएं इतनी अधिक होगी की बहुत कम लोग हवाई जहाज से यात्रा करेंगे । संसार के लोग उस मसीहा को देखेंगे और उसकी बात मानेंगे । सारे राजनीतिक नेता को एक मंच पर इकट्ठा होने को विवश होंगे । फिर संसार एक सूत्र में बंधता चला जाएगा । चारों तरफ अमन और शांति होगी । कहीं कोई हिंसा नहीं होगी , दमन , झूठ , फरेब , लोभ -लालच के लिए कोई स्थान न होगा।

आर्थर चार्ल्स क्लार्क के अनुसार वह समय आ गया है । जब संसार से वर्ण भेद , जातिभेद , लिंग भेद तथा राष्ट्रों के बीच भेदभाव मिट जाएगा। सारी दुनिया के लोग भाई भाई की तरह रहेंगे । सारी पृथ्वी पर एक धर्म , मानव धर्म की स्थापना होगा । आज जिस तरह से पृथ्वी के सारे देश बंटे हुए हैं । वह सारे देश एक हो जाएंगे । मानव का सोया हुआ अंतःकरण जागने को विवश हो जाएगा । आज जिन शक्तियों की ओर लोगों का ध्यान भी नहीं जाता। तब वह शक्तियां प्रत्येक मानव का शोध विषय बन जाएगा।

प्रोफ़ेसर हरा के अनुसार ऐसे किसी दिव्य पुरुष का जन्म भारतवर्ष में होगा। जिसकी आध्यात्मिक क्रांति की जड़ें बिना किसी लोक यश के भीतर ही भीतर जमता रहेगा और उसके बाद उसका प्रभुत्व सारे विश्व में छा जाएगा । उसके विचार इतना मानवतावादी और दूरदर्शी होगा कि सारा विश्व उसके कथन और विचारों को सुनने को बाध्य हो जाएगा ।

जूलबर्न के अनुसार इतिहास के सबसे समर्थ व्यक्ति का उत्तरण हो चुका है शीघ्र ही सारी दुनिया को बदल डालेगा। उसका ज्ञान क्रांति उठेगा और आंधी तूफान की तरह सारे विश्व में छा जाएगा।

श्री अइय्यर ने बताया कि कल्कि नाम का महापुरुष संपूर्ण आर्ष ग्रन्थों के उध्दार से लेकर सामान्य जीवन तक की सारी रीति नीति संबंधी नए विचारों का सृजन करेगा । पीछे इन्हीं विचारों को लोग अनुसरण करेंगे। वह गृहस्थ होगा । अतुल संपत्ति वाला होगा । फिर भी उसका रहन-सहन साधारण गृहस्थ जैसा होगा ।उसकी संपत्ति लोकमंगल के लिए होगे।

फ्रांस में जन्मे नॉस्त्रादमस के अनुसार विश्व विख्यात व्यक्ति का जन्म पूर्व देशों में होगा। यह अकेला ही अपने छोटे-छोटे सहयोगियों के द्वारा सारे संसार में तहलका मचा देगा। यह ऐतिहासिक महापुरुष एक ऐसे महा संघर्ष को जन्म देगा कि घर-घर गली गली मोहल्ले नगर नगर में अंतर्द्वंद छिड़ जाएगा। उसके बाद संसार में सर्वत्र मानवता का आधिपत्य होगा । लोग आसुरी वृत्तियों का परित्याग कर देंगे और संसार में सर्वत्र सुख शांति अमन का राज होगा।

जितने भी भविष्य वक्ताओं ने भविष्यवाणियां की है उनके अनुसार वह वही व्यक्ति होगा जो छल कपट राजनीति धार्मिक से कोई मतलब नहीं होगा उसका धर्म, मानव धर्म और प्रेम ग्रंथ होगा । उस प्रेम धर्म से सारी दुनिया जीता जा सकता है । आप जानते हैं कि सारा ब्रह्मांड एक सूत्र में बंधा है। जबकि धरती पर मनुष्य ने अपने आप को धर्म जाति भाषा प्रांत और देश के नाम पर अपने आपको बांट कर रखा हुआ है । सभी धर्म ,जाति , भाषा प्रांत, देशों और मनुष्यों को एक सूत्र में बांधने का मूल मंत्र है , वह है प्रेम । हम प्रेम सारी दुनिया को बांध सकते हैं । प्रेम के द्वारा ही हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं।

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Best Motivational Ants Story 2020/ दो चीटियों की कहानी/Story of two ants .

