अति महत्वाकांक्षा एवं लालच

एक छोटे से कस्बे में एक दीनदयाल नामक एक महत्वकांक्षी नवयुवक था जिसे उसके पिता ने पढ़ने के लिए बड़े शहरों में भेज दिया ताकि पर लिखकर महान कार्य करें एवं अपने परिवार का नाम रोशन करें 

दीनदयाल चार सहपाठी  के साथ आगे की पढ़ाई की यात्रा आरंभ कर दिया पर घरेलू कार्य में साथियों का सहयोग करने के बदले में दीनदयाल झूठ बोल कर अपना समय गलत कार्यों में खर्च करने लगा जिसके कारण उसके सहपाठी ने हमेशा उससे नाराज ही रहते थे 

धीरे-धीरे इसी प्रकार समय बीतने लगा पढ़ाई खत्म करने के बाद नौकरी की तलाश जारी किया कुछ वर्षों तक नौकरी नहीं लगने के उपरांत उसके पिता ने उसकी शादी करवा दे शादी के बाद दीनदयाल ने अपनी पत्नी को अपने साथ बड़े शहर में किराए के मकान में रहने लगा एवं घर-घर बच्चे को ट्यूशन पढ़ा कर अपना गुजारा भत्ता काफी कटाई से करने लगा 

अपनी जात पात को बदलकर एक झूठ का सहारा लेकर एक अच्छी कंपनी में नौकरी करने लगा इसी दौरान उसके यहां एक पुत्री पैदा हो गई जिसे दीनदयाल चिंतित रहने लगा वह सोचने लगा कि उसके यहां एक पुत्र रूपी रत्न पैदा  होता तो वह उसके नाम को रोशन करता 

उसका ज्यादातर ध्यान पुत्र प्राप्ति होने के कारण कंपनी के कार्यों में मन लगाकर काम नहीं करने के कारण उसे कंपनी से निकाल दिया गया इसी दौरान उसके यहां फिर से एक और पुत्री का जन्म हुआ 

एवं बेरोजगार की स्थिति में रहने के कारण वाह तंगी हालात से गुजर रहा था इसी बीच दीनदयाल के ससुर जब अपनी पुत्री के यहां आए एवं में के बाद उसे काफी दुख हुआ उसने अपने संबंधों से उधार लेकर गुजारा भत्ता हेतु एक गाड़ी खरीद को दे दी और समझाया कि ताकि परिवार से हो सके   उसके बाद उसके बाद दीनदयाल गाड़ी चला कर अपन अपना गुजारा भत्ता उजाला करने लगा 

दीनदयाल की अच्छी हालत होने के उपरांत जब उसे के ससुर ने गाड़ी खरीदने के समय अपना दिया हुआ पैसा वापस मांगा तो वह रुपया को अपने संभलता कृपया अपने संबंधियों को लौटा सके तो दीनदयाल ने उस समय भी झूठ बोलकर रुपया देने से इनकार कर दिया जिसके कारण ससुर को काफी दुख हुआ इसी दौरान दीनदयाल को दीनदयाल के यहां एक पुत्री का जन्म हो गया 

उसके बाद का उसके बाद वह काफी चिंतित रहने लगा परिवार के खर्च में बढ़ोतरी के उपरांत रात में भी किसी दुकान पर कार्य करने लगा था कि घर की माली हालात और बेहतर हो सके और इसी तरह में बिकने लगा तीनों पुत्रियों के पढ़ाई सरकारी विद्यालय में जैसे-तैसे हो रही थी इसी दौरान उसके यहां एक पुत्री का जन्म पुणे से दीनदयाल को काफी खुशी हुई ज्यादातर देने के कारण उसकी तीनों पुत्री कुपोषित दिखने लगी और तीनों की पढ़ाई भी हो रही थी दीनदयाल के कोने में एक और हो जाए तो दोनों मिलकर बाद में परिवार की स्थिति हो सकती है

 उसके बाद उसकी पत्नी गर्भवती हुई तो बहुत खुश हुआ सारा ध्यान उसकी उसकी पत्नी पर था अभी बच्चा हो गए उसकी आंख फिर से एक पुत्री का जन्म हुआ जिसके बाद फिर से दीनदयाल उदास हो गया उसका मन उसका मन गाड़ी चलाने नहीं लगता था तब परिवार के कारण उसकी कार को बेचना पड़ गया जाता है कि

 भगवान प्रत्येक मनुष्य के भाग को जरूर खटखट आते हैं जब मनुष्य भगवान की सारी कुछ समझ जाता है तो वह मनुष्य का विकास होना शुरू हो जाता है उसके बाद दीनदयाल की नौकरी फिर से उसी कंपनी में हो गई 

अच्छे दिन फिर वापस आने लगे फिर अति महत्वाकांक्षा एवं लालच ने दीनदयाल का साथ नहीं छोड़ा बैंक से ऋण लेकर जमीन खरीदना एवं मकान बनवाने में सारा ध्यान लगा दिया परिवार का परिवार का खानपान एवं बच्चे की पढ़ाई लिखाई में जैसे तैसे हो रही थी परिवार के सभी सदस्य कुपोषित से दिखने लगी 

शुरू की तीनों पुत्रियां विवाह योग हो गई पैसे के अभाव में विवाह नहीं हो पा रहा था इधर मकान भी आधे अधूरे स्थिति में रहने के बावजूद भी दीनदयाल सपरिवार वहां रहने लगा वहां आसपास अच्छे मकान वाले उन्हें अपेक्षित दृष्टि से देखने लगे इसी कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा का भी होने लगा एक

 तीसरे नंबर की लड़की भी गलत संगत के कारण भाग कर शादी कर ली दीनदयाल के ससुर भी उसके बर्ताव के कारण उसका साथ छोड़ दिया दीनदयाल की सभी जमीनों को बेचकर सभी परियों की शादी नहीं होने उचित नहीं होने के कारण उनकी परिवार दीनदयाल को अपनी गलती का एहसास हो गया कि झूठ बोलता एवं ना अपने ससुर से व्यवहार खराब करता एवं समायोजित कार्य न करने के कारण उसकी स्थिति  बनी हुई है

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