प्रेम क्या है ? / भय और प्रेम में क्या अंतर है? / what is love ? /What is the difference between fear and love?

प्रेम क्या है ? प्रेम का बहुत ही साधारण simple परिभाषा है जहां समस्याएं नहीं होती है वहां प्रेम होता है और जहां समस्याएं होती है वहां भय  होता है। प्रेम और भय में क्या अंतर है ? चलिए  प्रेम और अप्रेम के विषय में जानते हैं । दोनों में क्या अंतर है? दोनों में जमीन आकाश का अंतर है । जहां भय समस्याएं को पैदा करती है। वही प्रेम सारी समस्याओं को खत्म करता है ।

भय  :–   जब से मनुष्य का धरती पर आगमन हुआ है , तब से लेकर आज तक मनुष्य का जीवन ,भय के केंद्र पर खड़ा है।पूरा मनुष्य जाति भय, चिंता, दुख, पीड़ा से पीड़ित है। मनुष्य हमेशा से भयभीत रहा है और भय, चिंता, दुख और पीड़ा के ऊपर मनुष्यों का अपना जीवन खड़ा है । भय के कारण मनुष्य मंदिर , मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा में पूजा अर्चना करता है। नमाज पढ़ा करता है। प्रार्थना करता है ।

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भय  आदमी के भीतर क्रोध और लोभ- लालच पैदा करता है। क्योंकि वह हमेशा सोचता रहता है। यह मिल जाए । वह मिल जाए। धन मिल जाए। पद मिल जाए। भगवान मिल जाए। स्वर्ग मिल जाए। ताकि किसी भी दुख पीड़ा से बच जाए। चिंता से बच जाए।

हमारा देश , हमारा राष्ट्र, हमारी देश भक्ति, हमारी राजनीति , हमारा धर्म और हमारा फौज यह सब हमारे भय पर खड़ी है। अकाश में लहराता हमारा झंडा भय प्रतीक है। धर्म या मजहब  सभी भय का प्रतीक है।

मनुष्य जाति दो तरह से भय पैदा करते हैं। एक भय को पैदा करती है ताकि लोगों का शोषण किया जा सके और फिर भय पैदा हो जाने पर उस भय को बचाने के लिए जड़ता पैदा की जाती है । ताकि आदमी भय से कहीं मर ना जाए ।

आप सैनिकों को ही देख लीजिए। कोई भी सैनिक अभय को उपलब्ध नहीं होता । सिर्फ उसकी बुद्धि को जड़ किया जाता है। उसकी संवेदनाएं कम कर दी जाती है । ताकि उसे भय का कोई बोध न हो । जड़ बुद्धि वाले लोग  भयभीत नहीं होते । तभी तो सैनिक, सैनिक को मारते हैं । हत्या  करते समय उनके भीतर किसी भी तरह का दया धर्म नहीं होता । संवेदनाएं नहीं होती। हत्या ।  सैनिक भय का प्रतीक है। भय से बचने के लिए सैनिकों का निर्माण किया गया है।

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आज सारी दुनिया का बागडोर भयभीत लोगों के हाथों में है। विश्व का कोई भी राजनीतिज्ञ  विश्व में शांति नहीं ला सकता है। क्योंकि राजनीति के सारा केंद्र भय पर खड़ा है और न ही कोई धर्मगुरु विश्व में शांति ला सकता है। क्योंकि धर्मगुरु का केंद्र भी भय पर खड़ा है। यही वजह है कि आज सारी दुनिया भय से त्राहिमाम कर रही है। भय की वजह से सारी दुनिया खंड खंड में बैठी हुई है।

जहां भय होता है , वहां घृणा पैदा होती है । जहां भय होता है , वहां हिंसा , क्रोध और लोभ लालच पैदा होता है । जहां भय होता है , वहां नफरत पैदा  होती है । जहां भय होता है , वहां बीमारियां पैदा होती है । जहां भय होता है , वह नई नई समस्याएं पैदा होती रहती है । जहां भय होता है , वहां कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस का निर्माण होता है । कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस यह सभी भय के आधार पर खड़ी है । भय सदा बीमारी को फैलाता है । भय आपको सदा निर्धन बनाए रखती है । जहां भय होता है , वहां सदा लोग भूख और बीमारी से मरते हैं ।जहां भय होता है , वहां बड़े-बड़े विनाशकारी हथियारों का निर्माण होता है जैसे परमाणु बम या हाइड्रोजन बम etc जहां भय होता है , वहां डॉक्टर ,  वैद्य , हकीम और हॉस्पिटल पैदा होने लगता है । आपके आसपास में डॉक्टर है । हॉस्पिटल है । यह सब भय के कारण है । भय का आधार ही होता है कि आप सदा बीमारी , परेशानी  या दुख चिंता से घिरे रहे । डॉक्टर हॉस्पिटल का चक्कर लगाते रहे ।थाना पुलिस , कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाते रहे । जहां भय होता है , वहां तलाक का जन्म होता है । जहां भय होता है , वहां दहेज दानव पैदा होने लगते हैं ।