Best Motivational Story 2020/ दो चीटियों की कहानी/Story of two ants .
यह दो चीटियां की कहानी है । एक चींटी शक्कर के ढेर पर रहती थी और दूसरी चींटी नमक के ढेर पर रहती थी।

एक दिन अचानक मार्ग में दोनों चीटियों का मिलान हुआ । वह दोनों एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश हुई। दोनों ने विदा होते समय एक दूसरे को अपने घर आने का आमंत्रण दिया । नमक वाली चींटी बोली , बहना मेरा स्थान बड़ा ही रम्य है । मैं वहां नमक के ढेर पर खूब मौज से रहती हूं । तुम एक दिन मेरे घर पर आवश्य आना । मैं तुम्हें बहुत सारा नमक दूंगी । शक्कर वाली चींटी ने उसका प्रेम आग्रह स्वीकार किया और मधुर स्वर में बोली , ठीक है कल मैं तुम्हारे घर पर अवश्य आऊंगी । फिर दोनों वहां से अपने-अपने घर को चली गई ।

दूसरे दिन शक्कर वाली चीटी मधुर अभिलाषा के साथ अपनी सहेली के घर पर पहुंची । नमक वाली चींटी ने उसका भाव भरा स्वागत किया । फिर थोड़ी देर तक बातचीत करके , नमक का टुकड़ा उसके आगे ला कर रख दी ।शक्कर वाली चीटी ने जैसे ही अपनी जबान पर एक नमक का टुकड़ा रखी । उसका मुंह खारा खारा हो गया और उसने थूक दिया । वही बोली , बहना तुमने मुझे यह खरा खरा क्या खिला दिया । तुम ऐसी चीज को खाकर जीवित कैसे रहती हो ? मैं तुम्हें मीठा जैसा शक्कर खिलाऊंगी । तुुुुम्हारा मुंह मीठा हो जाएगा । जो तुने कभी खाई नहीं होगी । नमक वाली चींटी बोली , बहना तुम क्या बोलती हो ? कितना अच्छा हमारा भोजन है । नहीं , नहीं कल तुम मेरे घर पर आओ । यह कह शक्कर वाली चींटी अपने घर चलने के लिए तैयार हो गई और अपने घर चली गई ।


नमक वाली चींटी अपने मन सोची , यदि मुझे वहां पर मेरी इच्छा के अनुरूप भोजन नहीं मिला , तो मैं क्या करूंगी ? मैं तो भूखी रह जाउंगी । तो उसने अपनी मुंह में नमक का एक टुकड़ा छुपा ली और शक्कर वाली चींटी के घर गयी ।


शक्कर वाली चींटी ने नमक वाली चींटी का स्वागत किया । थोड़ी देर इधर उधर की बातचीत की और उसके सामने शक्कर एक टुकड़ा ला कर रख दी । जब नमक वाली चींटी ने अपने मुंह में शक्कर का एक टुकड़ा रखी ।


शक्कर वाली चीटी ने पूछा कैसा स्वाद लगा ? नमक वाली चींटी ने कहा , कुछ भी नया स्वाद नहीं आया । जो मैं खाती थी वही स्वाद आया । मुझे तो कुछ भी मीठा स्वाद नहीं आ रहा है । तुम तो बता रही थी कि शक्कर तो बहुत मीठी होती है । शक्कर वाली चींटी ने बोली , ऐसे कैसे हो सकता है ? तुम दोबारा खाओ तो तुम्हें वह स्वाद मिलेगा । मीठी स्वाद मिलेगा । नमक वाली चींटी ने दो तीन बार खायी , फिर भी उसका स्वाद वैसा ही लगा । उसने बोली कोई नया स्वाद नहीं आया। तुम कहती हो शक्कर बहुत मीठा लगता है । कहां मीठा लगता है ? शक्कर वाली चींटी बहुत गंभीर सोच में पड़ गई ।


थोड़ी देर बाद उसने पूछा, तुम अपना मुंह खोलो क्योंकि मुझे लगता है कि तुमने जरूर अपने मुंह में कुछ दबायी हुई हो । जब उसने अपना मुंह खोली । यह मुंह में क्या रखी हो । उसे मुंह से बाहर निकलो। अब तुम यह शक्कर खाओ । तुम्हें यह शक्कर जरुर मीठा लगेगा ।


तब नमक वाली चीटी ने फिर से शक्कर का टुकड़ा अपने मुंह में रखा । शक्कर का मीठा स्वाद चखने के बाद बोली , अहा ! कितना मिठा है ? ऐसी शककर की मिठास का आनंद मुझे कभी नहीं मिला । अतः अब मैं भी तुम्हारे साथ यही रहूंगी।


