
Happy New year 2025

Earth and human relation





प्रेम क्या है ? प्रेम का बहुत ही साधारण simple परिभाषा है जहां समस्याएं नहीं होती है वहां प्रेम का होता है और जहां समस्याएं होती है वहां भय होता है। प्रेम और भय में क्या अंतर है ? चलिए प्रेम और प्रेम के विषय में जानते हैं । दोनों में क्या अंतर है? दोनों में जमीन आकाश का अंतर है । जहां भय समस्याएं को पैदा करती है। वही प्रेम सारी समस्याओं को खत्म करता है ।
भय :– जब से मनुष्य का धरती पर आगमन हुआ है , तब से लेकर आज तक मनुष्य का जीवन ,भय के केंद्र पर खड़ा है।पूरा मनुष्य जाति भय, चिंता, दुख, पीड़ा से पीड़ित है। मनुष्य हमेशा से भयभीत रहा है और भय, चिंता, दुख और पीड़ा के ऊपर मनुष्यों का अपना जीवन खड़ा है । भय के कारण मनुष्य मंदिर , मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा में पूजा अर्चना करता है। नमाज पढ़ा करता है। प्रार्थना करता है ।
जेलों में कैद सारी मानव जाति । क्या है जेल ? कैसा है जेल ?
भय आदमी के भीतर क्रोध और लोभ- लालच पैदा करता है। क्योंकि वह हमेशा सोचता रहता है। यह मिल जाए । वह मिल जाए। धन मिल जाए। पद मिल जाए। भगवान मिल जाए। स्वर्ग मिल जाए। ताकि किसी भी दुख पीड़ा से बच जाए। चिंता से बच जाए।
हमारा देश , हमारा राष्ट्र, हमारी देश भक्ति, हमारी राजनीति , हमारा धर्म और हमारा फौज यह सब हमारे भय पर खड़ी है। अकाश में लहराता हमारा झंडा भय प्रतीक है। धर्म या मजहब सभी भय का प्रतीक है।
मनुष्य जाति दो तरह से भय पैदा करते हैं। एक भय को पैदा करती है ताकि लोगों का शोषण किया जा सके और फिर भय पैदा हो जाने पर उस भय को बचाने के लिए जड़ता पैदा की जाती है । ताकि आदमी भय से कहीं मर ना जाए ।
आप सैनिकों को ही देख लीजिए। कोई भी सैनिक अभय को उपलब्ध नहीं होता । सिर्फ उसकी बुद्धि को जड़ किया जाता है। उसकी संवेदनाएं कम कर दी जाती है । ताकि उसे भय का कोई बोध न हो । जड़ बुद्धि वाले लोग भयभीत नहीं होते । तभी तो सैनिक, सैनिक को मारते हैं । हत्या करते समय उनके भीतर किसी भी तरह का दया धर्म नहीं होता । संवेदनाएं नहीं होती। हत्या । सैनिक भय का प्रतीक है। भय से बचने के लिए सैनिकों का निर्माण किया गया है।
गांव की बेटी । एक लड़की की दर्दनाक कहानी । The daughter of the village. Painful story of a girl
आज सारी दुनिया का बागडोर भयभीत लोगों के हाथों में है। विश्व का कोई भी राजनीतिज्ञ विश्व में शांति नहीं ला सकता है। क्योंकि राजनीति के सारा केंद्र भय पर खड़ा है और न ही कोई धर्मगुरु विश्व में शांति ला सकता है। क्योंकि धर्मगुरु का केंद्र भी भय पर खड़ा है। यही वजह है कि आज सारी दुनिया भय से त्राहिमाम कर रही है। भय की वजह से सारी दुनिया खंड खंड में बैठी हुई है।
जहां भय होता है , वहां घृणा पैदा होती है । जहां भय होता है , वहां हिंसा , क्रोध और लोभ लालच पैदा होता है । जहां भय होता है , वहां नफरत पैदा होती है । जहां भय होता है , वहां बीमारियां पैदा होती है । जहां भय होता है , वह नई नई समस्याएं पैदा होती रहती है । जहां भय होता है , वहां कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस का निर्माण होता है । कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस यह सभी भय के आधार पर खड़ी है । भय सदा बीमारी को फैलाता है । भय आपको सदा निर्धन बनाए रखती है । जहां भय होता है , वहां सदा लोग भूख और बीमारी से मरते हैं ।जहां भय होता है , वहां बड़े-बड़े विनाशकारी हथियारों का निर्माण होता है जैसे परमाणु बम या हाइड्रोजन बम etc जहां भय होता है , वहां डॉक्टर , वैद्य , हकीम और हॉस्पिटल पैदा होने लगता है । आपके आसपास में डॉक्टर है । हॉस्पिटल है । यह सब भय के कारण है । भय का आधार ही होता है कि आप सदा बीमारी , परेशानी या दुख चिंता से घिरे रहे । डॉक्टर हॉस्पिटल का चक्कर लगाते रहे ।थाना पुलिस , कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाते रहे । जहां भय होता है , वहां तलाक का जन्म होता है । जहां भय होता है , वहां दहेज दानव पैदा होने लगते हैं ।
आज कोरोनावायरस का फैलने का मुख्य कारण हमारा भय है । किसी न किसी रूप में हम सब भयभीत हैं । तभी आज कोरोनावायरस इतनी तेज गति से फैल रहा है । भय मनुष्य के शरीर की इम्युनिटी पावर को कम कर देता है । भय युद्ध को जन्म देता है । भय बिना कारण युद्ध कराता है । जिस वजह से एक देश दूसरे देश से लड़ता है । भाई – भाई आपस में लड़ते हैं । एक पड़ोसी दुसरे पड़ोसी से लड़ता है । पति पत्नी आपस में लड़ते हैं । बाप बेटा आपस में लड़ते हैं । इस सब भय का अंग है । यह सब भय पर खड़ा है । किसी भी देश की व्यवस्था सब भय पर खड़ी है ।