आज कोरोनावायरस का फैलने का मुख्य कारण हमारा भय है । किसी न  किसी रूप में हम सब भयभीत हैं । तभी आज कोरोनावायरस इतनी तेज गति से फैल रहा है । भय मनुष्य के शरीर की इम्युनिटी पावर को कम कर देता है । भय युद्ध को जन्म देता है । भय  बिना कारण युद्ध कराता है ।  जिस वजह से एक देश दूसरे देश से लड़ता है । भाई – भाई आपस में लड़ते हैं । एक पड़ोसी दुसरे पड़ोसी से लड़ता है । पति पत्नी आपस में लड़ते हैं । बाप बेटा आपस में लड़ते हैं । इस सब भय का अंग है । यह सब भय पर खड़ा है । किसी भी देश की व्यवस्था सब भय पर खड़ी है ।

मैं आपसे कहना चाहता हूं कि ऊपर जो तस्वीर कपल्स का है । वह प्रेम का प्रतीक नहीं है । प्रेम जीवन देता है ,  जीवन लेता नहीं है । इन कपल्स के बीच प्रेम का फूल कभी खिलता नहीं । क्योंकि यह लोग प्रेम की वजह से आपस में जुड़ते नहीं हैं इनका जुड़ाव इनके शरीर की मैग्नेटिक फील्ड की वजह से एक दूसरे के करीब आते हैं । जैसे शरीर को भोजन की जरूरत पड़ती है ठीक इसी प्रकार शरीर को सेक्स की जरूरत पड़ती है । प्रकृति का नियम अनुसार जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया सदा  चलता रहे । इसलिए उनके शरीर की बनावट इस प्रकार किया गया है ताकि कपल्स आपस में संबंध स्थापित कर सकें और जन्म मृत्यु की प्रक्रिया चलता रहे । लेकिन उनका यह प्रेम नहीं है । अगर उनका प्रेम होता तो आज अमेरिका में लगभग 40% लव मैरिज करने के बाद उनका तलाक हो जाता है । आखिर क्यों ? जबकि तलाक भय का प्रतीक है । विकसित देशों में लव मैरिज एक दो साल के अंदर ही उनका   तलाक हो जाता है । आप यह कभी न सोचिए गा कि जो कपल्स आपस में प्रेम करते हैं । उनके भीतर कभी प्रेम का फूल खिल नहीं सकता ।

प्रेम :- क्या आप जानते हैं कि अगर आदमी के अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए तो क्या होगा । कभी आपने यह सोचा । आपको एक छोटी सी बात बताना चाहता हूं कि शायद आपको प्रेम का मतलब समझ में आ जाए । प्रेम में कितनी ताकत है।

कल तक मालुम नहीं था कि अणु और परमाणु क्या है ? पर आज ऐसी बात नहीं है । एक छोटे से अणु में कितनी ऊर्जा होती है। एक अणु में कितनी शक्ति होती है । अगर हम अणु का विस्फोट करते हैं तो उसमें अनंत शक्तियों का जन्म होता है। एक के छोटे से रेत के कण के अणु में इतनी ताकत है कि एक बड़ा महानगर जैसे मुंबई , दिल्ली जैसे शहर को नष्ट किया जा सकता है।

हाइड्रोजन के एक अणु से मुंबई जैसे महानगरों को क्षन भर में राख किया जा सकता है । तो आप समझ सकते हैं कि एक मनुष्य में कितनी ताकत हो सकती है जब पानी की एक बूंद में या हाइड्रोजन के अणु में इतनी ताकत है। तो मनुष्य के अंदर कितनी ताकत हो सकती है। जब उसके अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए।