यह कहानी क्या सिखाती है ? कहानी यह सिखाती है की कुछ भी पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है । बिना मूल्य चुकाए बिना कुछ मिलता नहीं । जब तक हम कुछ खोने को तैयार नहीं होंगे , तब तक हम कुछ पा नहीं सकते । इस ब्रह्मांड में हर चीज का अपना मूल्य है । कुछ भी पाने के लिए आपको उसका मूल्य चुकाना पड़ेगा। तभी आप पा सकते हैं यही जीवन का विधि विधान है ।

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Best Tips योगा क्या है / क्या योगा करने से हमें लाभ होगा /what is yoga  / Will we benefit from doing yoga

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योगा क्या है ?योगा करने से हमें क्या लाभ होगा ? क्या योगा सभी के लिए है? Benefits of yoga ?  इन सभी सवालों का जवाब हम आप को विस्तार पूर्वक बताते हैं । इस लेख / आर्टिकल को पूरा पढ़ने के बाद फिर कभी आपको योगा के विषय में जानने की जरूरत नहीं पड़ेगी ।


योगा एक जीवन जीने की कला है । एक पूर्ण चिकित्सा पद्धति है । जैसे धर्म लोगों को खूंटे से बांधता है तो योगा सभी तरह के खूंटे से आजाद करता है। बाहरी विज्ञान की दुनिया में आइंस्टीन का नाम सर्वप्रथम है ठीक इसी प्रकार शरीर की भितरी विज्ञान की दुनिया में पंतजलि का नाम प्रथम है।

योगा एक अध्यात्मिक प्रक्रिया है । जिसमें शरीर , मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम करता है। बहुत से लोग योगा और कसरत एक ही समझते हैं । पर दोनों में जमीन अकाश का अंतर है । दोनों का अपना अपना महत्व है । कसरत में आप सिर्फ शारीरिक प्रक्रिया करते हैं । लेकिन योगा से आप शारीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने की प्रक्रिया करते हैं । योगा करते समय आप अपने सांसों पर ध्यान लगाते हैं।  पर कसरत करते समय आपको सांसो पर ध्यान नहीं लगाना पड़ता है।
कसरत , व्यायाम  या एक्सरसाइज करने से हमारे शरीर की उर्जा का खपत बहुत तीव्र गति से होता है लेकिन योगा करने से शरीर की ऊर्जा का खपत  (खर्च) धीरे-धीरेहोता है पर ऊर्जा का खर्च होता है
ऊपर लिखे सभी सिद्धांत आज से नहीं  सैकड़ों – हजारों साल से है । पर क्या योगा करने से हम और आप स्वस्थ रह सकते हैं ? क्या योगा सभी लोगों के लिए है ? इन सवालों का जवाब आप अपने दिल से पूछो , आपको जवाब मिल जाएगा । अगर जवाब नहीं मिलता है तो आप को नीचे लिखे मिल जाएगा ।

आप अपने शरीर की गणित को समझने का प्रयास करें । अपने शरीर की विज्ञान को समझने का प्रयास करें । आपका शरीर आपसे क्या कहता है?


आपका शरीर पूर्ण रूप से तभी स्वस्थ रहेगा । जब आपके शरीर में प्रेम की ऊर्जा की मात्रा अत्यधिक रहेगी। जैसे प्रेम ,करुणा , दया , सेवा , मदद और छोटे बड़ों की सम्मान की भावना आप में है तो आप पूर्ण रूप से स्वस्थ रहेंगे ।आपको कोई भी योगा  की जरूरत नहीं । आप जानते हैं कि आपके शरीर में 230 प्रकार का  हारमोंस है पर यह 230 हारमोंस किन परिस्थिति में आपका शरीर हारमोंस  को रिलीज करता है । यह हारमोंस आपका शरीर तभी  रिलीज करता है जब आपके शरीर के अंदर प्रेम की ऊर्जा अत्यधिक मात्रा में सक्रिय होता है  तो ही आप स्वस्थ रह सकते हैं
अगर आपके शरीर के अंदर नकारात्मक ऊर्जा अत्यधिक मात्रा में सक्रिय है तो आप हमेशा बीमार पड़ते रहेंगे । जैसे क्रोध ,गुस्सा ,नफरत, ईर्ष्या ,लोभ लालच की भावना आपके शरीर के अंदर सक्रिय है तो आप हमेशा बीमार होते रहेंगे । बीमार शरीर को स्वस्थ करने के लिए आपको योगा का सहारा लेना पड़ेगा। डॉक्टर का सहारा लेना पड़ेगा । आप जानते हैं जब आपके शरीर में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होता है तो शरीर हारमोंस रिलीज करने के सारे दरवाजे को लॉक कर देता है । बंद कर देता है । जिस वजह से शरीर हारमोंस को  नहीं करता है । इसके लिए हमें योगा या डॉक्टर की सहारा लेना पड़ता है । ताकि हम मैन्युअल रूप से हारमोंस को शरीर से रिलीज करा सकें।