मैं आपसे कहना चाहता हूं कि ऊपर जो तस्वीर कपल्स का है । वह प्रेम का प्रतीक नहीं है । प्रेम जीवन देता है , जीवन लेता नहीं है । इन कपल्स के बीच प्रेम का फूल कभी खिलता नहीं । क्योंकि यह लोग प्रेम की वजह से आपस में जुड़ते नहीं हैं इनका जुड़ाव इनके शरीर की मैग्नेटिक फील्ड की वजह से एक दूसरे के करीब आते हैं । जैसे शरीर को भोजन की जरूरत पड़ती है ठीक इसी प्रकार शरीर को सेक्स की जरूरत पड़ती है । प्रकृति का नियम अनुसार जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया सदा चलता रहे । इसलिए उनके शरीर की बनावट इस प्रकार किया गया है ताकि कपल्स आपस में संबंध स्थापित कर सकें और जन्म मृत्यु की प्रक्रिया चलता रहे । लेकिन उनका यह प्रेम नहीं है । अगर उनका प्रेम होता तो आज अमेरिका में लगभग 40% लव मैरिज करने के बाद उनका तलाक हो जाता है । आखिर क्यों ? जबकि तलाक भय का प्रतीक है । विकसित देशों में लव मैरिज एक दो साल के अंदर ही उनका तलाक हो जाता है । आप यह कभी न सोचिए गा कि जो कपल्स आपस में प्रेम करते हैं । उनके भीतर कभी प्रेम का फूल खिल नहीं सकता ।
प्रेम :- क्या आप जानते हैं कि अगर आदमी के अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए तो क्या होगा । कभी आपने यह सोचा । आपको एक छोटी सी बात बताना चाहता हूं कि शायद आपको प्रेम का मतलब समझ में आ जाए । प्रेम में कितनी ताकत है।
कल तक मालुम नहीं था कि अणु और परमाणु क्या है ? पर आज ऐसी बात नहीं है । एक छोटे से अणु में कितनी ऊर्जा होती है। एक अणु में कितनी शक्ति होती है । अगर हम अणु का विस्फोट करते हैं तो उसमें अनंत शक्तियों का जन्म होता है। एक के छोटे से रेत के कण के अणु में इतनी ताकत है कि एक बड़ा महानगर जैसे मुंबई , दिल्ली जैसे शहर को नष्ट किया जा सकता है।
हाइड्रोजन के एक अणु से मुंबई जैसे महानगरों को क्षन भर में राख किया जा सकता है । तो आप समझ सकते हैं कि एक मनुष्य में कितनी ताकत हो सकती है जब पानी की एक बूंद में या हाइड्रोजन के अणु में इतनी ताकत है। तो मनुष्य के अंदर कितनी ताकत हो सकती है। जब उसके अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए।
हम सब के भीतर प्रेम का बीज पड़ा हुआ है । वह बीज , बीज ही रह जाता है । अंकुरित कभी नहीं हो पाता । क्योंकि उसे भूमि , पानी और रोशनी नहीं मिल पाती है। उस प्रेम रुपी बीज के भीतर दर्द , कसक और पीड़ा रह जाता है । जो उसे होना चाहिए था , वह नहीं हो सका ।
जिस तरह पौधे पर फूल नहीं आता तो उस पौधे को देखिए कैसे वह मुरझाए सा कुम्हलाए सा दिखता हैं । ठीक इसी प्रकार आदमी के भीतर भी प्रेम रूपी बीज है। और वह अगर न खिले तो चिंतित हो जाता है। उसका चेहरे लटक जाता है । उसका पूरा व्यक्तित्व मुरझा जाता है। ऐसे ही आज सारी मनुष्यता का व्यक्तित्व मुरझा गया है ।
कभी आपने अपने आप से पूछा कि मेरी सबसे अधिक गहरी प्यास क्या है ? क्या धन , पद , मोक्ष या परमात्मा । आपको इसका जवाब भीतर से आएगा सिर्फ प्रेम । प्रेम दो और प्रेम लो । प्रेम देना ही मनुष्यों का जन्मसिद्ध अधिकार है ।
जिस दिन मनुष्य के अंदर प्रेम का पूरा फूल खिलता है। तो वह परमात्मा को उपलब्ध हो जाता है । प्रेम परमात्मा का द्वार है। लेकिन हमें कभी प्रेम का ख्याल भी नहीं आता । प्रेम को कैसे विकसित करें । प्रेम का फूल खिलना बहुत जरूरी है । प्रेम के बिना पूरी मनुष्यता नष्ट हो सकती है ।
जहां प्रेम है , वहां आनंद और खुशियां है । जहां प्रेम है, वहां शांति पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां करुणा पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां दया पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां सौंदर्य पैदा होता है । जहां प्रेम है, वहां स्वर्ग जाने का रास्ता मिल जाता है । जहां प्रेम है, वहां सरहद का कोई दीवार नहीं होती । जहां प्रेम है, वहां कभी युद्ध नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां डॉक्टर , वैद्य और हकीम दिखाई नहीं पड़ते । जहां प्रेम है , वहां कोई हॉस्पिटल दिखाई नहीं पड़ता । जहां प्रेम है , वहां थाना- पुलिस , कोर्ट – कचहरी नहीं हुआ करता । जहां प्रेम है, वहां किसी प्रकार का समस्या का जन्म नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां मंदिर मस्जिद की जरूरत नहीं पड़ती है ।
जो व्यक्ति चाहता है कि अपने जीवन में प्रेम का फूल खिलाना तो उसे प्रेम मांगने का ख्याल छोड़ देना होगा । आपका ध्यान हमेशा प्रेम देने का ख्याल होना चाहिए । आप प्रेम देते हैं तो आपको अंदर प्रेम का फूल खिलता है ।
प्रेम मांगने से प्रेम का बीज सिकुड़ जाता है । उसका बीज का खोल और अधिक कड़क हो जाता है । आप जानते हैं भीखमंगे से ज्यादा किसी का ह्रदय सिकुड़ा नहीं होता । जो मांगता है, वह सिकुड़ जाता है । जो प्रेम देता है या जो प्रेम देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाता है तो उसका दिया हुआ प्रेम का दान कई गुणा बढ़ कर उसके पास वापस आ जाता है ।
आपने देखा होगा कि बीज जब अंकुरित होता है तो क्या कहता है ? बीज अंकुरित होता है । तो उसकी पत्तियां निकलती है । उसकी शाखाएं बीज से बाहर की ओर निकलती आती है और फिर फूल खिलने लगता है । एक बीज की क्रिया अंदर से बाहर की तरफ होती है । ठीक इसी प्रकार आपको भी अपने अंदर का प्रेम बाहर की तरफ निकालना होगा । तो आपके अंदर का बीच का खोल टूट जाएगा फिर आपके अंदर प्रेम का रस बहना शुरू हो जाए।
