इसी गांव में एक दीवान सालिम सिंह भी रहा करता था जिसकी बुरी नजर पालीवाल ब्राह्मणों पर पड़ी । उसे ब्राह्मण की लड़की पसंद आ गई । वह हरसंभव उसे पाने की कोशिश करने लगा जब उसकी सारी कोशिश नाकाम होने लगी तब सालिम सिंह ने गांव वालों को धमकी दी की या पूर्णमासी तक वे उस लड़की को सौंप दे या फिर वह स्वयं उठाकर ले जाएगा गांव वालों के सामने एक लड़की के सम्मान को बचाने की चुनौती थी वह चाहते तो लड़की की आहुति देकर कर अपना घर बचा सकते थे लेकिन उन्होंने दूसरा रास्ता अपनाया । एक रात 84 गांव के सभी ब्राह्मणों ने बैठकर एक निर्णय लिया कि वे रातों-रात इस गांव को खाली कर देंगे लेकिन उस लड़की को कुछ नहीं होने देंगे बस क्या था एक ही रात में कुलधरा समेत आसपास के सभी गांव खाली हो गए । जाते-जाते लोग इस गांव को श्राप दे गए कि इस स्थान पर कोई भी नहीं बस पाएगा जो भी यहां आएगा वह बर्बाद हो जाएगा ।

कुलधरा गांव को कुलधारा ब्राह्मणों ने बसाया था लेकिन यहां का एक राजा इतना क्रूर था कि वह अपनी जनता को जीने की आजादी तक नहीं देता और मनमाफिक तरीके से उसका शोषण करता था वह उन्हें मारता पीटता और अपने गुलामों की तरह रखा करता था । कुलधरा गांव पूरी तरह उजड गया है सिर्फ एक लड़की की इज्जत बचाने के लिए पूरे गांव वालों ने मिलकर उस लड़की की इज्जत बचाने के लिए गांव छोड़ कर कहीं और चले गए आज भी उस जगह पर उनकी आत्मा भटकती नजर आती है उजड गई कुलधरा के गांव । वहां कुछ भी नहीं बचा , बस था तो विरान और बंजर भूमि । जब भी नकारात्मक ऊर्जा अधिक से अत्यधिक बढ़ जाता है तो हमें भूत प्रेत के रूप में नजर आने लगता ।
क्या आपके गांव में भी बेटियां हैं ? क्या आप दूसरों की वहु / बेटी की रक्षा के लिए गांव छोड़कर जा सकते हैं ? क्या आप दूसरों की वहु – बेटी को अपनी बेटी समझते हैं ? Yes/No