आपको अपने शरीर को ऊर्जा भोजन – पानी और सांस के द्वारा मिलती है । लगभग 10% ऊर्जा आपको भोजन- पानी से मिलता है और लगभग 90% ऊर्जा आपको सांसो के द्वारा मिलता है।

आपको कोई भी काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है ।  सांस लेने के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है , खाना खाने के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है, उठने , बैठने , सोने और चलने  के लिए या मेरे कहने का मतलब कि हर कार्य के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है । यहां तक कि हम अगर सोचते हैं तो सोचने के लिए भी ऊर्जा की जरूरत पड़ती है । भोजन को पचाने के लिए भी ऊर्जा की जरूरत पड़ती है , हाथ- पाव हिलाने के लिए भी ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। सांस लेने के लिए भी ऊर्जा की जरूरत पड़ती है अगर हमारे शरीर में पहले से ऊर्जा का स्टोर न हो तो हम सांस नहीं ले सकते ।

आपके शरीर को दो ही माध्यम से ऊर्जा की प्राप्ति होती है । एक मुंह दूसरा नाक। लेकिन ऊर्जा की खपत शरीर के प्रत्येक अंगों से होती है । जबकि उर्जा की प्राप्ति का रास्ता सिर्फ दो ही है ,और ऊर्जा की खपत का रास्ता अनेकों है।
आपको अपने जीवन में अनेकों काम है सुबह , उठना नहाना, धोना , काम पर जाना , काम करना , वापस घर आना , कुछ पास्ट या फ्यूचर के बारे में सोचना या सोना। यहां तक कि आपको प्रत्येक कार्य के लिए आपको ऊर्जा चाहिए ।अब सवाल यह पैदा होता है कि आप अपने शरीर को ऊर्जा कहां से देंगे जबकि ऊर्जा की प्राप्ति का रास्ता सिर्फ दो है मुंह और नाक । आप कितना खाना खाएंगे या आप  कितना सांस लेंगे । न आप ज्यादा सांस ले सकते हैं और न आप ज्यादा खाना खा सकते हैं ।तो फिर आप अपने शरीर को ऊर्जा कहा देंगे? ज्यादा खाओगे तो बीमार पड़ोगे और ज्यादा सांस लोगे तो बीमार पड़ोगे। तो ऊर्जा  कहां से लाओगे ।
आपके बैंकों खातों में पैसा न हो तो चल जाएगा लेकिन शरीर में उर्जा ना हो तो कभी नहीं चल पाएगा।

उसमें भी आप योगा करेंगे तो आपका क्या हाल होगा आप खुद ही समझ सकते हैं । योगा करने से शरीर की ऊर्जा  खपत होती है । ऐसा नहीं कि ऊर्जा की प्राप्ति होती है। हां यह जरूर है कि ऊर्जा की खपत (खर्च ) धीरे धीरे होती है ।
जैसे गाड़ी में तेल न हो तो आप लंबी यात्रा नहीं कर सकते । ठीक इसी प्रकार जब शरीर में उर्जा का मात्रा अधिक न  हो तो आप कभी भी लंबी जीवन नहीं जी सकते और लंबे समय तक स्वास्थ्य नहीं रह सकते।
आपके बैंक खातों में जितना ज्यादा पैसा होगा वह कभी भी अच्छे या बुरे कामों में आपका मदद कर सकता है ठीक इसी प्रकार आपके शरीर में जितना ज्यादा मात्रा में प्रेम की ऊर्जा जमा होगा तो वह आपके अच्छे या बुरे समय में (बीमारी में) या  हर एक परिस्थिति में ऊर्जा आपके शरीर को मदद  करेगा।  बीमारी से लड़ने के लिए भी आपकी ऊर्जा आपके शरीर को मदद करेगा।