प्रेम का पहला सूत्र है कि आप प्रेम का दान करें । दूसरा सूत्र है कि आप प्रेम का दान बिना शर्त करें । हमने प्रेम दिया नहीं और हम प्रेम पाना चाहते है । इससे आपका प्रेम का बीज का खोल कभी टूट नहीं सकता । प्रेम का तीसरा सूत्र है कि जब आप प्रेम किसी को देते हैं या किसी का सेवा मदद करते हैं तो आप उसका कृतज्ञता जाहिर करें तो इससे आपके अंदर प्रेम का बहाने का मौका मिलता है ।
मेरा कहने का मतलब कि आप किसी का मदद करते हैं या किसी का सेवा करते हैं तो उसके लिए आप कृतज्ञता जाहिर करें । यह नहीं कि वह आपको धन्यवाद दे। बलिक आप उसे धन्यवाद दें । मैं कृतज्ञ हूं। मैं अनुग्रहित हूं । उसके प्रति अपने अंदर अनुग्रह के भाव को अपने अंदर जागृत करें । आपके अंदर प्रेम की बीज चोट पहुंचती है । जिससे प्रेम रूपी बीच का खोल टूट जाता है और आपके जीवन में प्रेम का फूल खिलने लगता है और वह विकसित होने लगता है ।
जिस दिन प्रेम का झरना आपके अंदर बहने लगा । उसी दिन आपको मालूम चलेगा कि भय कहीं भी नहीं है । प्रियम की अनुपस्थिति में या गैरमौजूदगी में आपके भीतर भय सक्रिय हो जाता है । यही आपका भय आपके तन , मन और धन सब को बीमार कर देता है । आंखों से न दिखने वाला कोरोनावायरस का आप शिकार हो जाते हैं और आपकी यूनिटी पावर कम हो जाता है और आप बीमार हो जाते हैं ।
प्रेम से भरा हृदय में भय का कोई स्थान नहीं होता , भय से भरा हृदय में प्रेम का कोई स्थान नहीं होता ।
जब आप अंदर प्रेम से भर जाते है तब आपको अपने हाथ में तलवार उठाने की कोई जरूरत नहीं होती । क्योंकि सब जगह आपको राम , खुदा, जीसस और वाहेगुरु दिखाई देने लगते हैं। वही आपके अंदर हृदय भय से भरा है तो सारा जगत आपको शत्रु नजर आने लगता हैं । आपके अंदर ह्रदय प्रेम से भरा होता है तो सारा जगत आपको अपना मित्र नजर आने लगता है ।
जो अंदर होता है वही बाहर आता है । आपके अंदर प्रेम है तो आप प्रेम का दान करेंगे । अगर आपके अंदर भय है, तो आप भय का दान करेंगे । आप जो अंदर है वही बाहर प्रगट होता है
अगर आपको यह लेख /Article अच्छा लगे तो इसे लाइक करें , कॉमेंट्स करें । अगर अच्छा ना लगे तो आप हमें बताएं ताकि मैं सुधार कर सकूं । जितना हो सके इसे आप अपने दोस्तों को या सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि लोगों में जागृति पैदा हो सके , लोगों का अंदर प्रेम की भावना बढ़ सके , सारी दुनिया एक हो सके, सारे देशों की सरहद खत्म हो सके । लोगों की आपसी लड़ाई – झगड़ा खत्म हो सके । आपने यहां तक पढ़ा इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं । आप सदा हंसते रहे मुस्कुराते रहें भगवान आपका ख्याल रखे । फिर मिलते हैं आपसे अगले लेख या Article में ।
प्रेम क्या है ? प्रेम का बहुत ही साधारण simple परिभाषा है जहां समस्याएं नहीं होती है वहां प्रेम होता है और जहां समस्याएं होती है वहां भय होता है। प्रेम और भय में क्या अंतर है ? चलिए प्रेम और अप्रेम के विषय में जानते हैं । दोनों में क्या अंतर है? दोनों में जमीन आकाश का अंतर है । जहां भय समस्याएं को पैदा करती है। वही प्रेम सारी समस्याओं को खत्म करता है ।
भय :– जब से मनुष्य का धरती पर आगमन हुआ है , तब से लेकर आज तक मनुष्य का जीवन ,भय के केंद्र पर खड़ा है।पूरा मनुष्य जाति भय, चिंता, दुख, पीड़ा से पीड़ित है। मनुष्य हमेशा से भयभीत रहा है और भय, चिंता, दुख और पीड़ा के ऊपर मनुष्यों का अपना जीवन खड़ा है । भय के कारण मनुष्य मंदिर , मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा में पूजा अर्चना करता है। नमाज पढ़ा करता है। प्रार्थना करता है ।
जेलों में कैद सारी मानव जाति । क्या है जेल ? कैसा है जेल ?
भय आदमी के भीतर क्रोध और लोभ- लालच पैदा करता है। क्योंकि वह हमेशा सोचता रहता है। यह मिल जाए । वह मिल जाए। धन मिल जाए। पद मिल जाए। भगवान मिल जाए। स्वर्ग मिल जाए। ताकि किसी भी दुख पीड़ा से बच जाए। चिंता से बच जाए।
हमारा देश , हमारा राष्ट्र, हमारी देश भक्ति, हमारी राजनीति , हमारा धर्म और हमारा फौज यह सब हमारे भय पर खड़ी है। अकाश में लहराता हमारा झंडा भय प्रतीक है। धर्म या मजहब सभी भय का प्रतीक है।
मनुष्य जाति दो तरह से भय पैदा करते हैं। एक भय को पैदा करती है ताकि लोगों का शोषण किया जा सके और फिर भय पैदा हो जाने पर उस भय को बचाने के लिए जड़ता पैदा की जाती है । ताकि आदमी भय से कहीं मर ना जाए ।
आप सैनिकों को ही देख लीजिए। कोई भी सैनिक अभय को उपलब्ध नहीं होता । सिर्फ उसकी बुद्धि को जड़ किया जाता है। उसकी संवेदनाएं कम कर दी जाती है । ताकि उसे भय का कोई बोध न हो । जड़ बुद्धि वाले लोग भयभीत नहीं होते । तभी तो सैनिक, सैनिक को मारते हैं । हत्या करते समय उनके भीतर किसी भी तरह का दया धर्म नहीं होता । संवेदनाएं नहीं होती। हत्या । सैनिक भय का प्रतीक है। भय से बचने के लिए सैनिकों का निर्माण किया गया है।
गांव की बेटी । एक लड़की की दर्दनाक कहानी । The daughter of the village. Painful story of a girl
