353 देशों के सभी सैनिक जानवर – पशु के समान है /All military animals in 353 countries are like animals

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युद्ध का इतिहास उतना ही पुराना है जितना की मानव जाति की कहानी है । जमींदारो की आपसी लडाई हो या राजा महाराजाओ की आपसी लडाई हो , फिर मारे जाते है सैनिक ।अनेक सभ्यताओ का अभ्युदय एंव विनाश हुआ परन्तु सैनिको के साथ युध्द कभी समाप्त नहीं हुआ । जैसे -जैसे सभ्यताओ का विकाश हुआ वैसे – वैसे नवीन हथियारो का अविष्कार हुआ और युद्ध का  स्वरूप में भी परिवर्तन आया । पहले के युद्ध  में सिर्फ सैनिक ही एक दुसरे सैनिक को मारा करते थे पर आज के युद्ध में सैनिक और आवाम दोनों मारे जाते है । पहले राजा अपनी गद्दी के लिए या अपने सम्राराज्य के विस्तार के लिए सैनिको का कत्ल करवाया । अब राजनेता अपनी कुर्सी के लिए सैनिको का कत्ल करवा रहे है । जैसे सैनिक इंसान नहीं पशु है । पशु और जानवरो को जिस प्रकार आज काटा जाता है वे पशु न तो अपने बारे में और न अपने तकलीफ के बारे में किसी को कुछ बोल नहीं पाते और न उनमें विरोध करने की इतनी ताकत होती है । पशुए इतनी असहाय , कमजोर और निर्बल है । ठिक इसी प्रकार सारे सैनिको की हालत है । जब भी जो कोई चाहा सैनिको को उतार दिया लडाई के मैंदान में मरने -मारने के लिए । मरता है सैनिक , रोता विलखता उसका परिवार है पर देश में विजय जुलूस निकाले जाते है । एक तरफ मातम तो एक तरफ खुशीयां इसी को हम देश कहते है। कुर्सी और गद्दी के लिए मरवा दिया जाता है सैनिको ।सबसे बडी बात की सैनिको को कोई और नहीं मारता बल्कि सैनिक ही सैनिक को मारता है । ये भी अजीब दुनिया की रीत है । देश के नाम पर सैनिको को बली चढा देना ,कूर्बान कर देना । यह कैसा विधान है ?

आपको मालुम है कि प्रथम विश्वयुद्ध में भाग लेने वाले दोनो पक्षो के 6.5 करोड सैनिको में से एक करोड 30 लाख सैनिक मारे गए और 2 करोड 20 लाख सैनिक घायल हुए , घयलो में 70 लाख सैनिक बिलकुल पंगु हो गए । इसी प्रकार दुसरा विश्वयुद्ध में दोनों पक्षो के लगभग 10 करोड सैनिक भाग लिया । इस युद्ध में रूस ने अपना 2.1 करोड सैनिक गवाएं । चंगेज खान ने अपने क्षेरफल विस्तार के लिए उसने अपने समय की 11फीसदी आवादी का सफाया कर दिया , जो तकरीबन 4 करोड आवादी होती है । कारगील युद्ध , भारत -पाक युद्ध 1971 , भारत -चीन युद्ध  , कोरिया युद्ध  , वियतनाम युद्ध , इरान – इराक युद्धों  लाखो सैनिक मारे गये । न जाने कितने युद्ध हुए ,कितने सैनिक और आवाम मारे गये ।

अगर तृतिय विश्वयुद्ध हुआ तो कुछ भी नहीं बचेगा , न जलीय जीव , स्थलीय जीव , और न ही आकाशीय जीव बचेगा ।एक रिपोर्ट (i.i.s.s  2014 ) के अनुसार आज पुरे विश्व में reserve force और regular reserve paramilitray सैनिको की संख्या लगभग 11,03,15,865 है । UN के 191 देशों में से 171 दशों का रिकार्ड है ।

1:- युद्ध को रोकने का उपाय ।

अगर आप नहीं चाहते है कि कोई युद्ध हो , एक भी सैनिक मरे नहीं तो एक ही रास्ता है  कि आपके आस पास में कोई सैनिक है , आपके रिस्तेदार में सैनिक है , आपके बेटा -बेटी सैनिक है ,या पढोसी में कोई सैनिक है । उन्हें आप समझाए हथियार न उठाये । अगर हथियार उठाना ही है तो आतंकवाद के विरूद्ध उठाये या धरती पर अमन और शान्ति बनाये रखने के लिए हथियार उठाये । बाकी किसी भी युद्ध के लिए हथियार न उठाये । किसी भी देश के राष्ट्रअध्यक्ष सैनिको को हथियार उठाने को प्रेरित करता है या दबाव डालता है तो सैनिक हथियार तभी उठाये जब उसका राष्ट्रअध्यक्ष हथियार लेकर सबसे आगे खडा हो । पहले मरेगा राष्ट्रअध्यक्ष बाद में सैनिक । जब भी राष्ट्रअध्यक्ष की मरने बारी आएगी तभी ये सभी राष्ट्रअध्यक्ष नये रास्ते की तलाश करेंगे अन्यथा नहीं ।

सैनिको को भी जिने का अधिकार हो । उनके अंदर भी दिल है, ह्वृदय है । उन्हें भी चोट लगती है तो दर्द होता है उनका भी अपना एक परिवार है वो भी एक इंसान है कोई मशिन नहीं और  न ही वे पशु है ।

अगर आपको सैनिको से प्रेम है उनके बाल-बच्चों से प्रेम है और आप खुद से प्रेम करते है , आपने बच्चों से प्रेम करते है , और बच्चो को सुरक्षित  जीवन देना चाहते है तो आप इस मेसेज को अपने तक न रख कर अपने यार दोस्तों में शेयर करे । अब समय नहीं रहा सोने का । सो आप अपनी आंखे खोले । ऐसा नहीं की समय हाथ से निकल जाए । हम सब का विनाश सामने खडी है ।

2:- समय की मांग

353 देशों को जोडना और सभी 353 देशों के सैनिको को सिवील पुलिस में चेंज करना तो अपने आप 80/90 भ्रष्टाचार कम हो जायेगा ।

( राष्ट्र प्रेम इंसानो की मौत है , धरती प्रेम इंसानो की जिन्दगी है )

( शैतानो के लिए देश महत्वपूर्ण होता है , इंसानो के लिए धरती महत्वपूर्ण होता हे  )

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