हम सब के भीतर प्रेम का बीज पड़ा हुआ है । वह बीज , बीज ही रह जाता है । अंकुरित कभी नहीं हो पाता । क्योंकि उसे भूमि , पानी और रोशनी नहीं मिल पाती है। उस प्रेम रुपी बीज के भीतर दर्द , कसक और पीड़ा रह जाता है । जो उसे होना चाहिए था , वह नहीं हो सका ।

जिस तरह पौधे पर फूल नहीं आता तो उस पौधे को देखिए कैसे वह मुरझाए सा कुम्हलाए सा दिखता हैं । ठीक इसी प्रकार आदमी के भीतर भी प्रेम रूपी बीज है। और वह अगर न खिले तो चिंतित हो जाता है। उसका चेहरे लटक जाता है । उसका पूरा व्यक्तित्व मुरझा जाता है। ऐसे ही आज सारी मनुष्यता का व्यक्तित्व मुरझा गया है ।

कभी आपने अपने आप से पूछा कि मेरी सबसे अधिक गहरी प्यास क्या है ? क्या धन , पद , मोक्ष या परमात्मा । आपको इसका जवाब भीतर से आएगा सिर्फ प्रेम । प्रेम  दो और प्रेम लो । प्रेम देना ही मनुष्यों का जन्मसिद्ध अधिकार है ।

जिस दिन मनुष्य के अंदर प्रेम का पूरा फूल खिलता है। तो वह परमात्मा को उपलब्ध हो जाता है । प्रेम परमात्मा का द्वार है। लेकिन हमें कभी प्रेम का ख्याल भी नहीं आता । प्रेम को कैसे विकसित करें । प्रेम का फूल खिलना बहुत जरूरी है । प्रेम के बिना पूरी मनुष्यता नष्ट हो सकती है ।

जहां प्रेम है , वहां आनंद और खुशियां है । जहां प्रेम है, वहां शांति पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां करुणा पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां दया पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां सौंदर्य पैदा होता है । जहां प्रेम है, वहां स्वर्ग जाने का रास्ता मिल जाता है । जहां प्रेम है, वहां सरहद का कोई दीवार नहीं होती । जहां प्रेम है, वहां कभी युद्ध नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां डॉक्टर , वैद्य और हकीम दिखाई नहीं पड़ते । जहां प्रेम है , वहां कोई हॉस्पिटल दिखाई नहीं पड़ता । जहां प्रेम है , वहां थाना- पुलिस , कोर्ट – कचहरी नहीं हुआ करता । जहां प्रेम है, वहां किसी प्रकार का समस्या का जन्म नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां मंदिर मस्जिद की जरूरत नहीं पड़ती है ।

जो व्यक्ति चाहता है कि अपने जीवन में प्रेम का फूल खिलाना तो उसे प्रेम मांगने का ख्याल छोड़ देना होगा । आपका ध्यान हमेशा प्रेम देने का ख्याल होना चाहिए । आप प्रेम देते हैं तो आपको अंदर प्रेम का फूल खिलता है ।

प्रेम मांगने से प्रेम का बीज सिकुड़ जाता है । उसका बीज का खोल और अधिक कड़क हो जाता है । आप जानते हैं भीखमंगे से ज्यादा किसी का ह्रदय सिकुड़ा नहीं होता । जो मांगता है, वह सिकुड़ जाता है । जो प्रेम देता है या जो प्रेम देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाता है तो उसका दिया हुआ प्रेम का दान कई गुणा बढ़ कर उसके पास वापस आ जाता है ।

आपने देखा होगा कि बीज जब अंकुरित होता है तो क्या कहता है ? बीज अंकुरित होता है । तो उसकी पत्तियां निकलती है । उसकी शाखाएं बीज से बाहर की ओर निकलती आती है और फिर फूल खिलने लगता है । एक बीज की क्रिया अंदर से बाहर की तरफ होती है । ठीक इसी प्रकार आपको भी अपने अंदर का प्रेम बाहर की तरफ निकालना होगा । तो आपके अंदर का बीच का खोल टूट जाएगा फिर आपके अंदर प्रेम का रस बहना शुरू हो जाए।

प्रेम का पहला सूत्र है कि आप प्रेम का दान करें । दूसरा सूत्र है कि आप प्रेम का दान बिना शर्त करें । हमने प्रेम दिया नहीं और हम प्रेम पाना चाहते है । इससे आपका प्रेम का बीज का खोल कभी टूट नहीं सकता । प्रेम का तीसरा सूत्र है कि जब आप प्रेम किसी को देते हैं या किसी का सेवा मदद करते हैं तो आप उसका कृतज्ञता जाहिर करें तो इससे आपके अंदर प्रेम का बहाने का मौका मिलता है ।