आज सारी दुनिया का बागडोर भयभीत लोगों के हाथों में है। विश्व का कोई भी राजनीतिज्ञ विश्व में शांति नहीं ला सकता है। क्योंकि राजनीति के सारा केंद्र भय पर खड़ा है और न ही कोई धर्मगुरु विश्व में शांति ला सकता है। क्योंकि धर्मगुरु का केंद्र भी भय पर खड़ा है। यही वजह है कि आज सारी दुनिया भय से त्राहिमाम कर रही है। भय की वजह से सारी दुनिया खंड खंड में बैठी हुई है।
जहां भय होता है , वहां घृणा पैदा होती है । जहां भय होता है , वहां हिंसा , क्रोध और लोभ लालच पैदा होता है । जहां भय होता है , वहां नफरत पैदा होती है । जहां भय होता है , वहां बीमारियां पैदा होती है । जहां भय होता है , वह नई नई समस्याएं पैदा होती रहती है । जहां भय होता है , वहां कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस का निर्माण होता है । कोर्ट – कचहरी , थाना – पुलिस यह सभी भय के आधार पर खड़ी है । भय सदा बीमारी को फैलाता है । भय आपको सदा निर्धन बनाए रखती है । जहां भय होता है , वहां सदा लोग भूख और बीमारी से मरते हैं ।जहां भय होता है , वहां बड़े-बड़े विनाशकारी हथियारों का निर्माण होता है जैसे परमाणु बम या हाइड्रोजन बम etc जहां भय होता है , वहां डॉक्टर , वैद्य , हकीम और हॉस्पिटल पैदा होने लगता है । आपके आसपास में डॉक्टर है । हॉस्पिटल है । यह सब भय के कारण है । भय का आधार ही होता है कि आप सदा बीमारी , परेशानी या दुख चिंता से घिरे रहे । डॉक्टर हॉस्पिटल का चक्कर लगाते रहे ।थाना पुलिस , कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाते रहे । जहां भय होता है , वहां तलाक का जन्म होता है । जहां भय होता है , वहां दहेज दानव पैदा होने लगते हैं ।
आज कोरोनावायरस का फैलने का मुख्य कारण हमारा भय है । किसी न किसी रूप में हम सब भयभीत हैं । तभी आज कोरोनावायरस इतनी तेज गति से फैल रहा है । भय मनुष्य के शरीर की इम्युनिटी पावर को कम कर देता है । भय युद्ध को जन्म देता है । भय बिना कारण युद्ध कराता है । जिस वजह से एक देश दूसरे देश से लड़ता है । भाई – भाई आपस में लड़ते हैं । एक पड़ोसी दुसरे पड़ोसी से लड़ता है । पति पत्नी आपस में लड़ते हैं । बाप बेटा आपस में लड़ते हैं । इस सब भय का अंग है । यह सब भय पर खड़ा है । किसी भी देश की व्यवस्था सब भय पर खड़ी है ।
मैं आपसे कहना चाहता हूं कि ऊपर जो तस्वीर कपल्स का है । वह प्रेम का प्रतीक नहीं है । प्रेम जीवन देता है , जीवन लेता नहीं है । इन कपल्स के बीच प्रेम का फूल कभी खिलता नहीं । क्योंकि यह लोग प्रेम की वजह से आपस में जुड़ते नहीं हैं इनका जुड़ाव इनके शरीर की मैग्नेटिक फील्ड की वजह से एक दूसरे के करीब आते हैं । जैसे शरीर को भोजन की जरूरत पड़ती है ठीक इसी प्रकार शरीर को सेक्स की जरूरत पड़ती है । प्रकृति का नियम अनुसार जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया सदा चलता रहे । इसलिए उनके शरीर की बनावट इस प्रकार किया गया है ताकि कपल्स आपस में संबंध स्थापित कर सकें और जन्म मृत्यु की प्रक्रिया चलता रहे । लेकिन उनका यह प्रेम नहीं है । अगर उनका प्रेम होता तो आज अमेरिका में लगभग 40% लव मैरिज करने के बाद उनका तलाक हो जाता है । आखिर क्यों ? जबकि तलाक भय का प्रतीक है । विकसित देशों में लव मैरिज एक दो साल के अंदर ही उनका तलाक हो जाता है । आप यह कभी न सोचिए गा कि जो कपल्स आपस में प्रेम करते हैं । उनके भीतर कभी प्रेम का फूल खिल नहीं सकता ।
प्रेम :- क्या आप जानते हैं कि अगर आदमी के अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए तो क्या होगा । कभी आपने यह सोचा । आपको एक छोटी सी बात बताना चाहता हूं कि शायद आपको प्रेम का मतलब समझ में आ जाए । प्रेम में कितनी ताकत है।
कल तक मालुम नहीं था कि अणु और परमाणु क्या है ? पर आज ऐसी बात नहीं है । एक छोटे से अणु में कितनी ऊर्जा होती है। एक अणु में कितनी शक्ति होती है । अगर हम अणु का विस्फोट करते हैं तो उसमें अनंत शक्तियों का जन्म होता है। एक के छोटे से रेत के कण के अणु में इतनी ताकत है कि एक बड़ा महानगर जैसे मुंबई , दिल्ली जैसे शहर को नष्ट किया जा सकता है।
हाइड्रोजन के एक अणु से मुंबई जैसे महानगरों को क्षन भर में राख किया जा सकता है । तो आप समझ सकते हैं कि एक मनुष्य में कितनी ताकत हो सकती है जब पानी की एक बूंद में या हाइड्रोजन के अणु में इतनी ताकत है। तो मनुष्य के अंदर कितनी ताकत हो सकती है। जब उसके अंदर प्रेम बहना शुरू हो जाए।
हम सब के भीतर प्रेम का बीज पड़ा हुआ है । वह बीज , बीज ही रह जाता है । अंकुरित कभी नहीं हो पाता । क्योंकि उसे भूमि , पानी और रोशनी नहीं मिल पाती है। उस प्रेम रुपी बीज के भीतर दर्द , कसक और पीड़ा रह जाता है । जो उसे होना चाहिए था , वह नहीं हो सका ।
जिस तरह पौधे पर फूल नहीं आता तो उस पौधे को देखिए कैसे वह मुरझाए सा कुम्हलाए सा दिखता हैं । ठीक इसी प्रकार आदमी के भीतर भी प्रेम रूपी बीज है। और वह अगर न खिले तो चिंतित हो जाता है। उसका चेहरे लटक जाता है । उसका पूरा व्यक्तित्व मुरझा जाता है। ऐसे ही आज सारी मनुष्यता का व्यक्तित्व मुरझा गया है ।
