संसार के प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइज़क न्यूटन को कौन नहीं जानता। उन्होंने ग्रह ,नक्षत्र ,प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण के संबंध में अद्भुत खोज की थी अपने अनुसंधान के लिए सरकार की ओर से महान यस प्राप्त किया और सर की उपाधि से न्यूटन को घोषित किया गया
न्यूटन की मुसीबत उस समय की है जब न्यूटन की आयु 50 वर्ष की थी 20 वर्षों से लगातार प्रकाश के सिद्धांत को मालूम करने के लिए अथक परिश्रम कर रहे थे। दिन रात निरंतर लेखन का कार्य कर रहे थे।
तभी एक रात लिखते लिखते थक गए और उनके टेबल पर अनुसंधान की पुस्तकें, आवश्यक कागजात पत्र बिखरे पड़े थे । टेबल पर लैंप जल रहा था , वही पास में उनका डायमंड नाम का कुत्ता अंगूठी के पास सो रहा था
20 वर्षों से तैयार किया गया अनुसंधान की सारी कागजात टेबल पर छोड़कर , कुछ देर के लिए बाहर घूमने चले गए । जब वह वापस बाहर से घूम कर अपने में कमरे में आए तो वह जो वहां का दृश्य देखे । उसे उनका होश उड़ गया ।
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20 वर्षों का उनका कठिन परिश्रम राख के ढेर में बदल गया था। सब कुछ खत्म हो चुका था ।यह सब हुआ, उनका कुत्ता डायमंड की वजह से । कुत्त्ता टेबल पर चढ़ गया जिसके कारण टेबल पर रखे लैंप उलट कर गिर गया और टेबल पर अनुसंधान की सारी कागजात जो उसने 20 वर्षों से तैयार किया । सारे कागजात जल कर राख हो गई ।
आप जानते हैं 20 वर्षों का कठोर श्रम क्या होता है ? अपनी सुख-सुविधा को त्याग कर रात दिन एक कर प्रकाश के सिद्धांतों पर कार्य किए थे । जो पल भर में 20 वर्षों का काम जल कर राख हो गया और कोई होता, तो मानसिक आघात से पागल हो जाता या नहीं तो वो अपने कुत्ते को मृत्युदंड दे देता। पर न्यूटन ऐसा कुछ नहीं किया। न्यूटन ने अपनी मानसिक संतुलन को स्थिर रखा ।
न्यूटन जानते हैं की कठिनाइयों से गुजरे बिना कोई अपना लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता । कठिनाइयां मनुष्य को चमकाने और उसे तेजस्वी बनाने के लिए आती है । न्यूटन ने अपने कुत्ते के सिर पर अपना हाथ से थपथपाया और पुनः उसने अपने जोस और उत्साह के साथ फिर से समस्त कार्य किए और अंत में उन्होंने पूर्ण सफलता प्राप्त की।
न्यूटन की इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कभी भी आप कठिनाइयों और परेशानियों से भागे नहीं आप अपने जीवन की कठिनाइयों और परेशानियों को स्वीकार करें आपको उस कठिनाइयां और परेशानियों में जरूर कोई न कोई रास्ता मिल जाएगा ।
1 मिनट रुकिए आपने नोटिस किया होगा की जिस समय न्यूटन के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ गिरा था ।उस वक्त उनके बॉडीज में किस प्रकार के एनर्जी बह रही थी ? अगर उनके बॉडीज में नेगेटिव एनर्जी बह रही होती तो न्यूटन किसी पागलखाने में भर्ती होते हैं या मृत्यु देवता का भोजन बन गए होते हैं लेकिन उनके बॉडी में सकारात्मक ऊर्जा का फ्लो हो रहा था इस वजह से उन्होंने 20 वर्षों का काम जो पल भर में खत्म हो गया था । फिर से वापस उस कार्य को पूर्ण किया । इसलिए आज न्यूटन का नाम है । जीवन का सारा खेल एनर्जी का है । अगर आपने एनर्जी को समझ लिया तो कभी भी आप जीवन भर असफल नहीं होंगे न आपको कभी डॉक्टर दवा की जरूरत पड़ेगी ।
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