आप जानते हैं कि इस धरती पर मनुष्य को छोड़कर कोई भी प्राणी योगा नहीं करता सिर्फ मनुष्य ही है जो अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगा करता है। पशु ,पक्षी , पेड़ पौधे या कीड़े मकोड़े कोई भी योगा नहीं करता,  अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए । फिर भी वह सब स्वस्थ है।  उनका कोई डॉक्टर हॉस्पिटल नहीं। आखिर क्यों स्वस्थ है ?  मनुष्य योगा करता है,।  फिर भी आज मनुष्य बीमार है । डॉक्टर की  हर गली मोहल्ले या चौराहे पर  क्लीनिक मिल जाएगा , हॉस्पिटल मिल जाएंगे । ऐसा क्यों? ? क्योंकि जब से मनुष्य धरती पर आया है तभी से लेकर आज तक मनुष्य नकारात्मक ऊर्जा से ग्रसित रहा है जर, जोरू और जमीन के लिए सदियों से लड़ता रहा और लड़ता आ रहा है । प्रेम क्या होता है ? आज मानव प्रेम का मतलब ही भूल चुका है ।यही वजह है कि आज सारा मनव तंत्र बीमार हो चुका है।

अगर आप अपने जीवन में आखरी समय तक स्वस्थ रहना चाहते हैं तो 3 सूत्रीय कार्यों को अपने जीवन में धारण करें पहला खुद से प्रेम करें, दुसरा अपन परिवार के सारे सदस्यों से प्रेम करें, तीसरा आपके पड़ोस में रहने वाले सभी पड़ोसी  से प्रेम करें ।वह चाहे किसी भी जात धर्म का क्यों न हो । सभी से प्रेम करें तो आप कभी भी बीमार नहीं पड़ेंगे। अगर आप बीमार हैं तो आप तीन सूत्रीय कार्यो को अपने जीवन में धारण करे तो बहुत जल्द ही आप बीमारी से मुक्त हो जाएंगे ।  चाहे वह बीमारी कैसा भी क्यों न हो ।

Note :- अगर आप बीमार हैं तो सबसे पहले आप अपने डॉक्टर के संपर्क में रहे और दूसरा  अपने जीवन में तीन  सूत्रीय  कार्यो (जैसे खुद से प्रेम , परिवार के सारे सदस्यों से प्रेम और अपने सारे पड़ोसियों से प्रेम करें ) को अपने जीवन में धारण करें तो बहुत जल्द ही आप अपने सारी बीमारियों से मुक्त हो जाएंगे ।

अगर आप लंबी जीवन जीना चाहते है। स्वस्थ रहना चाहते है तो योगा आपके लिए योगा किसी काम का नहीं और न ही बीमार लोगों के लिए योगा उपयोगी है ।  हम योगा क्यों करूं ? किस लिए योगा करूं ?  योगा करने के लिए भी हमें ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। योगा करने में ऊर्जा की खपत होती है ।जब हम बिना मतलब का किसी को ₹1 नहीं देते हैं तो हम अपने शरीर की ऊर्जा बिना मतलब का क्यों खर्च करू क्योंकि यही शरीर की ऊर्जा हमारी जीवन है


बैंक में पैसा न हो तो आप कंगाल हो जाएंगे और आपके शरीर में ऊर्जा न हो तो आपका शरीर बेकार हो जाएगा।

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पाप या पुण्य क्या है / पाप या पुण्य का काम कोई नहीं करता , बल्कि अपने आप होता है /What is sin or virtue /Nobody does sin or virtuous action, but it happens on its own

पाप और पुण्य हमारे मन का भाव है जिस प्रकार देव कर्म और दानव कर्म होते हैं या जिस प्रकार से सुख दुख का अनुभव हम लोगों को होता है । यह सब मन का भाव है । पाप और पुण्य का सरल परिभाषा है कि जो काम हम खुलेआम करते हैं वह पुण्य कर्म है और जो काम हम छिप कर करते हैं वह पाप कर्म है ।

लेकिन पाप या पुण्य का कर्म कोई करता नहीं , वह अपने आप होता है ।इसे आप समझने का प्रयास करें कोई भी व्यक्ति पाप कर्म नहीं करता । जैसे चोर चोरी नहीं करता । वह अपने आप होता है। अपराधी हत्या या रेप नहीं करता । वह होता है । इसको आप समझें कि आपका दिमाग ऑटोमेटिक है वह आपसे काम करवाता है और आप काम करते हैं । जैसे क्रोध या गुस्सा आपको आता है । यह क्रोध या गुस्सा अपने आप आता है । आप क्रोध या गुस्सा करते नहीं । क्रोध या गुस्सा आपके बस में नहीं था । अगर बस में होता तो आप क्रोध या गुस्सा नहीं करते । कोई हत्या नहीं करता । ऐसा क्यों होता है ?