कभी आपने अपने आप से पूछा कि मेरी सबसे अधिक गहरी प्यास क्या है ? क्या धन , पद , मोक्ष या परमात्मा । आपको इसका जवाब भीतर से आएगा सिर्फ प्रेम । प्रेम दो और प्रेम लो । प्रेम देना ही मनुष्यों का जन्मसिद्ध अधिकार है ।
जिस दिन मनुष्य के अंदर प्रेम का पूरा फूल खिलता है। तो वह परमात्मा को उपलब्ध हो जाता है । प्रेम परमात्मा का द्वार है। लेकिन हमें कभी प्रेम का ख्याल भी नहीं आता । प्रेम को कैसे विकसित करें । प्रेम का फूल खिलना बहुत जरूरी है । प्रेम के बिना पूरी मनुष्यता नष्ट हो सकती है ।
जहां प्रेम है , वहां आनंद और खुशियां है । जहां प्रेम है, वहां शांति पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां करुणा पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां दया पैदा होती है । जहां प्रेम है, वहां सौंदर्य पैदा होता है । जहां प्रेम है, वहां स्वर्ग जाने का रास्ता मिल जाता है । जहां प्रेम है, वहां सरहद का कोई दीवार नहीं होती । जहां प्रेम है, वहां कभी युद्ध नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां डॉक्टर , वैद्य और हकीम दिखाई नहीं पड़ते । जहां प्रेम है , वहां कोई हॉस्पिटल दिखाई नहीं पड़ता । जहां प्रेम है , वहां थाना- पुलिस , कोर्ट – कचहरी नहीं हुआ करता । जहां प्रेम है, वहां किसी प्रकार का समस्या का जन्म नहीं होता । जहां प्रेम है, वहां मंदिर मस्जिद की जरूरत नहीं पड़ती है ।
जो व्यक्ति चाहता है कि अपने जीवन में प्रेम का फूल खिलाना तो उसे प्रेम मांगने का ख्याल छोड़ देना होगा । आपका ध्यान हमेशा प्रेम देने का ख्याल होना चाहिए । आप प्रेम देते हैं तो आपको अंदर प्रेम का फूल खिलता है ।
प्रेम मांगने से प्रेम का बीज सिकुड़ जाता है । उसका बीज का खोल और अधिक कड़क हो जाता है । आप जानते हैं भीखमंगे से ज्यादा किसी का ह्रदय सिकुड़ा नहीं होता । जो मांगता है, वह सिकुड़ जाता है । जो प्रेम देता है या जो प्रेम देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाता है तो उसका दिया हुआ प्रेम का दान कई गुणा बढ़ कर उसके पास वापस आ जाता है ।
आपने देखा होगा कि बीज जब अंकुरित होता है तो क्या कहता है ? बीज अंकुरित होता है । तो उसकी पत्तियां निकलती है । उसकी शाखाएं बीज से बाहर की ओर निकलती आती है और फिर फूल खिलने लगता है । एक बीज की क्रिया अंदर से बाहर की तरफ होती है । ठीक इसी प्रकार आपको भी अपने अंदर का प्रेम बाहर की तरफ निकालना होगा । तो आपके अंदर का बीच का खोल टूट जाएगा फिर आपके अंदर प्रेम का रस बहना शुरू हो जाए।
प्रेम का पहला सूत्र है कि आप प्रेम का दान करें । दूसरा सूत्र है कि आप प्रेम का दान बिना शर्त करें । हमने प्रेम दिया नहीं और हम प्रेम पाना चाहते है । इससे आपका प्रेम का बीज का खोल कभी टूट नहीं सकता । प्रेम का तीसरा सूत्र है कि जब आप प्रेम किसी को देते हैं या किसी का सेवा मदद करते हैं तो आप उसका कृतज्ञता जाहिर करें तो इससे आपके अंदर प्रेम का बहाने का मौका मिलता है ।
मेरा कहने का मतलब कि आप किसी का मदद करते हैं या किसी का सेवा करते हैं तो उसके लिए आप कृतज्ञता जाहिर करें । यह नहीं कि वह आपको धन्यवाद दे। बलिक आप उसे धन्यवाद दें । मैं कृतज्ञ हूं। मैं अनुग्रहित हूं । उसके प्रति अपने अंदर अनुग्रह के भाव को अपने अंदर जागृत करें । आपके अंदर प्रेम की बीज चोट पहुंचती है । जिससे प्रेम रूपी बीच का खोल टूट जाता है और आपके जीवन में प्रेम का फूल खिलने लगता है और वह विकसित होने लगता है ।
जिस दिन प्रेम का झरना आपके अंदर बहने लगा । उसी दिन आपको मालूम चलेगा कि भय कहीं भी नहीं है । प्रियम की अनुपस्थिति में या गैरमौजूदगी में आपके भीतर भय सक्रिय हो जाता है । यही आपका भय आपके तन , मन और धन सब को बीमार कर देता है । आंखों से न दिखने वाला कोरोनावायरस का आप शिकार हो जाते हैं और आपकी यूनिटी पावर कम हो जाता है और आप बीमार हो जाते हैं ।
प्रेम से भरा हृदय में भय का कोई स्थान नहीं होता , भय से भरा हृदय में प्रेम का कोई स्थान नहीं होता ।
जब आप अंदर प्रेम से भर जाते है तब आपको अपने हाथ में तलवार उठाने की कोई जरूरत नहीं होती । क्योंकि सब जगह आपको राम , खुदा, जीसस और वाहेगुरु दिखाई देने लगते हैं। वही आपके अंदर हृदय भय से भरा है तो सारा जगत आपको शत्रु नजर आने लगता हैं । आपके अंदर ह्रदय प्रेम से भरा होता है तो सारा जगत आपको अपना मित्र नजर आने लगता है ।
जो अंदर होता है वही बाहर आता है । आपके अंदर प्रेम है तो आप प्रेम का दान करेंगे । अगर आपके अंदर भय है, तो आप भय का दान करेंगे । आप जो अंदर है वही बाहर प्रगट होता है
अगर आपको यह लेख /Article अच्छा लगे तो इसे लाइक करें , कॉमेंट्स करें । अगर अच्छा ना लगे तो आप हमें बताएं ताकि मैं सुधार कर सकूं । जितना हो सके इसे आप अपने दोस्तों को या सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि लोगों में जागृति पैदा हो सके , लोगों का अंदर प्रेम की भावना बढ़ सके , सारी दुनिया एक हो सके, सारे देशों की सरहद खत्म हो सके । लोगों की आपसी लड़ाई – झगड़ा खत्म हो सके । आपने यहां तक पढ़ा इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं । आप सदा हंसते रहे मुस्कुराते रहें भगवान आपका ख्याल रखे । फिर मिलते हैं आपसे अगले लेख या Article में ।
