Best Motivational Story 2020/ दो चीटियों की कहानी/Story of two ants .
यह दो चीटियां की कहानी है । एक चींटी शक्कर के ढेर पर रहती थी और दूसरी चींटी नमक के ढेर पर रहती थी।
एक दिन अचानक मार्ग में दोनों चीटियों का मिलान हुआ । वह दोनों एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश हुई। दोनों ने विदा होते समय एक दूसरे को अपने घर आने का आमंत्रण दिया । नमक वाली चींटी बोली , बहना मेरा स्थान बड़ा ही रम्य है । मैं वहां नमक के ढेर पर खूब मौज से रहती हूं । तुम एक दिन मेरे घर पर आवश्य आना । मैं तुम्हें बहुत सारा नमक दूंगी । शक्कर वाली चींटी ने उसका प्रेम आग्रह स्वीकार किया और मधुर स्वर में बोली , ठीक है कल मैं तुम्हारे घर पर अवश्य आऊंगी । फिर दोनों वहां से अपने-अपने घर को चली गई ।
दूसरे दिन शक्कर वाली चीटी मधुर अभिलाषा के साथ अपनी सहेली के घर पर पहुंची । नमक वाली चींटी ने उसका भाव भरा स्वागत किया । फिर थोड़ी देर तक बातचीत करके , नमक का टुकड़ा उसके आगे ला कर रख दी ।शक्कर वाली चीटी ने जैसे ही अपनी जबान पर एक नमक का टुकड़ा रखी । उसका मुंह खारा खारा हो गया और उसने थूक दिया । वही बोली , बहना तुमने मुझे यह खरा खरा क्या खिला दिया । तुम ऐसी चीज को खाकर जीवित कैसे रहती हो ? मैं तुम्हें मीठा जैसा शक्कर खिलाऊंगी । तुुुुम्हारा मुंह मीठा हो जाएगा । जो तुने कभी खाई नहीं होगी । नमक वाली चींटी बोली , बहना तुम क्या बोलती हो ? कितना अच्छा हमारा भोजन है । नहीं , नहीं कल तुम मेरे घर पर आओ । यह कह शक्कर वाली चींटी अपने घर चलने के लिए तैयार हो गई और अपने घर चली गई ।
नमक वाली चींटी अपने मन सोची , यदि मुझे वहां पर मेरी इच्छा के अनुरूप भोजन नहीं मिला , तो मैं क्या करूंगी ? मैं तो भूखी रह जाउंगी । तो उसने अपनी मुंह में नमक का एक टुकड़ा छुपा ली और शक्कर वाली चींटी के घर गयी ।
शक्कर वाली चींटी ने नमक वाली चींटी का स्वागत किया । थोड़ी देर इधर उधर की बातचीत की और उसके सामने शक्कर एक टुकड़ा ला कर रख दी । जब नमक वाली चींटी ने अपने मुंह में शक्कर का एक टुकड़ा रखी ।
शक्कर वाली चीटी ने पूछा कैसा स्वाद लगा ? नमक वाली चींटी ने कहा , कुछ भी नया स्वाद नहीं आया । जो मैं खाती थी वही स्वाद आया । मुझे तो कुछ भी मीठा स्वाद नहीं आ रहा है । तुम तो बता रही थी कि शक्कर तो बहुत मीठी होती है । शक्कर वाली चींटी ने बोली , ऐसे कैसे हो सकता है ? तुम दोबारा खाओ तो तुम्हें वह स्वाद मिलेगा । मीठी स्वाद मिलेगा । नमक वाली चींटी ने दो तीन बार खायी , फिर भी उसका स्वाद वैसा ही लगा । उसने बोली कोई नया स्वाद नहीं आया। तुम कहती हो शक्कर बहुत मीठा लगता है । कहां मीठा लगता है ? शक्कर वाली चींटी बहुत गंभीर सोच में पड़ गई ।
थोड़ी देर बाद उसने पूछा, तुम अपना मुंह खोलो क्योंकि मुझे लगता है कि तुमने जरूर अपने मुंह में कुछ दबायी हुई हो । जब उसने अपना मुंह खोली । यह मुंह में क्या रखी हो । उसे मुंह से बाहर निकलो। अब तुम यह शक्कर खाओ । तुम्हें यह शक्कर जरुर मीठा लगेगा ।
तब नमक वाली चीटी ने फिर से शक्कर का टुकड़ा अपने मुंह में रखा । शक्कर का मीठा स्वाद चखने के बाद बोली , अहा ! कितना मिठा है ? ऐसी शककर की मिठास का आनंद मुझे कभी नहीं मिला । अतः अब मैं भी तुम्हारे साथ यही रहूंगी।
यह कहानी क्या सिखाती है ? कहानी यह सिखाती है की कुछ भी पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है । बिना मूल्य चुकाए बिना कुछ मिलता नहीं । जब तक हम कुछ खोने को तैयार नहीं होंगे , तब तक हम कुछ पा नहीं सकते । इस ब्रह्मांड में हर चीज का अपना मूल्य है । कुछ भी पाने के लिए आपको उसका मूल्य चुकाना पड़ेगा। तभी आप पा सकते हैं यही जीवन का विधि विधान है ।
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