जब तक आपकी आत्मा सोई हुई है , मूर्छित है । अगर चित्त की दशा मूर्छित है , चेतना सोई है । ऐसे व्यक्ति जो भी काम करेगा वह पाप ही करेगा । ऐसे व्यक्ति को आप गाली दो तो बदले में वह भी आपको गाली से जवाब देगा । यह भी हो सकता है कि वह आपके ऊपर हाथ भी छोड़ दे । अगर उसके बस में होता तो उसे रोक सकता था । गाली देने से बच सकता था । पर ऐसा नहीं होता । उसके बस में नहीं था । उसको सामने वाला गाली दिया तो बदलें में उसने भी उसको गाली दिया । कोई सोच विचार करके किसी को गाली नहीं देता है । यह अपने आप होता है। इसे कोई करता नहीं । करना या होना , दोनों के बीच जमीन आसमान की दूरी है । यह अपने आप होता हैं जब भी चित की दशा मूर्छित हो या आत्मा सोई हो ऐसे व्यक्ति जो भी काम करेगा वह पाप ही काम करेगा । भले ही वह हजारों लोगों को खाना खिलाता हो, दान करता हो , मंदिर मस्जिद बनवाया हो। आपको दिखने में लगेगा कि वह अच्छा काम करता है पर उसका पाप का बाप उसके अंदर ही छुपा रहता है। यस का , नाम का , धन दौलत का पाप उसके अंदर छिपा होता है । यह मंदिर मस्जिद के दीवारों पर उसका नाम लिखा आपको देखने को मिल जाएगा । अखबारों में , टेलीविजन पर उसका नाम आपको दिख जाएगा ।
ठीक इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति जैसे संत महात्मा पुण्य का काम नहीं करता उससे पुण्य का काम अपने आप होता हैं । कोई करता नहीं । सुकरात को जहर दिया गया । उसने हंसते हंसते स्वीकार किया । उसके बदले में उसने जवाब नहीं दिया । जीसस को सूली पर चढ़ा दिया गया । उनसे अंतिम इच्छा पूछी गई । उसने कहा , हे परमात्मा इन्हें क्षमा कर दें ।इन्हें यह पता नहीं, यह क्या काम कर रहे हैं । जिसकी चित्त की दशा अमूर्छित हो , चेतना जागृत हो , ऐसे व्यक्ति से जो भी काम होगा , वह पुण्य का काम ही होगा । उनसे ऐसे ही कार्य अपने आप होते हैं । उसके लिए उन्हें को सोचना विचारना नहीं पड़ता । आपने सुना होगा यूनान का गुरजिएप नाम का एक फकीर था उसे बाजार में पकड़ कर हजारों गालियां दी गई । पर उसने गाली का जवाब नहीं दिया।उसने कहा इसका जवाब मैं कल दूंगा । उन लोगों ने कहा मैं अभी आपको गाली देता हूं आप कल जवाब देंगे इसका क्या मतलब हुआ । उसने कहा अगर जरूरत हुई तो इसका जवाब दूंगा । अगर जरूरत नहीं हुई तो इसका जवाब नहीं दूंगा ।

या आप महावीर के जीवन को देखें तो आपको बहुत कुछ समझ में आने लगेगा । महावीर को पत्थरों से मारा गया फिर भी उसने पत्थरों का जवाब नहीं दिया । बुद्ध करुणा के पुजारी थे । उनके कर्म से करुणा बहा करती थी । ऐसे लोगों की आत्माएं जागृत होती है । जिन लोगों का चित अमूर्छित होता है । उनसे ऐसे कर्म अपने आप होते हैं । उन्हें करना नहीं पड़ता ।
आप जानते होंगे कि महात्मा गांधी जी ने एक बार एक गाय के बछड़े को जहर दिया ।आपको लगता होगा कि उसने पाप किया । गाय के बछड़े को मारने का पाप गांधी को लगा , लेकिन आप उनके अंतर्मन में झाकर देखे तो आपको पता चलेगा कि वह बछड़ा बहुत तकलीफ में था। उसे बचाए जाना मुश्किल था। गांधी जी के बस में नहीं था कि बछड़े को बचा सके । इसलिए उसने बछड़े को जहर दिया ताकि उसकी तकलीफ कम हो जाए । अब आप इसे क्या कहेंगे कि गांधी जी ने पाप किया । आपको दिखने में लगेगा कि गांधी जी ने पाप कर्म किया । लेकिन वह पुण्य कर्म था। आत्मा की जागृत अवस्था में किया गया कोई भी कर्म पुण्य कर्म ही होता है ।
आत्मा की जागृत अवस्था में ऐसे कार्य होता है , कोई करता नहीं। चित्त की दशा जागृत हो तो ऐसे कर्म अपने आप होते हैं । इसे करना नहीं पड़ता । जिस व्यक्ति का चित जागृत अवस्था में होता है । वह चाहे जो भी काम करेगा , वह पुण्य कर्म ही करेगा ।