यह कहानी स्कॉटलैंड का राजा ब्रूस है । ब्रूस अपने शत्रु से पराजित होकर भागा भीगा फिर रहा था । उसके संगी साथ सब छूट गए थे । धन जन की बड़ी हानि हुई थी । जीवन पराजित और लांच्छी था । आप कह सकते हैं कि राजा ब्रूस की किसी प्रकार से जीवन बच गया था ।
शत्रु , ब्रूस की तलाश कर रहे थे । राजा ब्रूस अपनी प्राण बचाने के लिए इधर उधर भागा फिर रहे थे । मौत उसके सर पर मर्डर आ रही थी । उसकी स्थिति यह थी कि अब मरा की तब मारा।
राजा ब्रूस भागकर एक खोह में छिप गया । वहां वह अपनी मौत आने का प्रतीक्षा कर रहा था । आप अनुमान लगा सकते हैं कि उसकी मौत कैसी क्रूर होगी। उसके अंदर भावनाएं किस प्रकार की जन्म लेती होंगी। शत्रुओं की तलवार पल भर में उसका काम तमाम कर देगी। कितनी डरावना राजा ब्रूस का वो समय था ।
खोह में छिपा राजा ब्रूस मन ही मन छटपटा रहा था। उसकी आत्मा कहीं किसी आश्रय की तलाश में थी। कहीं उसे आसरा मिल जाए। ( 353 देशों के सैनिक जानवर और पशु है )
तभी उसने सामने एक दृश्य देखा, की एक छोटी सी नन्हीं सी मकड़ी को खोह के मुंह पर जाला बुनने का शतक प्रयास कर रही थी। बार-बार गिरती और बार-बार उठती और अपने शरीर को झाड़ कर उठ खड़ी होती फिर वो अपने नए उत्साह के साथ वापस जाला बनने का प्रयास करने लगती। जबकि मकड़ी के पास कोई आधार नहीं था। बिना आधार के मकड़ी का प्रयास व्यर्थ था। फिर भी मकरी बार-बार प्रयास करती और असफल हो जाती।
राजा ब्रूस को यह देख बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने देखा कि मकड़ी जीना में सूत्र को अटका दिया है। फिर क्या था एक के बाद एक कितने सारे सूत्र अटक गए। मकड़ी ने अपना जाला बुनने लगी। थोड़ी देर में मकड़ी के पूरे प्रयास से खोह के मुंह पर जाला उनका तैयार कर दिया। शत्रु के सिपाही उसको के पास आए और खोह पर मकड़ी का जाला देखकर वापस लौट गए। सावधान रहे ! नफरत, घृणा, क्रोध, और लोभ लालच से ग्रसित व्यक्ति को कोरोनावायरस अपना शिकार बनाती है
राजा ब्रूस की आई हुई मौत वापस लौट गई। अब ब्रस एक गहरी सोच में पड़ गए। वह सोच रहे थे कि जब मकरी बार बार गिरकर भी निराश और हताश नहीं हुई, मैं तो मनुष्य हूं। हाथ पैर वाला आदमी हूं। मैं कैसे हार सकता हूं। मैं कैसे इतनी जल्दी निराश हो गया।
राजा ब्रूस ने अपने हार का मंथन किया और मकरी से जीवन जीने की नई प्रेरणा ली। राजा ब्रूस ने अपने बिछड़े हुए सभी संगी साथियों को इकट्ठा किया और उसने अपनी पूरी ताकत के साथ प्रयास किया। अंत में राजा ब्रूस की जीत हुई ।
यह कहानी हमें शिक्षा देता है कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए चाहे परिस्थितियां कितनी भी भयानक क्यों ना हो, हमें हार नहीं मानना चाहिए । हौसला और हिम्मत रखने वालों को ऊपर वाला नया रास्ता दिखा देता है। कठिनाई और समस्या से भागने वाले को कठिनाई और समस्या उसका सदा पीछा करता रहता है। सो आप अपने जीवन से हार न माने, अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपनी आखिरी सांस तक, आप अपना प्रयास करें । आपका लक्ष्य खुद आप तक चल कर आप को सलाम करेगा ।
अगर आपको यह लेख /Article अच्छा लगे तो इसे लाइक करें , कॉमेंट्स करें । जितना हो सके इसे अपने दोस्तों को या सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि लोगों में जागृति पैदा हो सके , लोगों का अंदर प्रेम की भावना बढ़ सके , सारी दुनिया एक हो सके, सारे देशों की सरहद खत्म हो सके । लोगों की आपसी लड़ाई – झगड़ा खत्म हो सके ।
संसार के प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइज़क न्यूटन को कौन नहीं जानता। उन्होंने ग्रह ,नक्षत्र ,प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण के संबंध में अद्भुत खोज की थी अपने अनुसंधान के लिए सरकार की ओर से महान यस प्राप्त किया और सर की उपाधि से न्यूटन को घोषित किया गया
न्यूटन की मुसीबत उस समय की है जब न्यूटन की आयु 50 वर्ष की थी 20 वर्षों से लगातार प्रकाश के सिद्धांत को मालूम करने के लिए अथक परिश्रम कर रहे थे। दिन रात निरंतर लेखन का कार्य कर रहे थे।
तभी एक रात लिखते लिखते थक गए और उनके टेबल पर अनुसंधान की पुस्तकें, आवश्यक कागजात पत्र बिखरे पड़े थे । टेबल पर लैंप जल रहा था , वही पास में उनका डायमंड नाम का कुत्ता अंगूठी के पास सो रहा था
20 वर्षों से तैयार किया गया अनुसंधान की सारी कागजात टेबल पर छोड़कर , कुछ देर के लिए बाहर घूमने चले गए । जब वह वापस बाहर से घूम कर अपने में कमरे में आए तो वह जो वहां का दृश्य देखे । उसे उनका होश उड़ गया ।
कोरोना वायरस से बचना है तो खुद से करे प्रेम
20 वर्षों का उनका कठिन परिश्रम राख के ढेर में बदल गया था। सब कुछ खत्म हो चुका था ।यह सब हुआ, उनका कुत्ता डायमंड की वजह से । कुत्त्ता टेबल पर चढ़ गया जिसके कारण टेबल पर रखे लैंप उलट कर गिर गया और टेबल पर अनुसंधान की सारी कागजात जो उसने 20 वर्षों से तैयार किया । सारे कागजात जल कर राख हो गई ।
