353 जेलो का मतलब 353 देश है ।गूगल रिपोर्ट के अनुसार आज इस धरती पर 353 देश और मानव की जनसंख्या लगभग 7.5 अरब है । जैसे -जैसे मानव विकास करता जा रहा है वैसे -वैसे वे अपने लिए छोटे छोटे जेल का निर्माण करता जा रहा है यानी की छोटे छोटे देश का निर्माण करता जा रहा है ।
1 :-जेल दो प्रकार के है
वर्तमान मे जेल दो प्रकार के है । पहला जेल अपराधीयों के लिए बनाया गया है । जिसमें जेलर और पूलिस दोनो होते है । दूसारा जेल इंसाने अपने लिए बनाया है । जिसे देश कहते है । इस जेल में कोई जेलर और पूलिस नहीं होता है फिर भी कोई कैदी जेल तोडकर बाहर भाग नहीं पाता । जिस जेल में पूलिस और जेलर दोनों है वहां कैदी जेल तोडकर बाहर भाग जाते है । पर इंसान इतना कमजोर कैसे हो गया ? जबकि पूरी धरती इंसानो की है । फिर इंसान कमजोर और असहाय हो गया है ।आज हर देश की सरहद की दीवारें इतनी मजबुत है कि किसी भी देश के गरीब मजदूर नागरिक को अपनी रोजी रोटी के लिए अपने देश के अलावा किसी दूसरे देशों मे जा नही सकता । भले ही वो गरीब मजदूर भूखा – प्यासा मर जाए क्योकीं प्रत्येक देश की सरहद और दीवारे अपने यहां आने की इजाजत नहीं देती है । इसे आप क्या कहेंगे जेल ?
2:-धरती माॅ की आजादी
जब हमारी धरती माॅ आजाद नहीं हुई तो उसकी बेटीयां कैसे आजाद हो सकती है । धरती माॅ का आजाद होने का मतलब है कि सभी देशों का सरहद मिट जाना यानी की सरहद का खत्म हो जाना। कोई भी मनुष्य किसी भी देश में बेरोक टोक के आ जा सके । आप जानते है की 353 देशों की माॅ को जन्म देने वाली हमारी धरती माॅ ही है । पर कोई धरती माॅ की जयकारा नहीं करता वो कोई मनुष्य हो , राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता हो ,धार्मीक या समाजीक संगठन के कार्यकर्ता हो ,पर कोई धरती माॅ के प्रति कृत्ज्ञता जाहीर नहीं करता ।भारतवासी भारत माता की जयकारा करते है , अमेरिकावासी अमेरिका का ,जापानवासी जपान का , चीनीवासी चीन का , वो चाहे किसी भी देश का नागरिक हो वह अपने ही देश की माॅ का जयकारा करता है पर धरती माॅ की नहीं ।अगर सभी मनुष्यों के अंदर धरती माॅ के प्रति सम्मान , आदर और कृत्ज्ञता होती तो प्रत्येक देशों की उसकी अपनी सरहद नहीं होती और न ही इतने अधिक विनाशकारी हथियार और परमाणु बंम का अविष्यकार होता ।
3:- बाजार का खुलना
आज का मानव समाज अपने लिए सुख सुविधा के सारे चिजों का बाजारो को खोलता जा रहा है पर अपने लिए सारे चिजों की बाजार का बंध करता जा रहा है ।आप देखो , पेड – पोधो , पशु – पक्षी, किडे – मकोडे हर चिज का बाजार खुला है । कुछ भी खरीद सकते है , निर्जीव वस्तुयें , सजिव वस्तुयें कुछ भी खरीद सकते है । किसी भी देश की सजिव और निर्जीव वस्तुये आराम से किसी और देशों में बिक रहें है । कहीं कोई रोक टोक नहीं । पर मनुष्यो के लिए पाबंदी लगी हुई है । गरीब मजदुर अपना देश छोड कर किसी और देशों में अपनी रोजी रोटी के लिए जा नहीं सकते । इसे आप क्या कहेंगे जेल ?
4:- उद्योगपति , समाजीक , धार्मीक , राजनीतिक संस्थान
एक उद्यगपति अपने कारोबार के लिए एक देश से दूसरे जा रहे है, अपने कारोबार को बढाने के लिए । उद्योगपतियो के लिए बाजार खुला है । समाजीक संगठन और धार्मीक संगठनो के लिए बाजार खुला है , ये अपनी सेवा जनता को प्रदान कर रहे ,अपनी सेवा को दे रहे है । इस धरती के सारे राजनीतिक नेताओं जैसे सांप सुंघ गया है ।ये अपने देश के बाहर निकलना ही नहीं चाहते । कुर्सी के लिए राजनीतिक नेता देशों को ,राज्यो को , जाति , भाषा और प्रांतो को बाटते जा रहे , एक दूसरे से लडा रहे है जैसे इन नेताओ के पास कोई काम ही नहीं । हम जितने बटे रहेंगे । हम सब का विनाश का कारण राजनीति बनेगी । इस धरती के सारे राजनीतिक नेताये इतने कमजोर और असहाय हो गये , जैसे की ये नेता न हो कर गाय- भैंस , पशु – पक्षी ,किडे – मकौडे हो गये है । पशु – पक्षी जैसे असहाय और कमजोर होते है , वैसे आज के राजनीतिक नेता असहाय और कमजोर हो गये है । क्या राजनीतिक नेताओ का कर्तव्य नहीं होता कि सारे मनुष्यो के लिए बाजार खुलवाये ?
5:- मोदी जी
मैंने सुना है कि मोदी जी की सिना 56 इंच का है ।पर आप बताये , जो जेल का कैदी हो उसका सिना 56 इंच का कैसे हो सकता है ? कैदीयों की कोई सिना नहीं होता, बिना सिना के कैदी पैदा होते है और मर जाते है । मोदी जी अगर आपका सिना 56 इंच का है तो सरहद की दीवारे तोड कर दिखाये ।
भाई से लड कर , भाई को भगाकर इसे आजादी नहीं कहते । जो भी देश के नागरिक अपने आपको आजाद मानते ,या अपने आपको आजाद समझते है , वो गलत समझते है सिर्फ कुर्सी आजाद हुई है । हिंदुस्तान कल भी गुलाम था ,आज भी गुलाम है ।सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका कल भी गुलाम था आज भी गुलाम है । लगभग सभी देशो को गुलाम बनाने वाला देश इंगलैंड कल भी गुलाम था आज भी गुलाम है । इस धरती के सभी 353 देश कल भी गुलाम थे और आज भी गुलाम है । अगर कोई दश अपने आपको गुलाम नहीं मनता तो वो अपने देश के गरीब नागरिक को किसी दुसरे देशों में भेज कर देखे तो आपको अपनी वास्तविकता का ज्ञान हो जायेगा । आज भी राजाओ की शासन प्रणाली सभी देशों में जीवित है। लोकतंत्र प्रणाली लोगो से काफी दूर है । आजादी का मतलब है कि न तुम्हें कोई गुलाम बना सके और न तुम किसी को गुलाम बना सको । जहां मर्जी अपनी रोजी रोटी के लिए गरीब मजदुर जा सके ,तो समझो मानव समाज 353 जेलो से आजाद है ।
( राष्ट्र प्रेम इस धरती के विनाश का बडा परमाणु बंम है ।धरती प्रेम ,धरती के कल्याण का सबसे बडा परमाणु बंम है । )


independence of mother earth
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