अगर आप इसे बदलना चाहे तो आप ऊपर लेवल से कभी नहीं बदल सकते हैं । आपको बहुत गहरे में जाना होगा। आत्मा के लेवल पर जाना होगा तो ही आप पाप को पुण्य में बदल सकते हैं । जैसे आपने आम का पेड़ लगाया तो आपको आम का फल ही मिलेगा , सेव का नहीं ।आप चाहे कितना भी उस पेड़ का सेवा करें । उस पेड़ से आपको आम ही मिलेगा , सेव नहीं । सेव के लिए आपको बहुत गहरे में जाना होगा । बीच के रूप में जाना होगा । सेब का बीज आपको लगाना होगा तभी आपको सेव का फल मिलेगा। कोई भी महान कार्य आत्मा की जागृत अवस्था में होती है चित्त की अमूर्छित अवस्था में ही पूरा होता है ।
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गांधीजी के तीन भूत और 142 करोड़ मूर्दो का देश चीन/ Gandhi’s three ghosts and 142 crore dead country of China

 

मेरे दोस्त, आप कैसे हो ? मैं आशा करता हूं कि आप सभी लोग अच्छे होंगे ।
गांधीजी के तीन बंदर या तीन भूत क्या है और 142 करोड़ों मुर्दो का देश चाइना क्यों है । तो चलिए इस विषय पर आपसे अपनी मन की बात करता हूं । आप जानते हैं गांधीजी के तीन बंदर या तीन भूत है ।  जो न बुरा देखता है ,  न बुरा सुनता है और न बुरा बोलता है। प्रकृति या ईश्वर ने मनुष्य को आंख , कान और मुंह किस लिए दिया है । इसलिए दिया है अगर कहीं पर किसी समय अच्छे कार्य हो रहे हो , पुण्य कार्य हो रहे हो , या सेवा , मदद का कार्य हो रहे हो या लोग आनंद और खुशियां मना रहे हो इस क्षण को लंबा करने के लिए प्राकृतिक ने मुंह दिया ताकि आप सभी लोग अपने मुंह के द्वारा और भी लोगों तक इस खुशी को पहुंचा सको ,  कानों के द्वारा दूसरे लोगों को सुना सको , आंखों के द्वारा लोगों को अच्छे कार्य दिखा सको । लेकिन आज मनुष्य बिना आंख , कान , मुंह के पैदा होने लगे हैं यही कारण है कि आज मनुष्य गांधीजी के तीन बंदरों के समान हो गए हैं ।  न अच्छा देखना चाहते हैं , न अच्छा बोलना चाहते हैं और न अच्छा  सुनना चाहते हैं । इसका उल्टा ही आज का मनुष्य अपना कार्य करता है । बुरा देखना , बुरा सुनना , बुरा बोलना आज के मनुष्यों का जन्मसिद्ध अधिकार बन गया है । आखिर क्यों? खुदा ने आंख , कान और मुंह मनुष्य को क्यों दिया है। आप खुद सोचो ,  विचार करो ।
और हां दोस्तों 142 करोड़ मुर्दों का देश चाइना क्यों है ?  आज पूरी दुनिया में कोरोनावायरस का खौफ की  महामारी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है । कोरोनावायरस ने अब तक ४.५ लाख से ज्यादा लोगों का जीवन खा गई और लगभग  9५ लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी से संक्रमित हैं। चारों तरफ डर और भय का माहौल बना हुआ है। लोग अपने अपने घरों में छिपे हुए हैं । सारे उद्योग धंधे बंद पड़ी है । मंदिर मस्जिद के सारे देवी , देवताओं , अल्लाह , जीसस और  नानक सभी भागे हुए हैं । सभी देवी ,देवता अपने अपने घरों में छिपे हुए हैं। क्यों ? आखिर क्यों ? आज कुछ देशों की सरकार ने अपने यहां लॉकडाउन को खोल दिया है । लॉकडाउन खुलने से कोरोनावायरस बहुत तेज गति से बढ़ रहा है ।जैसे जंगल में आग फैलता है । वैसे ही आज कोरोनावायरस चारों तरफ फैल रहा है।  इस वायरस का जन्मदाता कौन है ? आप सभी जानते हैं । चीन कोरोनावायरस का जन्मदाता है । शी जिनपिंग की सरकार ने कोरोनावायरस को प्राकृतिक आपदा कहती है । अगर  कोरोनावायरस प्राकृतिक आपदा है तो क्यों चाइना अपने लैब को किसी देश को जांच करने नहीं देती ? क्यों चाइना कोरोनावायरसना का डाटा विश्व से छुपाए रखी? आज पूरी मानव जाति डर और भय के साए में अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं । चीन की 142 करोड जनता की आंख , कान और मुंह होते हुए भी चाइना का एक भी नागरिक अपने देश की सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ विरोध नहीं किया । इसका क्या मतलब होता है , यही न कि चाइना देश के लोग मुर्दा हैं उनमें जान नहीं और न उनमें मानवता के प्रति प्रेम संवेदनाएं नहीं या चाइना की जनता अपनी सरकार से डरती है , डरपोक कायर है । जबकि कोरोनावायरस से चीन में भी हजारों लोग मारे गए। अगर यही कोरोनावायरस का जन्मदाता कोई और देश होता तो चीन में भी लाखों लोग मरते फिर क्यों चीन की जनता चुप बैठी है क्यों अपने देश की सरकार के विरुद्ध आवाज तक नहीं उठाती। क्या वे मुर्दे हैं ? क्या चीन की जनता शक्तिहीन है। अगर आज मानव की मानवता जीवित रहती है तभी मानव धरती पर लंबे समय तक उसका अस्तित्व बना रह सकता है , अन्यथा नहीं । जैसे धरती से डायनासोर प्राणी गायब हो गए , ठीक इसी प्रकार मानव भी धरती से गायब हो जाएगा । अभी भी समय है जागो , अपनी आंखें खोलो , अपने चारों तरफ देखो क्या हो रहा है। अगर कहीं गलत होता है तो उसका विरोध करें और अच्छा होता है तो उसे अपने अंदर ग्रहण करें । उसका प्रचार करें , उसे अपना सहयोग दें , उसका समर्थन करें । ताकि मानव की मानवता जीवित रहे और चाइना वासियों में भी जन जागृति पैदा हो । अगर कहीं बुरे कार्य होते हो तो उस कार्यो का आप विरोध करें ।बुरे कार्यों के प्रति अपना विरोध प्रदर्शन करे ।