आप जानते हैं 20 वर्षों का कठोर श्रम क्या होता है ? अपनी सुख-सुविधा को त्याग कर रात दिन एक कर प्रकाश के सिद्धांतों पर कार्य किए थे । जो पल भर में 20 वर्षों का काम जल कर राख हो गया और कोई होता, तो मानसिक आघात से पागल हो जाता या नहीं तो वो अपने कुत्ते को मृत्युदंड दे देता। पर न्यूटन ऐसा कुछ नहीं किया। न्यूटन ने अपनी मानसिक संतुलन को स्थिर रखा ।
न्यूटन जानते हैं की कठिनाइयों से गुजरे बिना कोई अपना लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता । कठिनाइयां मनुष्य को चमकाने और उसे तेजस्वी बनाने के लिए आती है । न्यूटन ने अपने कुत्ते के सिर पर अपना हाथ से थपथपाया और पुनः उसने अपने जोस और उत्साह के साथ फिर से समस्त कार्य किए और अंत में उन्होंने पूर्ण सफलता प्राप्त की।
न्यूटन की इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कभी भी आप कठिनाइयों और परेशानियों से भागे नहीं आप अपने जीवन की कठिनाइयों और परेशानियों को स्वीकार करें आपको उस कठिनाइयां और परेशानियों में जरूर कोई न कोई रास्ता मिल जाएगा ।
1 मिनट रुकिए आपने नोटिस किया होगा की जिस समय न्यूटन के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ गिरा था ।उस वक्त उनके बॉडीज में किस प्रकार के एनर्जी बह रही थी ? अगर उनके बॉडीज में नेगेटिव एनर्जी बह रही होती तो न्यूटन किसी पागलखाने में भर्ती होते हैं या मृत्यु देवता का भोजन बन गए होते हैं लेकिन उनके बॉडी में सकारात्मक ऊर्जा का फ्लो हो रहा था इस वजह से उन्होंने 20 वर्षों का काम जो पल भर में खत्म हो गया था । फिर से वापस उस कार्य को पूर्ण किया । इसलिए आज न्यूटन का नाम है । जीवन का सारा खेल एनर्जी का है । अगर आपने एनर्जी को समझ लिया तो कभी भी आप जीवन भर असफल नहीं होंगे न आपको कभी डॉक्टर दवा की जरूरत पड़ेगी ।
353 जेलों में कैद सारी मानव जाति
अगर आपको यह लेख /Article अच्छा लगे तो इसे लाइक करें , कॉमेंट्स करें । जितना हो सके इसे अपने दोस्तों को या सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि लोगों में जागृति पैदा हो सके , लोगों का अंदर प्रेम की भावना बढ़ सके , सारी दुनिया एक हो सके, सारे देशों की सरहद खत्म हो सके । लोगों की आपसी लड़ाई – झगड़ा खत्म हो। आपने यहां तक पढ़ा उसके लिए Thank you.
If you like this article then like it, make comments. Share it to your friends or on social media as much as possible so as to create awareness among the people, increase the feeling of love in the people, the whole world can be united, the border of all countries can be ended. People’s mutual fight – end the quarrel. Thank you for that you have read up to here.
विश्व प्रसिद्ध भविष्यवाणियां क्या है ? जीन डिक्सन ने भारत के विषय में क्या कहा ? एंडरसन ने भारत के विषय में क्या कहा ? गेरार्ड क्राइसे या प्रोफ़ेसर कीरो या नस्त्रदमस या आर्थर चार्ल्स क्लार्क ने भारत के विषय में क्या कहा ? भारत के विषय में कौन से भविष्यवक्ता ने क्या कहा ?
आज संसार की समस्याएं इतनी जटिल हो गई है कि मानव उसे अपनी बुद्धि और बल पर सुलझा नहीं सकता । विश्व शांति अब मनुष्य की ताकत के बाहर की बात हो गई है लेकिन हमें निराश होने की जरूरत नहीं है ।
कुछ ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि भगवान / खुदा धरती पर आ गया है । वह हमारी सहायक शक्तियों के साथ नवयुग की स्थापना के प्रयासों में जुटा हुआ है । वह दुनिया का उद्धारक ज्यादा देर तक पर्दे में के पीछे छिपा नहीं रह सकता । पुरानी सभ्यता का अंत होने का समय आ गया है और दिव्य संस्कृति का आगमन का समय आ चुका है । पुरातन युग का नाश और नए युग का उदय सुनिश्चित है।
जीन डिक्शन ( Jean Dixon ) के अनुसार एक ग्रामीण परिवार में एक महान आत्मा ने जन्म ले लिया है। जो महान आध्यात्मिक क्रांति का सूत्रपात संचालन करेगा । उसके साथ क्रियाशील आत्माओं की शक्ति होगी । जो संसार की विकृत वर्तमान परिस्थितियों को बदल डालेगी । यह जीन डिक्सन अमेरिका ही नहीं सारे विश्व में भविष्यवाणी के लिए विख्यात है।
एंडरसन के अनुसार एक ऐसे व्यक्ति ने जन्म लिया है। जिसकी अकेले की उत्पादित शक्ति किसी भी शक्ति संपन्न राष्ट्र के बराबर होगी । वह एक भाषा एक संस्कृति एक धर्म की आचार संहिता का सृजन करेगा ।
जब एंडरसन 8 वर्ष का था तभी उसने अपने बड़े भाई को लेकर एक भविष्यवाणी की थी उस दिन एंडरसन अपने घर में खेल रहा था । प्रथम युद्ध प्रारंभ हो चुका था । एंडरसन का बड़ा भाई नेल्सन कनाडा की सेना में कप्तान था । उसने अपनी मां का हाथ पकड़कर कमरे में ले गया और बोला देखो मां , भैया के चेहरे पर बंदूक की गोली लगी है और वह पृथ्वी पर गिर कर मर चुके हैं । उसकी मां ने उसे डांटा , चल मूर्ख , फिर कभी ऐसी बात अपनी मुख से मत निकालना। पर एंडरसन वह बात बार-बार कहता रहा ।
इस घटना के दो-तीन दिन बाद ही कनाडा से तार आया की नेल्सन की 1 नवंबर 1918 को गोली लगने से मृत्यु हो गई है ।