मेरा कहने का मतलब कि आप किसी का मदद करते हैं या किसी का सेवा करते हैं तो उसके लिए आप कृतज्ञता जाहिर करें । यह नहीं कि वह आपको धन्यवाद दे। बलिक आप उसे धन्यवाद दें । मैं कृतज्ञ हूं। मैं अनुग्रहित हूं । उसके प्रति अपने अंदर अनुग्रह के भाव को अपने अंदर जागृत करें । आपके अंदर प्रेम की बीज चोट पहुंचती है । जिससे प्रेम रूपी बीच का खोल टूट जाता है और आपके जीवन में प्रेम का फूल खिलने लगता है और वह विकसित होने लगता है ।

जिस दिन प्रेम का झरना आपके अंदर बहने लगा । उसी दिन आपको मालूम चलेगा कि भय कहीं भी नहीं है । प्रियम की अनुपस्थिति में या गैरमौजूदगी में आपके भीतर भय सक्रिय हो जाता है । यही आपका भय आपके तन , मन और धन सब को बीमार कर देता है । आंखों से न दिखने वाला कोरोनावायरस का आप शिकार हो जाते हैं और आपकी यूनिटी पावर कम हो जाता है और आप बीमार हो जाते हैं ।

प्रेम से भरा हृदय में भय का कोई स्थान नहीं होता , भय से भरा हृदय में प्रेम का कोई स्थान नहीं होता ।

जब आप अंदर प्रेम से भर जाते है तब आपको अपने हाथ में तलवार उठाने की कोई जरूरत नहीं होती । क्योंकि सब जगह आपको राम , खुदा, जीसस और वाहेगुरु दिखाई देने लगते हैं। वही आपके अंदर हृदय भय से भरा है तो सारा जगत आपको शत्रु नजर आने लगता हैं । आपके अंदर ह्रदय प्रेम से भरा होता है तो सारा जगत आपको अपना मित्र नजर आने लगता है ।

जो अंदर होता है वही बाहर आता है । आपके अंदर प्रेम है तो आप प्रेम का दान करेंगे । अगर आपके अंदर भय है, तो आप भय का दान करेंगे । आप जो अंदर है वही बाहर प्रगट होता है


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2 thoughts on “प्रेम क्या है ? / भय और प्रेम में क्या अंतर है? / what is love ? /What is the difference between fear and love?

  1. भय बोले तो डर लगे
    मानव डर से डरे यहा
    आप खहो अपराध करे
    मानव डर के कारण करे यहाँ।।

    मानव जीवन प्रेम आए
    प्रेम कराए लोभ यहाँ
    लोभ कराए अपराध सदा
    अपराध ही डर पैदा करे यहाँ।।

    ओर कोई वजह नही
    इंसान खोने से सदा डरा
    वही डर इंसानी फितरत
    अपराध कराए वो डर यहाँ।।

    आप बोलो मानव उत्पति
    सेक्स कारण हुई यहाँ
    भूल आपकी बहुत बड़ी
    जानवर वँशवर्दी करे यहाँ।।

    मानव उत्पती चाहे मोक्ष
    भटक गया मानव यहाँ
    याद करो अत्तित को आप
    हर घर में तपस्वी था यहाँ।।

    तप करता मानव सदा
    प्रभु दर्शन देता यहाँ
    भक्ति बड़ी,शक्ति छोटी
    सिद्ध मानव करता यहाँ।।

    माना आज बदली धारणा
    बदला माहौल आज यहाँ
    सँगत बदल गई मानव की
    सँगत मशीनों की है यहाँ।।

    मर गई सवेदनाए उसकी
    मर गई भावनाए यहाँ
    आप भी छोड़ ना सको सँगत
    सँगत मशीनों की यहाँ।।

    जैसी सँगत वैसी रंगत
    सत्य धारणा हैं यहाँ
    बदलो सँगत बनो इंसान
    खुद आपको दिखे यहाँ।।

    ना छोड़ सकते आप कभी
    ना अब बदल सको खुद को यहाँ
    तो गीत गाना छोड़ो डर का
    सब समय पर छोड़ो यहाँ।।

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