अगर आप गलत कार्यों का विरोध करना नहीं चाहते हैं और अच्छे कार्यो या विचारों को ग्रहण करना नहीं चाहते हैं तो आप न करें । सिर्फ खुद से प्रेम करें , अपने परिवार से प्रेम करें और अपने आसपास के लोगों से प्रेम करें । सिर्फ आप इतना ही करें तो मानव कि मानवता अपने आप जीवित होने लगेगी । आपका प्रेम की उर्जा ही आपका सारा कार्य कर देगी । जहां आप नहीं पहुंच सकते हैं , वहां आपकी प्रेम की उर्जा पहुंच जाएगी । अगर आपको अमेरिका जाना हो तो आपको पैसा , विज्जा या पासपोर्ट की जरूरत होगी , तभी आप अमेरिका जा सकते हैं अन्यथा नहीं। लेकिन अगर आपके प्रेम की उर्जा को अमेरिका जाना हो या किसी देश में ट्रैवल करना हो तो उसे न पैसों की जरूरत , न विज्जा की जरूरत , न पासपोर्ट की जरूरत है और न कोई भी भौतिक पदार्थ की जरूरत है। यह चारों तरफ है धरती के हर जगह , हरेक पदार्थो में है । ऐसा कोई जगह ख़ाली नहीं जहां उर्जा का अस्तित्व न हो ।धरती हो या ब्रह्मांड सभी जगह ऊर्जा का अस्तित्व है ऐसा कोई जगह खाली नहीं जहां ऊर्जा का अस्तित्व न हो । इसके लिए आपके शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का सक्रिय होना बहुत जरूरी है ।

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मौत कब आती है ?(When does death come? )

जिंदगी और मौत का फासला जमीन और आसमान के समान है । एक स्वस्थ व्यक्ति को अपनी मौत को बुलाना पड़ता है और बीमार व्यक्ति को मौत बिन बुलाए आती है । Yes या No