एंडरसन ने अपनी एक महत्वपूर्ण भविष्यवाणी में बताया कि आगामी वर्ष संसार के लिए महा विनाशक होंगे । एशिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश उत्पाद शुरू करेगा। जो आज आप प्रमाण देख रहे हैं कोरोना वायरस को जन्म देना ।
एंडरसन ने यह भी कहा था कि आने वाले दिनों में सभी देशों की राजनीतिक प्रधानों का अस्तित्व खतरे में रहेगा और उसका प्रभुत्व दिन प्रतिदिन घटता चला जाएगा । छोटे छोटे से तबके के सच्चे ,ईमानदार, न्याय , नीति ,उदारता ,त्याग और बलिदान को महत्त्व देने लगेंगे । संसार के तमाम संविधान के समानांतर एक मानवीय संविधान का निर्माण होगा। समाचार पत्रों में मुखपृष्ठ पर ऐसे समाचार छापे जाएंगे । जो आज नहीं छपा करता है।
उनका कहना था कि आज संसार धर्म संस्कृति के जिस स्वरूप की कल्पना भी नहीं करता उस धर्म का तेजी से विस्तार होगा और सारे संसार पर छा जाएगा । यह धर्म और संस्कृति भारत वर्ष की हो गई और वह मसीहा भी भारत वर्ष का होगा ।
युग परिवर्तन परमात्मा या खुदा की निजी इच्छा है । यह किसी के रोकने से नहीं रुकेगा । आज की वर्तमान परिस्थितियां बदलकर रहेगा । उसे कोई कितना भी रोकना चाहे , पर रोक नहीं सकता। कितना भी धन लगाए पर उस क्रांति को कोई रोक नहीं सकता । वो क्रांति होकर रहेगी । यही परमात्मा की इच्छा है ।
गिरार्ड क्राइस्ट के अनुसार एक प्रकाश उठ रहा है। जो वायुमंडल को भी शुद्ध करेगा और लोगों के अंतःकरण में समाये छल , कपट , घृणा और लोभ – लालच को भी शुद्ध करेगा । संसार एक सूत्र में बांधेगा और सर्वत्र अमन और शांति का राज होगी ।
इसी बीच संसार में भारी उथल-पुथल होगी । वायु दुर्घटनाएं इतनी अधिक होगी की बहुत कम लोग हवाई जहाज से यात्रा करेंगे । संसार के लोग उस मसीहा को देखेंगे और उसकी बात मानेंगे । सारे राजनीतिक नेता को एक मंच पर इकट्ठा होने को विवश होंगे । फिर संसार एक सूत्र में बंधता चला जाएगा । चारों तरफ अमन और शांति होगी । कहीं कोई हिंसा नहीं होगी , दमन , झूठ , फरेब , लोभ -लालच के लिए कोई स्थान न होगा।
आर्थर चार्ल्स क्लार्क के अनुसार वह समय आ गया है । जब संसार से वर्ण भेद , जातिभेद , लिंग भेद तथा राष्ट्रों के बीच भेदभाव मिट जाएगा। सारी दुनिया के लोग भाई भाई की तरह रहेंगे । सारी पृथ्वी पर एक धर्म , मानव धर्म की स्थापना होगा । आज जिस तरह से पृथ्वी के सारे देश बंटे हुए हैं । वह सारे देश एक हो जाएंगे । मानव का सोया हुआ अंतःकरण जागने को विवश हो जाएगा । आज जिन शक्तियों की ओर लोगों का ध्यान भी नहीं जाता। तब वह शक्तियां प्रत्येक मानव का शोध विषय बन जाएगा।
प्रोफ़ेसर हरा के अनुसार ऐसे किसी दिव्य पुरुष का जन्म भारतवर्ष में होगा। जिसकी आध्यात्मिक क्रांति की जड़ें बिना किसी लोक यश के भीतर ही भीतर जमता रहेगा और उसके बाद उसका प्रभुत्व सारे विश्व में छा जाएगा । उसके विचार इतना मानवतावादी और दूरदर्शी होगा कि सारा विश्व उसके कथन और विचारों को सुनने को बाध्य हो जाएगा ।
जूलबर्न के अनुसार इतिहास के सबसे समर्थ व्यक्ति का उत्तरण हो चुका है शीघ्र ही सारी दुनिया को बदल डालेगा। उसका ज्ञान क्रांति उठेगा और आंधी तूफान की तरह सारे विश्व में छा जाएगा।
श्री अइय्यर ने बताया कि कल्कि नाम का महापुरुष संपूर्ण आर्ष ग्रन्थों के उध्दार से लेकर सामान्य जीवन तक की सारी रीति नीति संबंधी नए विचारों का सृजन करेगा । पीछे इन्हीं विचारों को लोग अनुसरण करेंगे। वह गृहस्थ होगा । अतुल संपत्ति वाला होगा । फिर भी उसका रहन-सहन साधारण गृहस्थ जैसा होगा ।उसकी संपत्ति लोकमंगल के लिए होगे।
फ्रांस में जन्मे नॉस्त्रादमस के अनुसार विश्व विख्यात व्यक्ति का जन्म पूर्व देशों में होगा। यह अकेला ही अपने छोटे-छोटे सहयोगियों के द्वारा सारे संसार में तहलका मचा देगा। यह ऐतिहासिक महापुरुष एक ऐसे महा संघर्ष को जन्म देगा कि घर-घर गली गली मोहल्ले नगर नगर में अंतर्द्वंद छिड़ जाएगा। उसके बाद संसार में सर्वत्र मानवता का आधिपत्य होगा । लोग आसुरी वृत्तियों का परित्याग कर देंगे और संसार में सर्वत्र सुख शांति अमन का राज होगा।
जितने भी भविष्य वक्ताओं ने भविष्यवाणियां की है उनके अनुसार वह वही व्यक्ति होगा जो छल कपट राजनीति धार्मिक से कोई मतलब नहीं होगा उसका धर्म, मानव धर्म और प्रेम ग्रंथ होगा । उस प्रेम धर्म से सारी दुनिया जीता जा सकता है । आप जानते हैं कि सारा ब्रह्मांड एक सूत्र में बंधा है। जबकि धरती पर मनुष्य ने अपने आप को धर्म जाति भाषा प्रांत और देश के नाम पर अपने आपको बांट कर रखा हुआ है । सभी धर्म ,जाति , भाषा प्रांत, देशों और मनुष्यों को एक सूत्र में बांधने का मूल मंत्र है , वह है प्रेम । हम प्रेम सारी दुनिया को बांध सकते हैं । प्रेम के द्वारा ही हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं।
अगर आपको यह लेख /Article अच्छा लगे तो इसे लाइक करें , कॉमेंट्स करें । जितना हो सके इसे अपने दोस्तों को या सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि लोगों में जागृति पैदा हो सके , लोगों का अंदर प्रेम की भावना बढ़ सके , सारी दुनिया एक हो सके, सारे देशों की सरहद खत्म हो सके । लोगों की आपसी लड़ाई – झगड़ा खत्म हो। आपने यहां तक पढ़ा उसके लिए Thank you ……..